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इस इंजेक्शन की कालाबाजारी से परेशान हुआ स्वास्थ्य विभाग, कोरोना के लिए है बहुत कारगर
Wed, 08 Jul 2020 09:33 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 08 Jul 2020 09:33 PM IST
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रेमडेसिवीर दवा। (फाइल फोटो)
- फोटो : social media
कोविड-19 संक्रमण को रोकने में कारगार मानी जाने वाली इंजेक्शन रेमडेसिवीर की कालाबाजारी से विभाग भी परेशान है। 5400 रुपये खुदरा मूल्य वालेरेमडेसिवीर इंजेक्शन की कालाबाजारी 15 हजार से लेकर 60 हजार के बीच की जा रही है।
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यही वजह है कि इंजेक्शन की कालाबाजारी को रोकने के लिए औषधि अनुज्ञापन एवं नियंत्रण अधिकारी ने पत्र लिखा है। इसमें सख्त निर्देश दिए गए हैं अगर कोई कालाबाजारी करते हुए पकड़ा गया तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करते हुए कड़ी कार्रवाई की जाए।
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कोविड-19 वैक्सीन बनाने को लेकर दुनिया भर के देशों में शोध चल रहा है। अलग-अलग देशों में अलग-अलग दवाएं कोरोना मरीजों पर ट्रायल भी की जा रही है। लेकिन अब तक कोई भी देश ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचा है। इस बीच हेट्रो हेल्थ केयर लिमिटेड ने रेमडेसिवीर इंजेक्शन बनाया।
इसका उपयोग सबसे पहले अमेरिका ने कोरोना मरीजों पर किए। इसके नतीजे बेहतर पाए गए। इसके बाद से भारतीय बाजार में इसे उतारा गया। आईसीएमआर ने इस इंजेक्शन को अनुमति भी दी है। दिल्ली और नोएडा में इस दवा की कालाबाजारी की बात भी सामने आई। क्योंकि दिल्ली और गौतमबुद्ध नगर में सबसे ज्यादा कोरोना के मरीज मिल रहे हैं।
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गोरखपुर में नहीं मिल रहा इंजेक्शन
औषधि विभाग की ओर से यह जानकारी दी गई है कंपनी ने इसका खुदरा मूल्य 5400 रुपये तय कर रखे हैं, लेकिन बाजार में इसे 15 हजार से लेकर 60 हजार के बीच बेचा जा रहा हैं। इसकी वजह से यह इंजेक्शन लोगों को मिल नहीं पा रहा है।
रेमडेसिवीर इंजेक्शन गोरखपुर जिले को अब तक नहीं मिल पा रहा है। कई दवा व्यापारियों ने इसके ऑर्डर भी किए हैं, लेकिन अब तक व्यापारियों को दवा नहीं मिल पाई है। इससे पूर्व भी हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन दवा की कालाबाजारी को रोकने के लिए शासन ने पत्राचार किया था।
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कोरोना मरीजों को दी जाती है यह इंजेक्शन
इस इंजेक्शन का उपयोग कोरोना मरीजों पर किया जाता है। जिन मरीजों को सांस लेने में ज्यादा तकलीफ होती है, उन्हें यह इंजेक्शन दिया जाता है। दिल्ली और नोएडा में निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों को यह इंजेक्शन दी गई है। इसके नतीजे बेहतर रहे हैं।
सहायक औषधि आयुक्त राजेश कुमार ने कहा कि शासन की ओर से रेमडेसिवीर इंजेक्शन की कालाबाजारी पर रोक लगाने का पत्र मिला है। गोरखपुर जिले में अब तक इंजेक्शन नहीं आई है। जैसे ही इंजेक्शन आता है, उस पर विभाग की नजर रहेगी। एक-एक इंजेक्शन का हिसाब दवा व्यापारियों से लिया जाएगा।
रेमडेसिवीर इंजेक्शन गोरखपुर जिले को अब तक नहीं मिल पा रहा है। कई दवा व्यापारियों ने इसके ऑर्डर भी किए हैं, लेकिन अब तक व्यापारियों को दवा नहीं मिल पाई है। इससे पूर्व भी हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन दवा की कालाबाजारी को रोकने के लिए शासन ने पत्राचार किया था।
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कोरोना मरीजों को दी जाती है यह इंजेक्शन
इस इंजेक्शन का उपयोग कोरोना मरीजों पर किया जाता है। जिन मरीजों को सांस लेने में ज्यादा तकलीफ होती है, उन्हें यह इंजेक्शन दिया जाता है। दिल्ली और नोएडा में निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों को यह इंजेक्शन दी गई है। इसके नतीजे बेहतर रहे हैं।
सहायक औषधि आयुक्त राजेश कुमार ने कहा कि शासन की ओर से रेमडेसिवीर इंजेक्शन की कालाबाजारी पर रोक लगाने का पत्र मिला है। गोरखपुर जिले में अब तक इंजेक्शन नहीं आई है। जैसे ही इंजेक्शन आता है, उस पर विभाग की नजर रहेगी। एक-एक इंजेक्शन का हिसाब दवा व्यापारियों से लिया जाएगा।