गोरखपुर में बड़ा हादसा: आईओसी बॉटलिंग प्लांट के सुपरवाइजर की मौत, रात से ही गैस उत्पादन ठप
गोरखपुर जिले के इंडियन ऑयल के बाटलिंग प्लांट में हादसा होने से रसोई गैस का उत्पादन ठप हो गया है। यहां गार्ड रूम का गेट टूटकर गिरने से सिक्योरिटी सुपरवाइजर की मौत हो गई है।
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गीडा सेक्टर-15 स्थित इंडियन ऑयल कारपोरेशन (आईओसी) के एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में सोमवार देर रात 11 बजे मुख्य द्वार का फाटक गिरने से सुपरवाइजर डीएन यादव की मौत हो गई। हादसे के बाद प्लांट से गैस का उत्पादन बंद कर दिया गया। इससे आपूर्ति प्रभावित हुई है।
उधर, मंगलवार शाम पोस्टमार्टम के बाद सुपरवाइजर का शव लेकर परिजन बॉटलिंग प्लांट पहुंच गए। गेट पर शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिए। परिजनों का आरोप है कि समय से सूचना नहीं दी गई। सीसीटीवी के साक्ष्यों से भी छेड़छाड़ की गई है। परिजन मामले में केस दर्ज करने की मांग पर अड़े रहे। देर रात मामले में समझौता हो गया। एसडीएम सुरेश कुमार राय ने बताया कि परिवार को 13 लाख रुपये नकद, पीएफ और बीमा का सात लाख रुपये देने के साथ ही परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की बात पर कंपनी के साथ लिखित समझौता हुआ है। इसके बाद प्रदर्शन खत्म कर दिया गया।
जानकारी के मुताबिक, बॉटलिंग प्लांट के मुख्य द्वार का फाटक काफी भारी था। इसे रोजाना कई लोग मिलकर बंद किया करते थे। सोमवार रात बड़हलगंज कस्बे के मूल निवासी सुपरवाइजर गार्ड के साथ मिलकर गेट को बंद कर रहे थे। इसी दौरान अचानक फाटक गिर गया और दबने से डीएन यादव गंभीर रूप से घायल हो गए। साथी कर्मचारी उन्हें लेकर सहजनवां सीएचसी गए, जहां से डॉक्टरों ने एयरफोर्स अस्पताल रेफर कर दिया। एयरफोर्स अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव लेकर फिर बॉटलिंग प्लांट पहुंच गए और प्रबंधन पर देरी से सूचना देने सहित कई आरोप लगाते हुए केस दर्ज करने की मांग करने लगे। सूचना पर बॉटलिंग प्लांट के अधिकारी और पुलिसकर्मी मौके पर पहुंच गए। परिजनों को समझाने की कोशिश शुरू हुई। देर रात मामले में समझौता हो गया।
चार माह से खराब था गेट का फाटक
बॉटलिंग प्लांट में कुल 135 स्टाफ तैनात हैं, जिसमें 20 सुरक्षा कर्मचारी हैं। सोमवार रात सुपरवाइजर की मौत से अन्य सुपरवाइजरों में काफी आक्रोश है। उनका कहना है कि फैक्ट्री का मुख्य द्वार लगभग चार माह से डैमेज था, जिसकी जानकारी जिम्मेदारों को थी, लेकिन ठीक नहीं कराया गया। इस लापरवाही की वजह से हादसा हुआ है।
दस जिलों में 40 हजार सिलिंडरों की होती है आपूर्ति
गीडा सेक्टर-15 स्थित इंडियन बॉटलिंग गैस प्लांट से पूर्वांचल के गोरखपुर, कुशीनगर, बलिया, देवरिया, महराजगंज, संतकबीरनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, गोंडा, मऊ समेत 10 जिलों में रसोई गैस की आपूर्ति की जाती है। फैक्ट्री में प्रतिदिन लगभग 40 हजार सिलिंडर का उत्पादन किया जाता है।
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हादसे के बाद प्लांट बंद कर दिया गया है। बुधवार से चलेगा। सप्लाई में किसी तरह दिक्कत नहीं है। मुख्य द्वार का फाटक कैसे गिरा, इसकी जांच मुंबई की टीम कर रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्लांट का संचालन निजी एजेंसी करती है। - सत्यव्रत सिंह, वरिष्ठ प्रबंधक, कारपोरेट कम्युनिकेशन इंडियन ऑयल कारपोरेशन