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Krishna Janmashtami: ग्रह-नक्षत्रों के अद्भुत संयोग के बीच मनेगी जन्माष्टमी, 30 अगस्त को होगा जश्न
Thu, 26 Aug 2021 03:54 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 26 Aug 2021 03:54 PM IST
सार
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व के समय छह तत्वों, भाद्रपद का महिना, कृष्ण पक्ष, अर्धरात्रि काल अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र, वृष का चंद्रमा और बुधवार या सोमवार का दिन बड़ी कठिनाई से प्राप्त होती है।
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कृष्ण जन्माष्टमी
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 30 अगस्त सोमवार को मनाया जाएगा। वाराणसी से प्रकाशित हृषिकेश पंचांग के अनुसार, इस दिन अष्टमी तिथि का मान रात्रि 12 बजकर 14 मिनट तक है। सुबह छह बजकर 41 मिनट तक कृतिका नक्षत्र, पश्चात संपूर्ण दिन और रात्रि रोहिणी नक्षत्र व्याप्त है।
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इसी तरह से सुबह आठ बजकर 49 के बाद हर्षण योग और सुस्थिर नामक महा औदायिक योग भी है। ऐसे में इसी दिन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत का आयोजन होगा, क्योंकि अद्धरात्रि के समय अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का दुर्लभ संयोग बन रहा है।
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पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि, श्रीमद्भागवत, भविष्यादि सभी पुराणों के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि, बुधवार, रोहिणी नक्षत्र एवं वृष के चंद्रमा कालीन स्थिति में अर्द्धरात्रि के समय हुआ था। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व के समय छह तत्वों, भाद्रपद का महीना, कृष्ण पक्ष, अर्धरात्रि काल अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र, वृष का चंद्रमा और बुधवार या सोमवार का दिन बड़ी कठिनाई से प्राप्त होती है।
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सूर्य व बुध स्वगृही तो शनि और गुरु रहेंगे वक्री
कई बार भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की अर्धरात्रि को वृष का चंद्रमा तो होता है, लेकिन रोहिणी नक्षत्र का अभाव रहता है। कभी-कभी दिन में सप्तमी तिथि होती है और रात्रि के समय अष्टमी तो उसी दिन गृहस्थ जन जन्माष्टमी का पर्व मना लेते हैं। इस वर्ष 30 अगस्त सोमवार को सभी तत्वों का दुर्लभ योग मिल रहा है।
यह योग आठ वर्षों के पश्चात बना है। निर्णयसिंधु के अनुसार, आधी रात के समय रोहिणी में यदि अष्टमी तिथि मिल जाए तो उसमें श्रीकृष्ण का पूजन करने से तीन जन्मों के पाप दूर हो जाते हैं। बताया कि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी यदि रोहिणी से संयुक्त होती है तो वह जयंती नाम से जानी जाती है। जो व्यक्ति जयंती योग में उपवास करते हैं जन्मों के बंधन से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करते हैं।
पं. नरेंद्र उपाध्याय ज्योतिर्विद के अनुसार, सूर्य व मंगल इस बार 30 अगस्त को सिंह राशि में हैं, जहां सूर्य स्वगृही हैं। बुध और शुक्र कन्या राशि में हैं, जहां बुध स्वगृही हैं। शनि, मकर राशि में वक्री हैं। गुरु, कुंभ राशि में वक्री हैं। चंद्रमा एवं राहु का ग्रहण योग वृषभ राशि में बना हुआ है। ग्रहों की बात करें तो चंद्रमा और राहु के कुयोग को छोड़कर (ग्रहण योग) सभी ग्रहों की स्थित लगभग अच्छी है। जनमानस को भगवान श्रीकृष्ण का पूरा आशीर्वाद मिलेगा
यह योग आठ वर्षों के पश्चात बना है। निर्णयसिंधु के अनुसार, आधी रात के समय रोहिणी में यदि अष्टमी तिथि मिल जाए तो उसमें श्रीकृष्ण का पूजन करने से तीन जन्मों के पाप दूर हो जाते हैं। बताया कि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी यदि रोहिणी से संयुक्त होती है तो वह जयंती नाम से जानी जाती है। जो व्यक्ति जयंती योग में उपवास करते हैं जन्मों के बंधन से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करते हैं।
पं. नरेंद्र उपाध्याय ज्योतिर्विद के अनुसार, सूर्य व मंगल इस बार 30 अगस्त को सिंह राशि में हैं, जहां सूर्य स्वगृही हैं। बुध और शुक्र कन्या राशि में हैं, जहां बुध स्वगृही हैं। शनि, मकर राशि में वक्री हैं। गुरु, कुंभ राशि में वक्री हैं। चंद्रमा एवं राहु का ग्रहण योग वृषभ राशि में बना हुआ है। ग्रहों की बात करें तो चंद्रमा और राहु के कुयोग को छोड़कर (ग्रहण योग) सभी ग्रहों की स्थित लगभग अच्छी है। जनमानस को भगवान श्रीकृष्ण का पूरा आशीर्वाद मिलेगा