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Gorakhpur News: पत्रिका कल्याण के सौ वर्ष पूरे होने पर गीता वाटिका में आज विशेष आयोजन
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-नौ अगस्त को पूरे हो रहे कल्याण पत्रिका प्रकाशन के 100 वर्ष
-प्रथम अंक से चयनित पदों का गायन भगवन्नाम संकीर्तन और पूजन-अर्चन होगा
गोरखपुर। विश्व प्रसिद्ध धार्मिक पत्रिका कल्याण के प्रकाशन के सौ वर्ष नौ अगस्त को पूरे हो रहे हैं। श्रावण कृष्ण एकादशी के पावन अवसर पर इस दिन गीता वाटिका स्थित हनुमान प्रसाद पोद्दार की तपोस्थली में कल्याण की प्राकट्य शताब्दी मनाई जाएगी।
इसमें कल्याण के प्रथम अंक से चयनित अनेक पदों का गायन, भगवन्नाम संकीर्तन और हनुमान प्रसाद पोद्दार और कल्याण का पूजन-अर्चन किया जाएगा। हनुमान प्रसाद पोद्दार स्मारक समिति के महामंत्री रसेंदु फोगला के अनुसार कल्याण का पहला अंक नौ अगस्त, 1926 को प्रकाशित हुआ था। इसका प्रथम अंक मुंबई के वेंकटेश्वर प्रेस में मुद्रित हुआ था। इसके बाद दूसरे वर्ष के दूसरे अंक से इसका प्रकाशन गीताप्रेस, गोरखपुर से होने लगा। पत्रिका के आदि संपादक गृहस्थ संत हनुमान प्रसाद पोद्दार थे।
इन्होंने प्रथम अंक में कल्याण की आवश्यकता शीर्षक से संपादकीय लिखा था। इसमें उन्होंने बताया था कि वास्तविक कल्याण परमात्मा की प्राप्ति में है और इसके लिए सभी मनुष्यों का समान अधिकार है। उन्होंने धर्म, जाति, धन, ऐश्वर्य और विद्या आदि के भेद से ऊपर उठकर परमात्मा की भक्ति को जीवन का परम पुरुषार्थ बताया।
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-प्रथम अंक से चयनित पदों का गायन भगवन्नाम संकीर्तन और पूजन-अर्चन होगा
गोरखपुर। विश्व प्रसिद्ध धार्मिक पत्रिका कल्याण के प्रकाशन के सौ वर्ष नौ अगस्त को पूरे हो रहे हैं। श्रावण कृष्ण एकादशी के पावन अवसर पर इस दिन गीता वाटिका स्थित हनुमान प्रसाद पोद्दार की तपोस्थली में कल्याण की प्राकट्य शताब्दी मनाई जाएगी।
इसमें कल्याण के प्रथम अंक से चयनित अनेक पदों का गायन, भगवन्नाम संकीर्तन और हनुमान प्रसाद पोद्दार और कल्याण का पूजन-अर्चन किया जाएगा। हनुमान प्रसाद पोद्दार स्मारक समिति के महामंत्री रसेंदु फोगला के अनुसार कल्याण का पहला अंक नौ अगस्त, 1926 को प्रकाशित हुआ था। इसका प्रथम अंक मुंबई के वेंकटेश्वर प्रेस में मुद्रित हुआ था। इसके बाद दूसरे वर्ष के दूसरे अंक से इसका प्रकाशन गीताप्रेस, गोरखपुर से होने लगा। पत्रिका के आदि संपादक गृहस्थ संत हनुमान प्रसाद पोद्दार थे।
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इन्होंने प्रथम अंक में कल्याण की आवश्यकता शीर्षक से संपादकीय लिखा था। इसमें उन्होंने बताया था कि वास्तविक कल्याण परमात्मा की प्राप्ति में है और इसके लिए सभी मनुष्यों का समान अधिकार है। उन्होंने धर्म, जाति, धन, ऐश्वर्य और विद्या आदि के भेद से ऊपर उठकर परमात्मा की भक्ति को जीवन का परम पुरुषार्थ बताया।
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