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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   DDU Chancellor said our students will not find jobs will give employment to others

डीडीयू के कुलपति ने कहा- 'थोड़ा इंतजार करिए, हमारे विद्यार्थी नौकरी ढूंढेंगे नहीं, दूसरों को रोजगार देंगे'

Fri, 18 Sep 2020 12:49 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो राजन राय, गोरखपुर।
राजन राय, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Fri, 18 Sep 2020 12:49 PM IST
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DDU Chancellor said our students will not find jobs will give employment to others
भावी योजनाओं पर अमर उजाला संवाददाता से बातचीत करते डीडीयू के कुलपति प्रो. राजेश सिंह। - फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर विश्वविद्यालय को हम ऐसा बनाएंगे कि यहां पढ़ने वाले विद्यार्थी डिग्री लेकर नौकरी तलाशने नहीं निकलेंगे, बल्कि अपनी विशिष्ट शिक्षा से व्यवसाय और उद्योग लगाएंगे। दूसरों को नौकरी देंगे। इसके लिए विवि 25 रोजगार परक पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है। अब यहां उद्योगों के लिए शोध किया जाएगा, इससे आय के स्रोत और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। ऐसी तमाम योजनाएं हैं जिनसे विद्यार्थी आत्मनिर्भर बनेंगे। यह कहना है, दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के नवागत कुलपति प्रो. राजेश सिंह का। कुलपति ने अपनी भावी योजनाओं पर अमर उजाला संवाददाता राजन राय से लंबी बातचीत की।
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आप भी पढ़ें क्या कह रहे हैं, कुलपति प्रो. राजेश सिंह...

