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स्मृतिशेष: चार बार नौकरी से बर्खास्त, एक महीने जेल में रहे, फिर भी नहीं थमा केएल गुप्ता का संघर्ष

Sat, 07 Nov 2026 01:53 PM IST
अनुराग रंजन संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Published by: अनुराग रंजन Updated Sat, 07 Nov 2026 01:53 PM IST
सार

वर्ष 1981 में रेलवे सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनका संघर्ष जारी रहा। कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर वह हमेशा मुखर रहे। उन्हें दुनिया का सबसे उम्रदराज सक्रिय ट्रेड यूनियन नेता माना जाता था। उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के लिए भी प्रस्तावित किया गया था।

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KL Gupta Dismissed Four Times and Jailed for a Month but Never Gave Up His Fight for Railway Workers Rights
सबसे उम्रदराज सक्रिय ट्रेड यूनियन नेता माने जाते थे केएल गुप्ता - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

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रेलवे कर्मचारियों के अधिकारों के लिए संघर्ष करना कन्हैया लाल गुप्ता (केएल गुप्ता) के जीवन का सबसे अहम उद्देश्य रहा। इस लड़ाई में उन्हें चार बार नौकरी से बर्खास्त होना पड़ा और एक महीने तक जेल में भी रहना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 110 वर्ष की उम्र में शुक्रवार को उनके निधन के साथ ही भारतीय रेलवे के मजदूर आंदोलन का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया।

बांसगांव के रहने वाले केएल गुप्ता ने भारतीय सेना में 10 वर्षों तक सेवा दी। इसके बाद वर्ष 1946 में रेलवे की नौकरी शुरू की और जल्द ही पूर्वोत्तर रेलवे मजदूर यूनियन (नरमू) से जुड़ गए। 14 अप्रैल 1952 को पूर्वोत्तर रेलवे के गठन के समय से ही उन्होंने यूनियन के महामंत्री की जिम्मेदारी संभाली। रेलकर्मियों के बीच उनकी स्वीकार्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह 67 बार महामंत्री चुने गए। हर बार ध्वनिमत से उनका निर्वाचन हुआ। वर्ष 2025 में उन्होंने महामंत्री का पद छोड़कर अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली।

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नरमू के मीडिया प्रभारी संजय मालवीय ने बताया कि अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में उन्हें लोकनायक जयप्रकाश नारायण और पूर्व रक्षामंत्री जॉर्ज फर्नांडीज जैसे दिग्गज नेताओं के साथ काम करने का अवसर मिला। पूर्व राष्ट्रपति वीवी गिरि के दौर में भी वह मजदूर आंदोलनों में सक्रिय रहे। ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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वर्ष 1981 में रेलवे सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनका संघर्ष जारी रहा। कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर वह हमेशा मुखर रहे। उन्हें दुनिया का सबसे उम्रदराज सक्रिय ट्रेड यूनियन नेता माना जाता था। उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के लिए भी प्रस्तावित किया गया था।

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1974 के आंदोलन में गए जेल

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नरमू के केंद्रीय कार्यालय पर पूर्व महामंत्री केएल गुप्ता को पुष्पांजलि करते पूर्वोत्तर रेलवे के महाप - फोटो : अमर उजाला

केएल गुप्ता को रेलवे कर्मचारियों के हितों की लड़ाई के कारण चार बार नौकरी से बर्खास्त होना पड़ा। वर्ष 1974 के रेलवे आंदोलन में भी उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। इस दौरान उन्हें करीब एक महीने तक जेल में रहना पड़ा। नौकरी से बर्खास्त किए जाने के बावजूद उन्होंने आंदोलन का रास्ता नहीं छोड़ा। वर्ष 1981 में सेवानिवृत्त होने तक उनका संघर्ष जारी रहा। वर्ष 2020 में अमर उजाला को दिए साक्षात्कार में उन्होंने बताया था कि संगठन को वह परिवार मानते थे और कर्मचारियों के हितों को व्यक्तिगत हितों से ऊपर रखते थे।

400 कर्मचारियों को नियमित कराने के लिए लड़ी लड़ाई

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भाषण देते केएल गुप्ता की तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

केएल गुप्ता ने लेखा विभाग में मानदेय पर काम करने वाले करीब 400 कर्मचारियों को नियमित कराने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। उनके प्रयास से इन कर्मचारियों के लिए सर्विस कमीशन की परीक्षा कराई गई। शुरुआत में सभी कर्मचारी परीक्षा में असफल हो गए तो उन्होंने आंदोलन शुरू कर दिया। इसके बाद कर्मचारियों को सफलता मिली और सभी 400 कर्मचारियों को नियमित कराया गया। इसे वह अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानते थे।

