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Kharmas 2021: खरमास कल से, बंद हो जाएंगे मांगलिक कार्य

Wed, 15 Dec 2021 02:28 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 15 Dec 2021 02:28 PM IST
सार

सूर्य के धनु राशि में प्रवेश के साथ होगी खरमास की शुरुआत,14 जनवरी को मकर राशि में सूर्य के प्रवेश से होगा समापन।

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Kharmas from tomorrow Manglik work will stop
खरमास 2021 - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

खरमास की शुरुआत 16 दिसंबर से हो रही है। अब एक माह तक मांगलिक कार्य नहीं होंगे। हृषिकेश पंचांग के अनुसार, बृहस्पतिवार को सूर्य वृश्चिक राशि छोड़कर धनु राशि में दोपहर एक बजकर एक मिनट पर प्रवेश कर रहे हैं। अगले वर्ष 14 जनवरी की रात आठ बजकर 49 मिनट पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ खरमास का समापन हो जाएगा। इसके बाद सभी तरह के मांगलिक कार्य फिर होने लगेंगे।

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ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि सूर्य जब धुन राशि में पहुंचते हैं तो धनु की संक्रांति लगती है। इसी दिन से खरमास प्रारंभ हो जाता है। मकर की संक्रांति लगते ही खरमास समाप्त हो जाता है। इस एक माह की अवधि में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है।
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इस मास में भगवत पूजन का विशेष महत्व है। मंदिरों में धनुर्मास का उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान दूध से निर्मित पकवान (खीर आदि) के भोग का विशेष महत्व है। निष्काम भाव से धर्मशास्त्र की पुस्तक का वाचन, स्तोत्र पाठ आदि धार्मिक क्रियाओं को संपन्न करने की अनुज्ञा है।
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इसलिए नहीं होते मांगलिक कार्य

पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि वर्ष में सूर्य की 12 संक्रांतियां होती हैं। इन राशियों पर सूर्य की स्थिति रहती है। प्रत्येक एक मास तक एक राशि में रहने के बाद सूर्य दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं। इसमें दो संक्रांतियों पर सूर्य बृहस्पति की राशि धनु और मीन राशि में होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य की स्थिति बृहस्पति की राशि में होती है तो बृहस्पति का तेज समाप्त हो जाता है। मांगलिक कार्यों के लिए तीन ग्रहों के बल की आवश्यकता होती है।

ये हैं सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति। इनमें से किसी भी ग्रह के बल में न्यूनता होने से मांगलिक कार्य अवरुद्ध हो जाते हैं। खरमास के महीने में बृहस्पति के बलहीन होने से शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। इसी प्रकार जब महीने में सूर्य चंद्रमा के अत्यंत निकट आ जाता है तो उस समय भी शुभ मुहूर्त का अभाव रहता है।

खरमास में न करें ये कार्य

पंडित अवधेश मिश्रा ने बताया कि वधू प्रवेश, वर वरण, कन्या वरण, बरच्छा, विवाह से संबंधित समस्त कार्य, मुंडन, यज्ञोपवीत, दीक्षा ग्रहण, गृहप्रवेश, गृहारंभ, कर्णवेध, प्रथम बार तीर्थ पर गमन, देव स्थापन, देवालय का आरंभ, मूर्ति स्थापन, किसी विशिष्ट यज्ञ का आरंभ, कामना परक कर्म का आरंभ, व्रतारंभ, व्रत का उद्यापन आदि कार्य खरमास में नहीं किए जाते हैं।


भगवान सूर्य एवं श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना विशेष फलदायी

पंडित अरविंद गिरि कहते हैं कि खरमास में सूर्य की गति मंद पड़ने लगती है। इसलिए इस मास में सूर्यदेव और श्रीकृष्ण की उपासना से विशेष लाभ प्राप्त होता है। खरमास में पवित्र नदियों में स्नान से कई रोगों से मुक्ति मिलती है। इस मास में पड़ने वाली एकादशी व्रत करने से सभी प्रकार की बाधाएं दूर हो जाती हैं। इसके अतिरिक्त नवमी तिथि को कन्याओं को भोजन कराकर उपहार देने से भी बाधाएं दूर होती हैं।

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