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डॉक्टर की सलाह: बचिए नीली रोशनी से, चेहरे को बना देती है दागदार

Mon, 14 Nov 2022 04:18 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 14 Nov 2022 04:18 PM IST
सार

मेडिकल कॉलेज रोड स्थित एक रिजॉर्ट में त्वचा रोग विशेषज्ञों की नेशनल कान्फ्रेंस क्यूटीकॉन-2022 का आयोजन किया गया था। इसमें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के करीब 300 चर्म रोग विशेषज्ञ शामिल हुए। इस दौरान 60 से अधिक रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए गए।

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light of mobile laptop CFL and blue light causes freckles on face
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : istock

विस्तार

त्वचा रोग विशेषज्ञों का कहना है कि सूरज, मोबाइल, लैपटॉप, गैस चूल्हा और सीएफएल से निकलने वाली नीली रोशनी लोगों के चेहरे को दागदार बना देती है। सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों से तो लोग बच भी जाते हैं, लेकिन मोबाइल, लैपटॉप और सीएफएल से बचना मुश्किल हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल या लैपटॉप पर काम करते समय सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए।  
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मेडिकल कॉलेज रोड स्थित एक रिजॉर्ट में त्वचा रोग विशेषज्ञों की नेशनल कान्फ्रेंस क्यूटीकॉन-2022 का आयोजन किया गया था। इसमें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के करीब 300 चर्म रोग विशेषज्ञ शामिल हुए। इस दौरान 60 से अधिक रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए गए। रविवार को इस दो दिवसीय कार्यक्रम का समापन हो गया। इस कार्यक्रम में त्वचा रोग विशेषज्ञों ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं।  
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चर्म रोग विशेषज्ञ कर्नल डॉक्टर भारत भूषण ने बताया कि सूरज या कृत्रिम रोशनी से निकलने वाली अल्ट्रावायलेट किरणें चेहरे की त्वचा के लिए ज्यादा खतरनाक होती हैं। इसकी वजह से त्वचा की ऊपरी परत में मिलेनिन खत्म होने लगता है और चेहरे की त्वचा काली पड़ जाती है, जिसे सामान्य भाषा में झाईं कहा जाता है। यह केवल सूर्य की किरणों से ही नहीं होती है, बल्कि नीली रोशनी मोबाइल, लैपटॉप और घर में प्रयोग होने वाले सीएफएल से भी होती है। ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
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कार्यक्रम में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ संतोष सिंह ने बताया कि लोगों में भ्रम है सनस्क्रीन का प्रयोग तभी करना चाहिए जब दिन में घर से बाहर निकलना हो। आप जब भी किसी तेज रोशनी के सामने जाएं तो सनस्क्रीन जरूर लगाएं। यहां तक कि दिन और रात में मोबाइल या लैपटॉप पर काम करते समय भी सनस्क्रीन का प्रयोग करना चाहिए।

चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. सतीश चंद्रा ने बताया कि नीली रोशनी कंप्यूटर, मोबाइल, सीएफएल के अलावा गैस चूल्हे से भी निकलती है।  महिलाओं में हार्मोनल बदलाव और गर्भनिरोधक दवाओं के सेवन से भी चेहरे पर झाईं का खतरा रहता है। इससे किशोरियां और महिलाएं घबरा जाती हैं। यदि किसी के चेहरे पर झाईं पड़ती है तो उसे अच्छे चिकित्सक से संपर्क करके इलाज कराना चाहिए।

कोरोना ने हर्पीज जेस्टर का बनाया शिकार
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉ राजकुमार गुप्ता ने बताया कि कोरोना का असर फेफड़े के अलावा त्वचा पर भी हुआ है। कोरोना के कारण हर्पीज जेस्टर के मरीजों की संख्या बढ़ी है। इसमें त्वचा पर मामूली दानों से शुरू होकर शरीर के एक हिस्से पर कई दाने एक साथ निकल आते हैं। इस वजह से दर्द, जलन और सूजन की समस्या रहती है

हल्दी और सरसों के तेल के उबटन से त्वचा में आता है निखार
डॉ आरपी त्रिपाठी ने बताया कि त्वचा शरीर का सबसे बड़ा अंग है। हल्दी, दूध और सरसों के तेल के साथ बनने वाला उबटन त्वचा में निखार लाता है। इसके प्रयोग से त्वचा की ऊपरी परत की डेड स्किन (मृत कोशिकाएं) हट जाती हैं। उसकी जगह नई कोशिकाएं आती हैं। इससे चेहरे पर निखार आ जाता है। गोरा और सुंदर दिखने के लिए कास्मेटिक सर्जरी सेहत के लिए ठीक नहीं है।

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