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बिजली विभाग: दो किलोवाट के कनेक्शन पर भेज दिया नौ लाख यूनिट का बिल, उपभोक्ता के पैरों तले खिसक गई जमीन

Sat, 11 Dec 2021 11:15 AM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी , गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी , गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 11 Dec 2021 11:15 AM IST
सार

मीटर रीडर ने लापरवाही से नौ लाख यूनिट का बिल बना डाला। उपखंड कार्यालय में बिल की गड़बड़ी की शिकायत पर मामला खुला तो अधिकारी भी सन्न रह गए। अधिकतम छह हजार यूनिट से ज्यादा का बिल दो किलोवाट पर नहीं बनता है।

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Gorakhpur Electricity Department sent bill of nine lakh units on connection of two kilowatts
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर बिजली विभाग पहुंचे एक उपभोक्ता के पैरों तले उस वक्त जमीन खिसक गई, जब अधिकारी ने मीटर रीडिंग देखकर उन्हें बताया कि उनका बिल तो 70 लाख रुपए होना चाहिए। जबकि, कनेक्शन धारक नौ हजार रुपये का बिल मिलने पर ही ज्यादा बिल की शिकायत लेकर वहां गई थी। हालांकि, यह बताने के साथ अधिकारी का सिर भी चकरा गया कि दो किलोवाट के एक घरेलू उपभोक्ता के मीटर की रीडिंग नौ लाख यूनिट कैसे हो सकती है ? खैर, अधिकारी ने ध्यान से देखा तो उन्हें समस्या समझ में आ गई कि दो किलोवाट के कनेक्शन पर अधिकतम छह हजार यूनिट का बिल बन सकता है, मीटर रीडर ने लापरवाही से नौ लाख यूनिट का बिल बना डाला।
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फिलहाल, गोलघर के एसडीओ ऐश्वर्य सिंह ने बिल सही करवाने का निर्देश दिया है। साथ ही बिलिंग कर्मचारियों की लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए आला अधिकारियों को पत्र लिखने की बात कही है। जानकारी के अनुसार तारामंडल की शीला सिंह के नाम दो किलोवाट का घरेलू कनेक्शन है। सितंबर 2021 तक उन्होंने बिजली बिल जमा किया है। अक्तूबर माह में न मीटर रीडर आया न बिल मिला। लिहाजा, जमा भी नहीं किया गया। मीटर रीडर ने नवंबर महीने में घर आकर बिल बनाया और नौ हजार रुपये से अधिक का बिल दे दिया।
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अचानक नौ हजार रुपये से ज्यादा का बिजली बिल आने पर वह शिकायत करने शुक्रवार को गोलघर खंड कार्यालय पहुंचीं। पड़ताल में पता चला कि सीलिंग का बिल बनाया गया, जिस कारण गड़बड़ी हुई है। बिल देखकर उपखंड कार्यालय के कर्मचारी भी आश्चर्य में पड़ गए। उपभोक्ता का 9 लाख 98 हजार 677 यूनिट रीडिंग का बिल बना दिया गया था। इस रीडिंग के हिसाब से बिल बनता तो 70 लाख रुपये का होता।
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क्या होता है सीलिंग बिजली बिल

घरेलू उपभोक्ताओं का निगम के सर्वर पर एक किलोवाट का अधिकतम तीन हजार यूनिट तक की खपत का ही बिजली बिल बन सकता है। इसके अलावा एक यूनिट भी अधिक सर्वर में कनेक्शन आईडी के साथ रीडिंग दर्ज करने पर सर्वर खुद से किलोवाट की क्षमता के हिसाब से सीलिंग का बिल बनाकर सर्वर पर अपडेट कर देता है। इस तरह दो किलोवाट कनेक्शन पर छह हजार रीडिंग से ज्यादा का बिल बनाकर सीलिंग बिल बना दिया गया।

अधीक्षण अभियंता शहरी यूसी वर्मा ने बताया कि उपभोक्ताओं के घर जाकर एजेंसी के मीटर रीडर बिल बनाते हैं। इस संबंध में एजेंसी के नियमित रीडरों से संपर्क कर उन्हें प्रशिक्षण देना चाहिए। कहीं कमी रह जाती है तो अभियंताओं से संपर्क कर सकते हैं, वे भी रीडर को प्रशिक्षित करेंगे। ऐसे गलत रीडिंग के हिसाब से बिजली बिल बनाने पर उपभोक्ताओं को काफी परेशानी होती है। इसकी जांच करवाएगी जाएगी।
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