कूल्हे की हड्डी टूटने पर भी नहीं छोड़ा संगठन का काम

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26 जनवरी 2021 को झंडा फहराने के दौरान केएल गुप्ता का टूट गया था हाथ (फाइल फोटो) - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

केएल गुप्ता के संघर्ष का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कूल्हे की हड्डी टूटने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान भी वह संगठन का काम करते रहे। साक्षात्कार में उन्होंने बताया था कि कर्मचारियों की लड़ाई में उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ। उनका मानना था कि जीवन में संघर्ष से पीछे नहीं हटना चाहिए। उनका संदेश था कि जीना है और रहना है तो कदम-कदम पर लड़ना सीखना होगा।

 

 

मुनीहारी में रहकर की पढ़ाई, नियमित दिनचर्या थी जीवन का हिस्सा

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शव यात्रा में शामिल विभिन्न संगठन के सदस्य व रेलकर्मी - फोटो : अमर उजाला

उनका बचपन भी संघर्षों के बीच बीता। पिता के निधन के बाद मां उन्हें लेकर ननिहाल चली गई थीं। इसके बाद उन्होंने मुनीहारी मोहल्ले में रहकर पढ़ाई की। महाराणा प्रताप महाविद्यालय से स्नातक की शिक्षा पूरी की। उन्होंने अपने जीवन में अनुशासन और नियमित दिनचर्या को हमेशा महत्व दिया। सुबह जल्दी उठना और व्यायाम करना उनकी आदत में शामिल था। 104 वर्ष की उम्र में भी वह सुबह जल्दी उठकर अपना काम करते थे। उनका मानना था कि सक्रियता और सकारात्मक सोच ही स्वस्थ जीवन का आधार है। उनका पूरा जीवन रेल कर्मचारियों के अधिकारों की लड़ाई, संगठन के प्रति निष्ठा और संघर्ष की मिसाल रहा। उनके निधन से रेलवे मजदूर आंदोलन ने एक ऐसे नेतृत्वकर्ता को खो दिया, जिसने अपना जीवन कर्मचारियों की आवाज बुलंद करने में लगा दिया।




 

कभी लगा नहीं इतनी बड़ी शख्सियत से मिल रहे

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विनोद राय, महामंत्री, पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

तकरीबन 34 साल से मैं उन्हें जानता था। उनके बारे में बहुत सुना था। पर, पहली मुलाकत 30 साल पहले हुई। लगा ही नहीं इतने बड़े शख्सियत से मिल रहे हैं। उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। संगठन अलग था पर जब मिलते थे आदर भाव वही था। पूछते थे,,,क्या हलचल है विनोद बाबू। उनसे हमेशा पूछता था अपने हेल्थ का राज बता दीजिए। इस पर मुस्कुरा देते थे। अपने पूरा जीवन में ऐसा व्यक्ति नहीं देखा कि जिसके नाम पर यूनियन चलता हो। मैं केएल गुप्ता के निधन से कर्मचारी संगठन ने अपना एक मजबूत स्तंभ खो दिया है। सात दशक तक महामंत्री के रूप में संगठन की जिम्मेदारी निभाना अपने आप में बड़ी बात है। -विनोद राय, महामंत्री, पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ


 

साथ रहकर सीखा ट्रेड यूनियन का ककहरा 

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ओंकार नाथ सिंह, संयुक्त महामंत्री, एनई रेलवे मजदूर यूनियन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

रेलवे में मेरी भर्ती खेल कोटे के तहत हुई थी। खेलकूद में रुचि के साथ एक दिन स्टोर शाखा के शाखा मंत्री विजय प्रताप सिंह से मुलाकात हुई। उन्होंने कहा कि आप युवा हैं, खेलकूद के साथ मजदूर आंदोलन में भी भाग लेना चाहिए। उनकी प्रेरणा से वर्ष 1997 में एनई रेलवे मजदूर यूनियन की सदस्यता ग्रहण की। विजय प्रताप सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने मुझे स्टोर डिपो का शाखा मंत्री बनाया। इसी दौरान केएल गुप्ता से मुलाकात हुई। धीरे-धीरे उनके साथ नजदीकियां बढ़ती गईं। उनके साथ रहकर मैंने ट्रेड यूनियन का ककहरा सीखा। वह बच्चों को अक्षर ज्ञान कराने की तरह यूनियन की बारीकियां समझाते थे। मुझे दो बार उनके पैर और कूल्हे की बीमारी के दौरान सेवा करने का अवसर मिला। -ओंकार नाथ सिंह, संयुक्त महामंत्री, एनई रेलवे मजदूर यूनियन

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