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Gorakhpur News: सरकार के खिलाफ असंतोष पैदा करने के लिए फैलाई गई थी कर्जमाफी की अफवाह
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गोरखपुर। सरकार और उसकी योजनाओं के खिलाफ आमजन में असंतोष पैदा कराने के लिए कर्जमाफी की अफवाह फैलाई गई थी। एजेंसियों की जांच में ये तथ्य सामने आया है। इस अफवाह के चलते स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं कई महिलाएं गोरखनाथ मंदिर पहुंच गई थीं। आंबेडकर जनमोर्चा के संयोजक श्रवण कुमार निराला और सहयोगियों पर महिलाओं को उकसाने का आरोप है।
जांच में पता चला है कि केस दर्ज होने के पहले तीन अक्तूबर को आंबेडकर जनमोर्चा के बैनर तले पहले 24 माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के नाम से पंफलेट वितरित किए गए थे। राष्ट्रपति के नाम से छपवाए गए इस पंफलेट के जरिये महिलाओं के बीच ऋण कंपनियों के प्रति अविश्वास बनाने की मंशा थी।
इसी के बाद पहली बार 13 अक्तूबर को कुछ महिलाएं गोरखनाथ मंदिर पहुंची थीं। उन्हें पुलिस ने यह बताकर लौटा दिया कि कर्जमाफी की कोई योजना नहीं है। एक दिन बाद ही महराजगंज, संतकबीरनगर और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में महिलाएं फिर मंदिर के गेट पर पहुंच गईं।
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एजेंसियों की जांच में सामने आया है कि कर्जमाफी की अफवाह व्हाट्सएप मैसेज या किसी प्रचार-प्रसार के जरिये नहीं फैलाई गई थी। ऐसा पूरी सोची-समझी साजिश के तहत किया गया था। दुष्प्रचार के केंद्र बिंदु को गोरखपुर से दूर रखा गया ताकि अगर मामला खुले भी तो आसानी से सच का पता न चले। सूत्रों ने बताया कि इसी वजह से श्रवण कुमार निराला के गृह क्षेत्र चौरीचौरा से बहुत कम संख्या में ही महिलाएं गोरखनाथ मंदिर पहुंचीं। एजेंसियों ने इस बिंदु को भी जांच के दायरे में रखा है।
दरअसल, दर्ज केस के मुताबिक, महिलाओं से पांच-पांच सौ रुपये लेकर श्रवण कुमार निराला ने कागज पर हस्ताक्षर करवाए थे। थाने का मुहर लगवाकर उन्हें ऋणमाफी की फर्जी सूचना दी थी। हालांकि जांच में यह तथ्य सामने आया है कि आरोपियों की मंशा धन कमाने की नहीं थी। उनकी मंशा थी कि कम पढ़ी-लिखी महिलाओं को उकसा कर उनसे सरकार का विरोध कराया जाए।
तीन अक्तूबर से केस दर्ज होने वाले दिन 16 अक्तूबर तक का पूरा घटनाक्रम एजेंसियों की जांच के दायरे में है। इन तथ्यों के साथ लखनऊ और दिल्ली आईबी दफ्तर में भी एक रिपोर्ट दाखिल की गई है। हालांकि पुलिस से पूछताछ में श्रवण ने घटना में किसी तरह की संलिप्तता से इंकार कर दिया है।
एक ने दूसरे से कहा... फैलती गई अफवाह
अभी तक की जांच में सामने आया है कि कर्जमाफी की अफवाह को महिलाओं के बीच फैलाने की काफी दिनों से साजिश रची जा रही थी। पहले महिलाओं से यह कहकर विश्वास जीतने की कोशिश की गई कि कर्ज लेने की प्रक्रिया में कमीशन लेकर ऋण कंपनियों ने बेइमानी की है। फिर इन महिलाओं के बीच पर्चा बांटा गया। इसमें लिखा था-ये कंपनियां अनपढ़ या कम पढ़ी-लिखी महिलाओं के लिए ब्याजखोर माफिया की तरह काम कर रही हैं। इनका रैकेट काफी सक्रिय है। कंपनियों ने कई महिलाओं का जीवन बर्बाद कर दिया है। इन महिलाओं को ऋण कंपनियों के जाल से मुक्त करवाना मानवता के लिए बहुत जरूरी है।
