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Gorakhpur News: सहालग में खपाने की थी योजना, चार क्विंटल पनीर बरामद कर नष्ट कराया
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पिपराइच के बरईपार गांव में चल रहा था कारखाना, खाद्य सुरक्षा विभाग की अंतरजनपदीय टीम ने मारा छापा
जिस ड्रम में रखा था पनीर, उसमें मरी थीं मक्खियां, पानी से आ रहा था दुर्गंध
टीम ने अवैध कारखाने को भी बंद कराया
गोरखपुर। पिपराइच क्षेत्र के बरईपार गांव में सहालग में खपाने के लिए बनाए गए चार क्विंटल पनीर को खाद्य सुरक्षा विभाग की अंतरजनपदीय टीम ने शुक्रवार को बरामद कर नष्ट कराया। इसके बाद कारखाना को बंद करा दिया। मौके पर मिले 103 लीटर रिफाइंड पामोलिन तेल और 50 किलो मिल्क पाउडर को सील कर कारखाना मालिक के सुपुर्दगी में दिया गया। यहां से पनीर व रिफाइंड तेल का नमूना भी लिया गया। जिस कारखाना में मिलावटी पनीर बनाया जा रहा था, उसका लाइसेंस भी काफी पहले समाप्त हो चुका था।
बरईपार में अनमोल पनीर केंद्र नाम से एक कारखाना खाद्य सुरक्षा विभाग में पंजीकृत था, लेकिन इसका लाइसेंस समाप्त हो चुका था। इसके बाद भी वहां पनीर बनाने का काम होता था। त्योहार और सहालग में आसपास के इलाके में यहां से तैयार पनीर भेजी जाती थी। सहालग में भी बड़े पैमाने पर यहां से तैयार पनीर भेज रहे थे। खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचना मिली कि लाइसेंस अवधि खत्म होने के बाद अब भी उसी मकान में पनीर निर्माण कार्य चल रहा है।
आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, विभाग उत्तर प्रदेश के आदेश पर सहायक आयुक्त गोरखपुर द्वारा गठित अंतर जनपदीय टीम ने इस कारखाना पर शुक्रवार को छापा मारा। इस दौरान वहां लगभग चार क्विंटल पनीर पाया गया। मौके पर 15 किलोग्राम वाले 07 टिन रिफाइंड पामोलिन ऑयल तथा दो बोरी में 50 किग्रा स्किम्ड मिल्क पाउडर मिला। वहीं रिफाइंड ऑयल के पांच खाली टिन भी रखा पाया गया। पनीर और रिफाइंड में से जांच के लिए नमूना लिया गया। रिफाइंड पामोलिन तेल को सीज कर केंद्र संचालक मोहम्मद खालिद की अभिरक्षा में दे दिया गया। भंडारित पनीर कटी हुई टंकियों में रखा था, जिसके पानी में मक्खियां मरी पड़ी थीं। पानी भी गंदा और बदबूदार था। प्रथम दृष्टया ही यह पनीर खाने योग्य नहीं होने के कारण पास ही में पानी भरे गड्ढे में दबाकर नष्ट करा दिया गया।
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साल भर में पनीर के 50 से अधिक नमूने फेल
गोरखपुर। धंधेबाजों ने पनीर को खाने लायक नहीं छोड़ा है। साल भर में पनीर के 50 से अधिक नमूनों में मिलावट की पुष्टि हो चुकी है। दो महीने पहले ही शहर की विभिन्न दुकानों से लिए गए पनीर के आठ नमूनों में मिलावट की पुष्टि हुई थी। इन नमूनों में फैट की मात्रा ही नहीं मिली है। विशेषज्ञ बताते हैं कि ऐसा तभी होता है, जब पाउडर से बने पनीर में रिफाइंड तेल और डिटर्जेंट मिलाया जाता है। ऐसा पनीर लिवर और आंत को नुकसान पहुंचाता है।
शहर में हर दिन करीब नौ लाख क्विंटल दूध की खपत होती है, जबकि केवल ढाई लाख लीटर दूध का उत्पादन ही होता है। इसके अलावा करीब ढाई लाख लीटर दूध विभिन्न कंपनियों का पैकेटबंद आता है। शेष करीब चार लाख क्विंटल दूध की डिमांड मिलावट से पूरी होती है। दूध के अलावा पनीर की भी खूब खपत होती है। बाजार के सूत्रों का कहना है कि डिमांड पूरी करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में पनीर शहर में आता है। यह पनीर मिल्क पाउडर, रिफाइंड और डिटर्जेंड पाउडर को मिलाकर बनाया जाता है। जांच में इस प्रकार के पनीर की रिपोर्ट में फैट मिसिंग होती है। विभाग केवल चेतावनी या न्यूनतम जुर्माना कर छोड़ देता है। सहायक आयुक्त खाद्य डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि सबसे खराब हालत पनीर की है। एक साल में 50 से अधिक नमूने पनीर के ही फेल हुए हैं।
