Gorakhpur: अल्का सरावगी ने साहित्य सृजन पर की खुलकर बात, बोलीं- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से साहित्य जगत को खतरा
अल्का सरावगी ने कहा कि कुलभूषण उनकी सबसे प्रिय पुस्तकों में एक है। कुलभूषण का विस्थापन उसके परिवार में ज्यादा है। वह काला है और देखने में भी बदसूरत है। हमारा भारतीय समाज हमेशा एक अलग केटेगरी सिस्टम तैयार करता रहता है। इसी के आधार पर हम उसे रख देते हैं।
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यह सही है कि आज के दौर में युवाओं का कहानी और उपन्यास से दूरी बढ़ गई है लेकिन, एक तबका ऐसा भी है जो लेखनी के असल अंदाजा को बहुत सराह भी रहा है। साहित्य जगत को सबसे ज्यादा नुकसान है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से है। इसमें आपकी सोच और दूरदर्शिता का अभाव होता है और नकल ज्यादा। कोई भी दस कहानियों में से कुछ हिस्सा निकालकर एक नई कहानी बना सकता है। मेरी दृष्टि से नए साहित्यकारों को इससे बचना चाहिए।
यह कहना है प्रसिद्ध हिंदी कथाकार और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित अल्का सरावगी का, जो शुक्रवार को गोरखपुर लिटरेरी फेस्ट में शामिल होने आई हैं। साहित्य सृजन पर उन्होंने खुलकर बातचीत की। कहा हर किताब में एक नई दुनिया होती है। आज की युवा पीढ़ी किताबों से दूर होते जा रही है।
नए लेखकों में प्रतिभा बहुत है और उनकी लेखनी को काफी पसंद किया जा रहा है। उनके लिखने का अपना एक अलग अंदाज है। वैसे भी हमारे समाज में उपन्यासों और कहानियों को ज्यादा महत्व देने की परंपरा नहीं है। ये समाज उपभोक्तावादी हो गया है। किसी भी चीज की कीमत तभी है जब उससे कोई फायदा हो।
अपनी किताब ‘गांधी और सरला देवी चौधरानी : बारह अध्याय’ के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि गांधी एक ऐसी शख्सियत हैं जिनके व्यक्तिव पर सैकड़ों किताबें लिखी गई हैं। सरला देवी अपने समय की एक प्रबुद्ध महिला थीं। जलियांवाला बाग कांड के छह महीने बाद गांधी पंजाब गए तो लाहौर में सरला देवी के घर पर ठहरे थे।
सरला देवी के मामा रविंद्र नाथ टैगोर और नाना देवेंद्र नाथ टैगोर थे। साहित्य और संगीत के परिवेश में रहने की वजह से उनके अंदर भी यह प्रतिभा थी। जो महिला अपने समय से इतनी आगे थी उसका इतिहास में कोई जिक्र नहीं है। ऐसी महिला के बारे में सभी को जानना चाहिए। भविष्य में आने वाले उपन्यास के बारे में उन्होंने कहा कि वे कोलकाता की मुस्लिम औरतों के बारे में काफी दिनों से लिखने के बारे में सोच रही हैं। तो शायद अगला उपन्यास इसी पर पढ़ने को मिले।
समय के साथ बदलता है साहित्य
साहित्य में हो रहे बदलाव पर उन्होंने कहा कि समय के साथ कई चीजें बदलती हैं। मेरे पहले उपन्यास ‘कलि कथा वाया बाईपास’ पर साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। इसका जो शिल्प और भाषा शैली थी वो पहले के उपन्यासों के अलग थी। यह समय का दबाव होता है, आप अगर पुराने समय की कहानी को बता रहे हैं तो उसे आज के समय के अनुसार लिखना होगा। जब आप उस लय को पकड़ लेते हैं तो उससे एक नई चीज निकल कर सामने आती है। नए साहित्य को पढ़ना भी एक साधना है। समय के साहित्य में भी बदलाव जरूरी है।
कहानियां और उनके लिखने के तरीके अनंत
कहानियों का बदलता ट्रेंड और उनके तरीकों पर उन्होंने कहा कि कहानी और उपन्यास लेखन के तरीके अनंत हैं। लोग भी इच्छानुसार कहानियों को लिखते हैं और यही उसमें खास बात भी होती है। इसमें उनके अंदर की बात निकलकर सामने आती है। नए लेखन से मनुष्यता को अपने आप से बातचीत करने का मौका मिलेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लेखनी को नुकसान पहुंच सकता है क्योंकि कोई भी दस कहानियों में से कुछ हिस्सा निकालकर एक नई कहानी बना सकता है जो साहित्य के लिए ठीक नहीं है।
अल्का सरावगी ने कहा कि कुलभूषण उनकी सबसे प्रिय पुस्तकों में एक है। कुलभूषण का विस्थापन उसके परिवार में ज्यादा है। वह काला है और देखने में भी बदसूरत है। हमारा भारतीय समाज हमेशा एक अलग केटेगरी सिस्टम तैयार करता रहता है। इसी के आधार पर हम उसे रख देते हैं। व्यक्ति का आंतरिक विस्थापन भी उस उपन्यास की खास बात है।
बिना प्रभावित होकर लिखें युवा
युवाओं की लेखनी के बारे में उन्होंने कहा कि आज काफी नए और अच्छे उपन्यास युवाओं द्वारा लिखे जा रहे हैं। इनकी मार्केट में मांग भी है। युवा लेखक एक चीज को हमेशा याद रखें कि वो अपनी लेखनी में अपने अंदाज को डालें। कभी भी किसी से प्रभावित होकर काम न करें क्योंकि इससे उनकी लेखनी से उनका अंदाज गायब हो जाएगा।