सवाल : नई शिक्षा नीति कैसी है, इसे विश्वविद्यालय में प्रभावी ढंग से कैसे लागू करेंगे?
जवाब : नई शिक्षा नीति का ड्राफ्ट पढ़ा है। कुछ टारगेट दिए गए हैं। राज्य विश्वविद्यालयों में पुराने ढर्रे की ही शिक्षा प्रणाली है। गुणवत्तापरक और रोजगार परक शिक्षा आज की जरूरत है। यकीनन, इसके लागू होने से शैक्षणिक संस्थाएं सिर्फ डिग्री बांटने का काम नहीं करेंगी, बल्कि विद्यार्थियों को नौकरी पाने लायक बनाएंगी।
सवाल : विद्यार्थियों की संख्या घटना बड़ी चुनौती है, इसकी वजह क्या मानते हैं, इसे कैसे रोकेंगे?
जवाब : इंटरमीडिएट के बाद उच्च शिक्षा में 50 प्रतिशत बच्चे जाने चाहिए। भारत वर्ष में यह आंकड़ा 26 फीसदी है, जबकि यूपी में 25 फीसदी ही है। इसके लिए डिस्टेंस लर्निंग प्लेटफॉर्म बनाएंगे, ताकि दूर रहकर भी विद्यार्थी पढ़ सकें।
सवाल : ऑनलाइन पढ़ाई कितनी कारगर है?
जवाब : कोविड-19 में देखा गया है कि ऑफलाइन से ऑनलाइन पढ़ाई कहीं ज्यादा कारगर है। वर्चुअल क्लास से गुणवत्ता बढ़ेगी, पारदर्शिता आएगी। इसके लिए जो भी जरूरी होगा कराएंगे।
सवाल : पढ़ाई का ट्रेंड बदल गया है, लेकिन विश्वविद्यालय व कॉलेजों में पढ़ाई पुराने ढर्रे पर है। यह सामंजस्य कैसे बनाएंगे?
जवाब : बिलकुल सही, हमारी शिक्षा प्रणाली समय के हिसाब से नहीं बदली है। विश्वविद्यालय में हम ऐसे कोर्स लाएंगे, जिनकी बाजार में मांग है। अभी 25 रोजगार परक कोर्स शुरू करने जा रहे हैं। इसे अकादमिक कौंसिल से पास कराकर राज्य सरकार को भेजेंगे। पैकेजिंग, मेकिंग, फूड प्रोसेसिंग, आनुवांशिकी केंद्र, बिजनेस सेंटर, एक्सीलेंस एंड पॉलिटिकल लीडरशिप, होटल मैनेजमेंट आदि। यकीनन, इससे विश्वविद्यालय का स्तर ऊंचा होगा और विद्यार्थियों को नौकरी लायक बना सकेंगे।
सवाल : साइंस म्यूजियम की गतिविधियां बंद हैं, इसे लेकर क्या योजना है?
जवाब : साइंस म्यूजियम को पूर्वांचल डेवलपमेंट बोर्ड को सौंपने जा रहे हैं। मेरा मानना है कि इकोनॉमी डेवलपमेंट का संबंध सीधा विद्यार्थी से है। आने वाले दिनों में शिक्षा ही इकोनॉमी का हथियार है। इसके अलावा डेवलपमेंट सेंटर बनाएंगे। जहां वर्कशाप कराएंगे।
सवाल : विश्वविद्यालय में रिसर्च को बढ़ावा देने की क्या योजना है?
जवाब : साइंस म्यूजियम में ही तीसरी मंजिल पर एजुकेशन इंडस्ट्री सेंटर खोला जाएगा। यहां रिसर्च पर काम होगा। शुल्क लेकर इंडस्ट्री और कंपनियों के प्रोडक्ट को लेकर रिसर्च कराएंगे। जैसे मक्के से बायोफ्यूल कैसे बने आदि। इससे आय का स्रोत बढ़ेगा। सभी शिक्षकों से कहा गया है कि वे कम से कम एक रिसर्च प्रोजेक्ट प्रस्तुत करें।
सवाल : शिक्षा की गुणवत्ता बड़ी चुनौती है, इसे बेहतर कैसे बनाएंगे?
जवाब : शिक्षकों की कमी है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंसी विद ग्लोबल एक्सपोर्ट स्थापित करने जा रहे हैं। इसके तहत दूसरे देशों के शिक्षकों की सूची तैयार की जाएगी। शिक्षक कौन हैं, कितना शुल्क लेंगे। इसके बाद विषय की मांग के अनुसार ऐसे शिक्षकों को बुलाएंगे। अगर कॉलेज मांग करेंगे तो उनके यहां भी भेजेंगे। इसके अलावा स्मार्ट क्लास को प्रभावी बनाएंगे। इससे शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी।
सवाल : संबद्ध कॉलेजों में शिक्षक सिर्फ कागजों में ही हैं, कई बार शिकायतें भी हुई हैं, इसे कैसे रोकेंगे?
जवाब : विद्यार्थियों का प्रवेश ऑनलाइन मोड पर लाने जा रहे हैं। इसके बाद शिक्षकों की सूची भी मांगी जाएगी। कोई हेरफेर नहीं कर पाएगा। एक वर्ष में इसे ठीक कर दूंगा।
सवाल : यूजीसी की गाइड लाइन है कि सभी कॉलेजों को नैक की ग्रेडिंग लेनी है, यहां कैसे प्रभावी बनाएंगे ?
जवाब : सबसे पहले हम विश्वविद्यालय में नैक मूल्यांकन कराएंगे। हमारी सारी योजनाएं उसी को लेकर है। इससे अच्छी ग्रेडिंग हासिल होगी। सभी कॉलेजों को भी नैक का मूल्यांकन कराना पड़ेगा वरना हम कार्रवाई करेंगे।
सवाल : विश्वविद्यालय से संबद्ध सेंट एंड्रयूज कॉलेज है, जहां नियम विरुद्ध शिक्षक भर्ती का मामला सामने आया है। इस मामले में क्या कार्रवाई हो रही है?
जवाब : यह मामला मेरे संज्ञान में आया है। भर्ती रोकने के लिए विश्वविद्यालय की ओर से कड़ा नोटिस कॉलेज को भेजा जाएगा। अगर इसके बाद भी नहीं माने तो संबद्धता रद्द करने का अधिकार भी हमारे पास है।
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100 खिलाड़ियों की प्रतिभा निखारेगा विश्वविद्यालय

गोरखपुर विश्वविद्यालय खिलाड़ियों के टैलेंट को भी निखारेगा। परिसर में खेल का माहौल बनाने की कोशिश होगी। खेल को बढ़ावा देने की योजना को साझा करते हुए कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने कहा कि हम एक स्पेशल प्रोजेक्ट 'फ्री फूड, फ्री एडमिशन एंड फ्री एजूकेशन' लेकर आ रहे हैं। 100 करोड़ के इस प्रोजेक्ट का आधा बजट केंद्र सरकार से लिया जाएगा। कक्षा 10वीं व 12वीं के खिलाड़ियों को चिन्हित करेंगे।

कुलपति ने कहा कि 100 खिलाड़ियों को विश्वविद्यालय में निशुल्क शिक्षा दी जाएगी और उनकी डाइट का भी इंतजाम होगा। इसके लिए एक स्पोर्ट्स डायरेक्टर रखेंगे। कुशल प्रशिक्षकों की मदद से खिलाड़ियों को तीन साल में राष्ट्रीय प्रतियोगिता खेलने लायक तैयार करेंगे। खिलाड़ियों की नौकरी के लिए भी विश्वविद्यालय मददगार बनेगा। कुलपति ने कहा कि इसकी योजना तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी इस प्रोजेक्ट के लिए मदद मांगी जाएगी।
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