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जिस ड्रम में रखा था पनीर, उसमें मरी थीं मक्खियां, पानी से आ रहा था दुर्गंध
टीम ने अवैध कारखाने को भी बंद कराया
गोरखपुर। पिपराइच क्षेत्र के बरईपार गांव में सहालग में खपाने के लिए बनाए गए चार क्विंटल पनीर को खाद्य सुरक्षा विभाग की अंतरजनपदीय टीम ने शुक्रवार को बरामद कर नष्ट कराया। इसके बाद कारखाना को बंद करा दिया। मौके पर मिले 103 लीटर रिफाइंड पामोलिन तेल और 50 किलो मिल्क पाउडर को सील कर कारखाना मालिक के सुपुर्दगी में दिया गया। यहां से पनीर व रिफाइंड तेल का नमूना भी लिया गया। जिस कारखाना में मिलावटी पनीर बनाया जा रहा था, उसका लाइसेंस भी काफी पहले समाप्त हो चुका था।
बरईपार में अनमोल पनीर केंद्र नाम से एक कारखाना खाद्य सुरक्षा विभाग में पंजीकृत था, लेकिन इसका लाइसेंस समाप्त हो चुका था। इसके बाद भी वहां पनीर बनाने का काम होता था। त्योहार और सहालग में आसपास के इलाके में यहां से तैयार पनीर भेजी जाती थी। सहालग में भी बड़े पैमाने पर यहां से तैयार पनीर भेज रहे थे। खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचना मिली कि लाइसेंस अवधि खत्म होने के बाद अब भी उसी मकान में पनीर निर्माण कार्य चल रहा है।
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आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, विभाग उत्तर प्रदेश के आदेश पर सहायक आयुक्त गोरखपुर द्वारा गठित अंतर जनपदीय टीम ने इस कारखाना पर शुक्रवार को छापा मारा। इस दौरान वहां लगभग चार क्विंटल पनीर पाया गया। मौके पर 15 किलोग्राम वाले 07 टिन रिफाइंड पामोलिन ऑयल तथा दो बोरी में 50 किग्रा स्किम्ड मिल्क पाउडर मिला। वहीं रिफाइंड ऑयल के पांच खाली टिन भी रखा पाया गया। पनीर और रिफाइंड में से जांच के लिए नमूना लिया गया। रिफाइंड पामोलिन तेल को सीज कर केंद्र संचालक मोहम्मद खालिद की अभिरक्षा में दे दिया गया। भंडारित पनीर कटी हुई टंकियों में रखा था, जिसके पानी में मक्खियां मरी पड़ी थीं। पानी भी गंदा और बदबूदार था। प्रथम दृष्टया ही यह पनीर खाने योग्य नहीं होने के कारण पास ही में पानी भरे गड्ढे में दबाकर नष्ट करा दिया गया।
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साल भर में पनीर के 50 से अधिक नमूने फेल
गोरखपुर। धंधेबाजों ने पनीर को खाने लायक नहीं छोड़ा है। साल भर में पनीर के 50 से अधिक नमूनों में मिलावट की पुष्टि हो चुकी है। दो महीने पहले ही शहर की विभिन्न दुकानों से लिए गए पनीर के आठ नमूनों में मिलावट की पुष्टि हुई थी। इन नमूनों में फैट की मात्रा ही नहीं मिली है। विशेषज्ञ बताते हैं कि ऐसा तभी होता है, जब पाउडर से बने पनीर में रिफाइंड तेल और डिटर्जेंट मिलाया जाता है। ऐसा पनीर लिवर और आंत को नुकसान पहुंचाता है।
शहर में हर दिन करीब नौ लाख क्विंटल दूध की खपत होती है, जबकि केवल ढाई लाख लीटर दूध का उत्पादन ही होता है। इसके अलावा करीब ढाई लाख लीटर दूध विभिन्न कंपनियों का पैकेटबंद आता है। शेष करीब चार लाख क्विंटल दूध की डिमांड मिलावट से पूरी होती है। दूध के अलावा पनीर की भी खूब खपत होती है। बाजार के सूत्रों का कहना है कि डिमांड पूरी करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में पनीर शहर में आता है। यह पनीर मिल्क पाउडर, रिफाइंड और डिटर्जेंड पाउडर को मिलाकर बनाया जाता है। जांच में इस प्रकार के पनीर की रिपोर्ट में फैट मिसिंग होती है। विभाग केवल चेतावनी या न्यूनतम जुर्माना कर छोड़ देता है। सहायक आयुक्त खाद्य डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि सबसे खराब हालत पनीर की है। एक साल में 50 से अधिक नमूने पनीर के ही फेल हुए हैं।