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Gorakhpur News: कल्याण के प्रकाशन के 100 वर्ष पूरे, गीता वाटिका में मनाया प्राकट्य शताब्दी दिवस
Mon, 10 Aug 2026 02:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Mon, 10 Aug 2026 02:01 AM IST
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गोरखपुर। विश्व प्रसिद्ध धार्मिक व आध्यात्मिक पत्रिका कल्याण के प्रकाशन के 100 वर्ष पूरे होने पर रविवार को गीता वाटिका में प्राकट्य शताब्दी मनाया गया। संत हनुमान प्रसाद पोद्दार के कक्ष में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
सुबह से शुरू हुए कार्यक्रम में कल्याण के प्रथम अंक से चयनित पदों का गायन किया गया। इसके बाद भगवन्नाम संकीर्तन हुआ। हनुमान प्रसाद पोद्दार और कल्याण का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया। बता दें कि कल्याण का पहला अंक श्रावण कृष्ण एकादशी, विक्रम संवत 1983 में प्रकाशित हुआ था। इसकी छपाई मुंबई के वेंकटेश्वर प्रेस में हुआ था। दूसरे वर्ष के दूसरे अंक से इसका मुद्रण गीता प्रेस में शुरू हुआ। सौ वर्ष की यात्रा में कल्याण ने सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और भक्ति के प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में देश-विदेश में विशिष्ट पहचान बनाई है।
शताब्दी समारोह में भाईजी के विचार का स्मरण करते हुए कल्याण की सौ वर्ष की गौरवपूर्ण यात्रा को नमन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि पत्रिका ने एक शताब्दी से भारतीय सनातन संस्कृति, धर्म, अध्यात्म, सदाचार और भक्ति की अमूल्य परंपरा को लोगों तक पहुंचाया है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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सुबह से शुरू हुए कार्यक्रम में कल्याण के प्रथम अंक से चयनित पदों का गायन किया गया। इसके बाद भगवन्नाम संकीर्तन हुआ। हनुमान प्रसाद पोद्दार और कल्याण का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया। बता दें कि कल्याण का पहला अंक श्रावण कृष्ण एकादशी, विक्रम संवत 1983 में प्रकाशित हुआ था। इसकी छपाई मुंबई के वेंकटेश्वर प्रेस में हुआ था। दूसरे वर्ष के दूसरे अंक से इसका मुद्रण गीता प्रेस में शुरू हुआ। सौ वर्ष की यात्रा में कल्याण ने सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और भक्ति के प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में देश-विदेश में विशिष्ट पहचान बनाई है।
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शताब्दी समारोह में भाईजी के विचार का स्मरण करते हुए कल्याण की सौ वर्ष की गौरवपूर्ण यात्रा को नमन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि पत्रिका ने एक शताब्दी से भारतीय सनातन संस्कृति, धर्म, अध्यात्म, सदाचार और भक्ति की अमूल्य परंपरा को लोगों तक पहुंचाया है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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