ऐसा करके आरोपियों ने महिलाओं को भराेसे में ले लिया। दर्ज केस के मुताबिक, महिलाओं को झांसे में लेकर रुपये भी लिए गए। उन्हें गोरखनाथ मंदिर जाने और वहां सीएम ऑफिस में ऋणमाफी के लिए फरियाद करने के लिए उकसाया गया।
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जांच में पता चला है कि केस दर्ज होने के पहले तीन अक्तूबर को आंबेडकर जनमोर्चा के बैनर तले पहले 24 माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के नाम से पंफलेट वितरित किए गए थे। राष्ट्रपति के नाम से छपवाए गए इस पंफलेट के जरिये महिलाओं के बीच ऋण कंपनियों के प्रति अविश्वास बनाने की मंशा थी।
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इसी के बाद पहली बार 13 अक्तूबर को कुछ महिलाएं गोरखनाथ मंदिर पहुंची थीं। उन्हें पुलिस ने यह बताकर लौटा दिया कि कर्जमाफी की कोई योजना नहीं है। एक दिन बाद ही महराजगंज, संतकबीरनगर और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में महिलाएं फिर मंदिर के गेट पर पहुंच गईं।
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एजेंसियों की जांच में सामने आया है कि कर्जमाफी की अफवाह व्हाट्सएप मैसेज या किसी प्रचार-प्रसार के जरिये नहीं फैलाई गई थी। ऐसा पूरी सोची-समझी साजिश के तहत किया गया था। दुष्प्रचार के केंद्र बिंदु को गोरखपुर से दूर रखा गया ताकि अगर मामला खुले भी तो आसानी से सच का पता न चले। सूत्रों ने बताया कि इसी वजह से श्रवण कुमार निराला के गृह क्षेत्र चौरीचौरा से बहुत कम संख्या में ही महिलाएं गोरखनाथ मंदिर पहुंचीं। एजेंसियों ने इस बिंदु को भी जांच के दायरे में रखा है।
दरअसल, दर्ज केस के मुताबिक, महिलाओं से पांच-पांच सौ रुपये लेकर श्रवण कुमार निराला ने कागज पर हस्ताक्षर करवाए थे। थाने का मुहर लगवाकर उन्हें ऋणमाफी की फर्जी सूचना दी थी। हालांकि जांच में यह तथ्य सामने आया है कि आरोपियों की मंशा धन कमाने की नहीं थी। उनकी मंशा थी कि कम पढ़ी-लिखी महिलाओं को उकसा कर उनसे सरकार का विरोध कराया जाए।
तीन अक्तूबर से केस दर्ज होने वाले दिन 16 अक्तूबर तक का पूरा घटनाक्रम एजेंसियों की जांच के दायरे में है। इन तथ्यों के साथ लखनऊ और दिल्ली आईबी दफ्तर में भी एक रिपोर्ट दाखिल की गई है। हालांकि पुलिस से पूछताछ में श्रवण ने घटना में किसी तरह की संलिप्तता से इंकार कर दिया है।
एक ने दूसरे से कहा... फैलती गई अफवाह
अभी तक की जांच में सामने आया है कि कर्जमाफी की अफवाह को महिलाओं के बीच फैलाने की काफी दिनों से साजिश रची जा रही थी। पहले महिलाओं से यह कहकर विश्वास जीतने की कोशिश की गई कि कर्ज लेने की प्रक्रिया में कमीशन लेकर ऋण कंपनियों ने बेइमानी की है। फिर इन महिलाओं के बीच पर्चा बांटा गया। इसमें लिखा था-ये कंपनियां अनपढ़ या कम पढ़ी-लिखी महिलाओं के लिए ब्याजखोर माफिया की तरह काम कर रही हैं। इनका रैकेट काफी सक्रिय है। कंपनियों ने कई महिलाओं का जीवन बर्बाद कर दिया है। इन महिलाओं को ऋण कंपनियों के जाल से मुक्त करवाना मानवता के लिए बहुत जरूरी है।
ऐसा करके आरोपियों ने महिलाओं को भराेसे में ले लिया। दर्ज केस के मुताबिक, महिलाओं को झांसे में लेकर रुपये भी लिए गए। उन्हें गोरखनाथ मंदिर जाने और वहां सीएम ऑफिस में ऋणमाफी के लिए फरियाद करने के लिए उकसाया गया।