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महायोजना 2031: 350 से अधिक आपत्तिकर्ता बोले- साहब! सुप्रीम कोर्ट तक घोषित कर चुका है आबादी क्षेत्र

Thu, 01 Dec 2022 11:38 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 01 Dec 2022 11:38 AM IST
सार

सुबह 11 बजे से शुरू होकर दोपहर दो बजे के बाद तक चली सुनवाई में कुल 528 आपत्तिकर्ता आए, जिनमें 350 से अधिक आपत्तिकर्ता खुले क्षेत्र के विरोध में अपनी दलीलें पेश करने पहुंचे थे। ये सभी महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर दो के रहने वाले हैं।

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Hearing room full in protest against open area
महायोजना 2031 - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की नई महायोजना के प्रारूप पर गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में चल रही सुनवाई के दौरान बुधवार को पूरा सभागार फुल हो गया। सुबह 11 बजे से शुरू होकर दोपहर दो बजे के बाद तक चली सुनवाई में कुल 528 आपत्तिकर्ता आए, जिनमें 350 से अधिक आपत्तिकर्ता खुले क्षेत्र के विरोध में अपनी दलीलें पेश करने पहुंचे थे। ये सभी महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर दो के रहने वाले हैं। इनके अलावा कड़जहां, बशारतपुर, जंगल बहादुर अली क्षेत्र के आपत्तिकर्ताओं ने भी अपना पक्ष रखा।  

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जीडीए की नई महायोजना के प्रारूप में एम्स से सटे महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर दो को खुला क्षेत्र घोषित कर दिया गया है। कामेश्वर सिंह, भरत सिंह, नीलम उपाध्याय, समीर सिंह, कालिंदी द्विवेदी आदि ने जीडीए उपाध्यक्ष की अध्यक्षता वाली सुनवाई कमेटी के सामने अपना पक्ष रखा। कहा कि वर्ष 1954 से महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर दो प्रदेश सरकार की अधिसूचना के अनुसार शहरी क्षेत्र है।
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पूर्व में शासन-प्रशासन ने इस क्षेत्र की जमीन को सीलिंग का बताकर अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की थी। इस पर क्रमश: हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के दावे को खारिज करते हुए कहा था कि मौके पर बड़ी संख्या में आवास बन गए हैं और खाली जमीन नहीं रह गई है। ऐसे में सीलिंग की कार्यवाही गलत है। उन्होंने यह भी दलील पेश की कि सांसद रहते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व अन्य विधायक अपनी निधि से स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए रोड आदि के निर्माण के लिए फंड स्वीकृत कर चुके हैं।
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इसी तरह आपत्तिकर्ताओं ने यह भी कहा कि वर्तमान में भी कॉलोनी के लोगों की सुविधा के लिए अमृत जल/सीवर परियोजना के तहत सीवर लाइन व रोड निर्माण का काम चल रहा है। मौके पर निर्मित सभी मकान रजिस्ट्रीशुदा जमीन पर बने हैं। सभी से नगर निगम कर लेता है। मकानों में विद्युत कनेक्शन हैं। आवासीय क्षेत्र की सीमा में काफी दूर तक न तो कोई जंगल है न ही पोखरा, तालाब या डूब क्षेत्र। ऐसे में हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी कर महायोजना 2031 के प्रारूप में इस क्षेत्र को खुला क्षेत्र घोषित करने के प्रस्ताव को निरस्त कर इसे आवासीय ही रहने दिया जाए।

इसी तरह कड़जहां, बशारतपुर और जंगल बहादुर अली के आपत्तिकर्ताओं ने विनियमितीकरण एवं खुला क्षेत्र के विरोध में अपना पक्ष रखा। सुनवाई कमेटी ने सभी को आश्वस्त किया कि सभी पहलुओं पर विचार का आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा।

सुनवाई के लिए आज 100 लोगों को बुलाया गया
जीडीए से मिली जानकारी के मुताबिक, सुनवाई के चौथे दिन बुधवार को आपत्ति संख्या 301 से 828 तक के आपत्तिकर्ताओं को सुनवाई के लिए बुलाया गया था। बृहस्पतिवार यानी एक दिसंबर को आपत्ति संख्या 829 से 928 तक के आपत्तिकर्ताओं को सुनवाई के लिए आमंत्रित किया गया है।
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