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Gorakhpur News: दिसंबर तक दुकानों का किराया नहीं जमा किया तो निरस्त होगा आवंटन

Fri, 13 Dec 2024 01:14 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 13 Dec 2024 01:14 AM IST
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Gorakhpur News: If rent of shops is not deposited till December, allotment will be canceled
गोरखपुर। नगर निगम की दुकानों का बढ़ा हुआ किराया दिसंबर तक नहीं जमा करने वालों की दुकानें जनवरी में निरस्त कर दी जाएंगी और नए सिरे से इनका आवंटन होगा। नगर निगम की कार्यकारिणी समिति ने इसपर अपनी सहमति दे दी है।
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बृहस्पतिवार को मेयर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव की अध्यक्षता में नगर निगम कार्यकारिणी समिति की सातवीं बैठक संपन्न हुई। नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने बताया कि नगर निगम की करीब दो हजार दुकानें हैं। दशकों से इनका किराया नहीं बढ़ा था। सर्वे कर नए सिरे से किराए का निर्धारण किया गया है, लेकिन अब तक सिर्फ 800 दुकानदारों ने ही बढ़ा हुआ किराया जमा किया। कार्यकारिणी में तय हुआ कि किराया नहीं जमा करने वाले 1200 दुकानदार यदि 31 दिसंबर तक किराया नहीं जमा करेंगे तो अगले महीने जनवरी में उनका आवंटन निरस्त कर दुकानें दूसरों को आवंटित कर दी जाएंगी।
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कार्यकारिणी समिति की बैठक में 2024-25 के पार्षद वरीयता की तीसरी और अंतिम किस्त जारी करने का निर्णय हुआ। साथ ही यह भी तय हुआ कि जो पार्षद अभी तक दूसरी किस्त के 15 लाख रुपये के लिए कार्यों का प्रस्ताव नहीं दे सकें वे जल्द अपना प्रस्ताव दे दें। ऐसा नहीं करने पर किस्त लैप्स हो जाएगी और अगले वित्तीय वर्ष में इसे जोड़कर नहीं दिया जाएगा।
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नगर आयुक्त ने बताया कि 80 वार्ड में से 37 ऐसे वार्ड हैं जहां के पार्षद अभी तक दूसरी किस्त के लिए कार्यों का प्रस्ताव नहीं दे सके हैं। उन्होंने बताया कि प्रत्येक वित्तीय वर्ष में सभा पार्षद को पार्षद वरीयता के 51 लाख रुपये दिए जाते हैं। इनमें पहली और दूसरी किस्त के तौर पर 15-15 लाख रुपये और तीसरी किस्त के तौर पर 21 लाख रुपये दिए जाते हैं।
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ऑनलाइन होगा नामांतरण, शुल्क भी बढ़ेगा
नगर निगम में नामांतरण के सभी मामले अब ऑनलाइन होंगे। इसके लिए सभी आवेदन ई-नागर की वेबसाइट से ऑनलाइन लिए जाएंगे। अभी तक यह ऑफलाइन होता था। इसके साथ ही संपत्ति का नामांतरण कराना अब महंगा होगा। पहले 20 लाख रुपये से ऊपर की संपत्ति के नामांतरण पर नगर निगम पांच हजार रुपये शुल्क लेता था, जिसे अब बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर दिया गया है।
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841.74 करोड़ के आय और 970.74 करोड़ व्यय के बजट को मंजूरी

कार्यकारिणी की बैठक में नगर निगम के वित्तीय वर्ष 2024-25 के पुनरीक्षित बजट को सर्वसम्मति से स्वीकृति मिल गई। इसमें निगम की आय 841.74 करोड़ रुपये और अनुमानित व्यय 970.74 करोड़ रुपये है। इसी तरह पांच हजार और कंबल की खरीद को भी बैठक में मंजूरी मिली है। करीब डेढ़ माह पूर्व सदन की हुई बैठक में 10 हजार कंबल खरीदने का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ था।
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जलकल की दुकानें होंगी आवंटित
जलकल परिसर में बनी मल्टीलेवल पार्किंग की 40 दुकानों को आवंटित करने के लिए भी कार्यकारिणी ने मंजूरी दे दी। शुक्रवार को इसके लिए विज्ञापन जारी करने की तैयारी है।

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स्ट्रीट लाइट दुरुस्त करने तक नहीं होगा हैंडओवर
वार्ड नंबर आठ चरगावां की पार्षद व कार्यकारिणी सदस्य सरोज पासवान ने मोहद्दीपुर में पिछले दिनों हुए भीषण हादसे का जिक्र करते हुए मेडिकल रोड पर अंधेरा होने का मामला उठाते हुए कहा कि वहां की ज्यादातर स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ीं हैं। इसपर चर्चा हुई कि लोक निर्माण विभाग इस मार्ग की लाइटों को निगम को हैंडओवर करने की मांग कर रहा है। इसे लेकर निगम और पीडब्ल्यूडी की संयुक्त टीम ने सर्वे कर खराब लाइटें, तार व पोल आदि के मरम्मत व खरीद के लिए 65 लाख रुपये का प्रस्ताव बनाया था, लेकिन पीडब्ल्यूडी ने अभी तक न तो धनराशि दी और न ही खराब लाइटें ही दुरुस्त करा रहा। इसपर कार्यकारिणी सदस्यों ने निर्णय किया कि जब तक पीडब्ल्यूडी सभी लाइटों को दुरुस्त नहीं करा लेता नगर निगम उनका हैंडओवर नहीं लेगा।

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जेई-एई के निलंबन का उठा मामला
कार्यकारिणी की बैठक में वार्ड नंबर 16 दिग्विजयनगर के पार्षद ऋषि मोहन वर्मा ने एक ही सड़क का दो बार टेंडर और रात में ही उस सड़क को उखाड़ देने का मामला भी उठाया। उन्होंने कहा कि नगर आयुक्त के निर्देश पर मुख्य अभियंता की जांच में अवर अभियंता राजकुमार, विवेकानंद, सहायक अभियंता शैलेष कुमार और अधिशासी अभियंता अमरनाथ मामले में दोषी पाए गए थे। नगर आयुक्त ने इस मामले में शासन को पत्र लिखकर अवर अभियंता राजकुमार व सहायक अभियंता शैलेष कुमार के निलंबन, अवर अभियंता विवेकानंद को प्रतिकूल प्रविष्टि और अधिशासी अभियंता की परिनिंदा की संस्तुति की थी। इस कार्रवाई को एक महीने से अधिक समय बीत गया लेकिन अभी तक शासन से न तो कोई कार्रवाई हुई और न ही निगम ने ही पैरवी करना उचित समझा। इसपर नगर आयुक्त ने आश्वस्त किया कि मामले में कार्रवाई के लिए जल्द ही शासन में रिमाइंडर भेज अनुरोध किया जाएगा।
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