हड़ताल: गोरखपुर बीआरडी में स्थिति बिगड़ी, एम्स में 50 ऑपरेशन टले- 4 हजार मरीज बिना इलाज के वापस लौटे
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों ने सभी विभागों की ओपीडी को जबरन बंद करा दिया। सुबह सात बजे से नौ बजे तक जिन मरीजों ने पर्ची कटा लिया, उन्हीं का इलाज हो सका। प्राचार्य के मना करने के बाद भी जूनियर डॉक्टर नहीं माने। करीब 2500 से अधिक मरीजों को बिना इलाज के लौटना पड़ा। एम्स की ओपीडी बंद होने से लगभग 1500 मरीजों को बिना इलाज के वापस लौटना पड़ा।
विस्तार
एम्स में शुक्रवार को एमबीबीएस छात्र, सीनियर रेजिडेंट, इंटर्न डॉक्टरों ने ओपीडी के बाहर सुबह नौ बजे से प्रदर्शन शुरू कर दिया। इससे ओपीडी में जाने का रास्ता बंद हो गया। मरीज ओपीडी में जाने के लिए परेशान होने लगे। इस दौरान मरीज, गार्डों से ओपीडी में जाने का रास्ता भी पूछते नजर आए।
इसके साथ हो ओपीडी नहीं चलने के कारण करीबन 1500 से अधिक मरीजों को बगैर इलाज कराए घर लौटना पड़ा। इमरजेंसी में भी इलाज नहीं मिल पाने के कारण कई मरीजों को प्राइवेट अस्पताल की तरफ जाना पड़ा।
एमबीबीएस छात्र, सीनियर रेजिडेंट, इंटर्न डॉक्टरों ने शाम पांच बजे एम्स से मोहद्दीपुर तक कैंडल मार्च निकालकर विरोध जताया। कैंडल मार्च में एम्स के विभिन्न विभागों के डॉक्टर शामिल हुए। डॉक्टरों ने घटना की निंदा करते हुए इंसाफ की मांग की। इंटर्नशिप कर रहे डॉ. शशांक शेखर ने कहा कि हम सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट बनाने की मांग कर रहे हैं।
बीआरडी में 2500 से अधिक मरीज बिना इलाज लौटे
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों ने सभी विभागों की ओपीडी को जबरन बंद करा दिया। सुबह सात बजे से नौ बजे तक जिन मरीजों ने पर्ची कटा लिया, उन्हीं का इलाज हो सका। प्राचार्य के मना करने के बाद भी जूनियर डॉक्टर नहीं माने। करीब 2500 से अधिक मरीजों को बिना इलाज के लौटना पड़ा।
प्रदर्शन की शुरुआत जूनियर डॉक्टरों ने सुबह नौ बजे नेहरू चिकित्सालय का पर्ची काउंटर पर ताला जड़कर किया। इसके बाद हालात की गंभीरता को देखते हुए प्राचार्य राजकुमार जायसवाल ने डॉक्टरों को ऐसा करने के लिए मना किया। इसके बाद भी डाॅक्टर हड़ताल वापस लेने के लिए तैयार नहीं हुए। जूनियर डॉक्टर कैंपस में आने वाले मरीजों के साथ विभागों में जाकर भी उन्हें वापस भेजने लगे।
डॉक्टरों ने सुपर स्पेशलिटी ब्लाॅक और बाल सेवा संस्थान को बंद करवा दिया। सुबह दस बजे से बाबा राघव दास की प्रतिमा के पास पोस्टर बैनर लेकर डॉक्टरों ने ''''सेव द सेवियर’ वी वांट जस्टिस के साथ दोषी को फांसी की सजा देने की मांग करते हुए नारे लगाए।
प्राचार्य, बीआरडी मेडिकल कॉलेज राजकुमार जायसवाल ने कहा कि सभी सीनियर डॉक्टर ड्यूटी कर रहे हैं। ओपीडी में मरीजों को देखा भी गया। हमारा पूरा प्रयास है कि अधिक से अधिक मरीजों को राहत दी जा सके।