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सख्ती: गोरखपुर में बगैर संसाधन वाले नर्सिंग होम अब होंगे बंद, जानिए कब से लागू होगा ये खास नियम
Sat, 27 Nov 2021 02:39 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 27 Nov 2021 02:39 PM IST
सार
प्रशासन ने क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट को सख्ती से लागू करवाने की तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे में 30 बेड वाले नर्सिंग होम पर शिकंजा कसा जाएगा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : iStock
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विस्तार
क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट लागू होने के बाद शहर के 80 प्रतिशत नर्सिंग होमों को नए सिरे से खुद को एक्ट के मुताबिक अपडेट करना पड़ेगा, वरना इन पर ताला लग सकता है। प्रशासन की एक्ट लागू करवाने की सक्रियता की भनक लगते ही, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन विरोध में (आईएमए) आगे आया है।
दरअसल, एक्ट लागू होने के बाद प्राइवेट अस्पतालों में मूलभूत संसाधन, डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती राष्ट्रीय परिषद द्वारा तय मानकों के अनुसार होगी। प्रशासन ने एक्ट को सख्ती से लागू करवाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस पर आईएमए का कहना है कि इस एक्ट में छोटे अस्पतालों को राहत दें, नहीं तो इसके विरोध में आंदोलन किया जाएगा।
नियम पहली जनवरी से होंगे लागू
जानकारी के मुताबिक 30 से अधिक बेड वाले नर्सिंग होम, निजी अस्पताल और डायग्नोस्टिक सेंटरों को नए एक्ट के तहत मानक के अनुसार बिल्डिंग बनानी होगी। साथ ही अग्निशमन विभाग से एनओसी लेने की भी अनिवार्यता होगी। वहीं सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) भी लगाना होगा। बॉयो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था भी करनी होगी। आलम ये है कि शहर के स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े 80 प्रतिशत इस्टैब्लिशमेंट इन मानकों का पालन नहीं करते हैं। अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद के निर्देश स्थानीय प्रशासन को प्राप्त हो गए हैं। यह नियम एक जनवरी 2022 से लागू हो जाएंगे। इस एक्ट को लागू करने का मुख्य उद्देश्य मरीजों को बेहतर और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
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दरअसल, एक्ट लागू होने के बाद प्राइवेट अस्पतालों में मूलभूत संसाधन, डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती राष्ट्रीय परिषद द्वारा तय मानकों के अनुसार होगी। प्रशासन ने एक्ट को सख्ती से लागू करवाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस पर आईएमए का कहना है कि इस एक्ट में छोटे अस्पतालों को राहत दें, नहीं तो इसके विरोध में आंदोलन किया जाएगा।
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नियम पहली जनवरी से होंगे लागू
जानकारी के मुताबिक 30 से अधिक बेड वाले नर्सिंग होम, निजी अस्पताल और डायग्नोस्टिक सेंटरों को नए एक्ट के तहत मानक के अनुसार बिल्डिंग बनानी होगी। साथ ही अग्निशमन विभाग से एनओसी लेने की भी अनिवार्यता होगी। वहीं सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) भी लगाना होगा। बॉयो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था भी करनी होगी। आलम ये है कि शहर के स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े 80 प्रतिशत इस्टैब्लिशमेंट इन मानकों का पालन नहीं करते हैं। अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद के निर्देश स्थानीय प्रशासन को प्राप्त हो गए हैं। यह नियम एक जनवरी 2022 से लागू हो जाएंगे। इस एक्ट को लागू करने का मुख्य उद्देश्य मरीजों को बेहतर और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
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एक जनवरी से लागू होगी व्यवस्था
सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय, आईएमए उपाध्यक्ष डॉ अमित, आईएमए अध्यक्ष डॉ शिवशंकर
- फोटो : अमर उजाला
सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने बताया कि नई व्यवस्था एक जनवरी, 2022 से पूरी तरह से लागू हो जाएगी। जो नर्सिंग होम पुराने नियमों से पंजीकृत हैं, वह 31 मार्च 2022 तक ही मान्य होंगे। वहीं कम बेड वाले नर्सिंग होम और डायग्नोस्टिक सेंटर का निरीक्षण करने के बाद रजिस्ट्रेशन की अनुमति दी जाएगी।
आईएमए अध्यक्ष डॉ शिवशंकर ने बताया कि सरकार का यह नियम ठीक नहीं है। नर्सिंग होम से लेकर निजी अस्पतालों को हर साल रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है। इस एक्ट के लागू होने के बाद एकल क्लीनिक बंद हो जाएंगे। इस नियम से 80 प्रतिशत अस्पताल बंद हो जाएंगे। इससे मरीजों का ज्यादा नुकसान होगा। छोटे और मंझले हॉस्पिटल को राहत दें।
आईएमए उपाध्यक्ष डॉ अमित मिश्रा ने बताया कि इस एक्ट के लागू होने के बाद छोटे नर्सिंग होमों को परेशानी होगी। अगर छोटे नर्सिंग होम उन मानकों को पूरा करेंगे तो उनका व्यवभार बढ़ेगा। इसका भार मरीजों पर पड़ेगा। इलाज कराने वाले मरीजों को अधिक रुपये खर्च करने पड़ेंगे। इस एक्ट से छोटे नर्सिंग होमों को मुक्त रखना चाहिए। बड़े कॉरपोरेट हॉस्पिटलों पर इसे लागू करें।
नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ खालिद अब्बासी ने बताया कि शहर के नर्सिंग होम क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट का पालन करते हैं। सभी नर्सिंग होमों को इसकी जानकारी पूर्व में दी जा चुकी है। ऐसे में इस एक्ट से डरने की जरूरत नहीं है। इस एक्ट के लागू होने के बाद नर्सिंग होम में मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
जिले में नर्सिंग होम की स्थिति
आईएमए अध्यक्ष डॉ शिवशंकर ने बताया कि सरकार का यह नियम ठीक नहीं है। नर्सिंग होम से लेकर निजी अस्पतालों को हर साल रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है। इस एक्ट के लागू होने के बाद एकल क्लीनिक बंद हो जाएंगे। इस नियम से 80 प्रतिशत अस्पताल बंद हो जाएंगे। इससे मरीजों का ज्यादा नुकसान होगा। छोटे और मंझले हॉस्पिटल को राहत दें।
आईएमए उपाध्यक्ष डॉ अमित मिश्रा ने बताया कि इस एक्ट के लागू होने के बाद छोटे नर्सिंग होमों को परेशानी होगी। अगर छोटे नर्सिंग होम उन मानकों को पूरा करेंगे तो उनका व्यवभार बढ़ेगा। इसका भार मरीजों पर पड़ेगा। इलाज कराने वाले मरीजों को अधिक रुपये खर्च करने पड़ेंगे। इस एक्ट से छोटे नर्सिंग होमों को मुक्त रखना चाहिए। बड़े कॉरपोरेट हॉस्पिटलों पर इसे लागू करें।
नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ खालिद अब्बासी ने बताया कि शहर के नर्सिंग होम क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट का पालन करते हैं। सभी नर्सिंग होमों को इसकी जानकारी पूर्व में दी जा चुकी है। ऐसे में इस एक्ट से डरने की जरूरत नहीं है। इस एक्ट के लागू होने के बाद नर्सिंग होम में मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
जिले में नर्सिंग होम की स्थिति
- 30 बेड वाले नर्सिंग होम 75-80 के बीच
- 50 बेड वाले नर्सिंग होम 40-45 के बीच
- 100 बेड वाले नर्सिंग होम 15-20 के बीच
- 200 बेड वाले नर्सिंग होम पांच
- 300 बेड वाले नर्सिंग होम एक