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जीडीए की फ्लॉप संपत्तियों की कीमत 40 फीसदी तक हो सकती है कम

Wed, 22 Jan 2020 02:00 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jan 2020 02:00 AM IST
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GDA flop property matter
जीडीए टावर
जीडीए की फ्लॉप संपत्तियों की कीमत 40 फीसदी तक हो सकती है कम
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खंडहर बन रही करोड़ों की संपत्ति, अब एलडीए के फार्मूले पर बेचने की तैयारी
सर्वे के बाद रेट रिवाइज करने पर कीमत में आएगी बड़ी कमी
आठ बार की नीलामी प्रक्रिया के बाद भी नहीं बिकी जीडीए टॉवर की 36 दुकानें-ब्लाक
अरुण चन्द
गोरखपुर। गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की 10 से 25 साल पुरानी फ्लॉप संपत्तियों की विक्रय कीमत 25 से 40 फीसदी तक कम हो सकती हैं। इन्हें बेचने के लिए गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) समेत कुछ अन्य प्राधिकरणों के कीमत कम करके संपत्ति बेचने के फार्मूले को अपनाने की तैयारी कर रहा है।
बुधवार को आयोजित प्राधिकरण की बोर्ड बैठक के एजेंडों में इसे भी रखा गया है। बोर्ड ने सहमति दी तो इन संपत्तियों की कीमत फिर से तय कर उसका प्रस्ताव अगली बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद प्राधिकरण, एलडीए द्वारा तैयार प्रोफार्मा पर इन संपत्तियों की कीमत नए सिरे से तय करेगा। इसके लिए संबंधित संपत्ति के निर्माण के समय उसकी कीमत के अलावा कितनी बार उसकी नीलामी के प्रयास हुए और पुरानी होने पर उसकी कितनी कीमत होगी, आदि का आंकलन करने के बाद नए सिरे से रेट तय किए जाएंगे। संशोधित रेट पर संबंधित संपत्तियों की नीलामी शुरू की जाएगी। प्राधिकरण अपनी मंशा में सफल हुआ तो शहर के तमाम लोगों के लिए दुकान और दफ्तर के ब्लॉक के लिए जगह का बेहतर विकल्प तो मिलेगा ही, प्राधिकरण को भी करोड़ों की आय होगी।
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इस संबंध में जीडीए सचिव राम सिंह गौतम का कहना है कि लंबे समय से नहीं बिक रही संपत्तियों को बेचने के लिए एलडीए ने एक विशेष प्रोफार्मा की मदद से उनके रेट नए सिरे से तय किए हैं। इससे संबंधित संपत्तियों की कीमत करीब 40 फीसदी तक कम हुई, जिसके बाद ज्यादातर संपत्तियां बिकने लगीं। इसी प्रोफार्मा के आधार पर जीडीए की अलोकप्रिय संपत्तियाें का फिर से रेट रिवाइज करने के लिए बोर्ड बैठक में प्रस्ताव रखा जाएगा। बोर्ड की सैद्धांतिक अनुमति मिली तो रेट रिवाइज कर अगली बोर्ड बैठक में उसे रखा जाएगा। वहां से स्वीकृति के बाद बदले रेट पर संपत्तियों की बिक्री शुरू की जाएगी।
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जीडीए टॉवर की आधी इमारत खाली, बिक्री के आठ प्रयास फेल
शहर के बीचों बीच सबसे पॉश इलाके गोलघर में प्राधिकरण द्वारा वर्ष 2002-2003 में बनवाए गए जीडीए टॉवर की आधी इमारत करीब डेढ़ दशक बाद भी खाली पड़े-पड़े अब जगह-जगह क्षतिग्रस्त होने लगी है। टॉवर के तीसरे तल से लेकर छठें तल में बनी 36 संपत्तियाें की बिक्री के लिए आठ बार प्रयास किया गया, मगर विफल रहे। इसमें सबसे कम रेट 42.34 लाख रुपये का एक ब्लॉक है, जबकि बाकी सभी 1.50 करोड़ रुपये से लेकर 2.67 करोड़ रुपये तक के हैं। लंबे अर्से से ये संपत्तियां क्यों नहीं बिक रहीं, इसपर मंथन करने के बाद प्राधिकरण के अफसर इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि टॉवर के दुकानों-ब्लाकों की कीमत बहुत ज्यादा है, जिसकी वजह से खरीदार नहीं मिल रहे। वहीं जीडीए टॉवर से महज 70 से 80 मीटर की ही दूरी पर बलदेव प्लाजा हैं, जहां की सभी दुकानों को बिके लंबा अर्सा हो गया। वर्तमान में हालत यह है कि वहां गलियारे में भी एक कुर्सी-मेज रखकर मोबाइल बनाने वाले भी मोटा किराया जमा करते हैं।
विकास नगर की पांच दुकानों की 21 बार हो चुकी है नीलामी
प्राधिकरण ने शहर के विकासनगर में 1989-90 में व्यावसायिक परियोजना शुरू की थी। इनमें से पांच दुकानों की बिक्री के लिए तब से अभी तक 21 बार नीलामी की प्रक्रिया शुरू की गई, मगर किसी भी बार कोई खरीदार नहीं आया। पिछले साल 2019 में भी जीडीए ने इन्हें बेचने की कोशिश की थी, मगर मायूसी ही हाथ लगी। सभी दुकानें 17.40 लाख रुपये से लेकर 23.72 लाख रुपये तक की हैं।

17 प्रयास बाद भी नहीं बिकी राप्ती व टीपीनगर की 30 दुकानें
प्राधिकरण के मुताबिक, राप्तीनगर की 14 और नवीन ट्रांसपोर्टनगर की 16 दुकानों की बिक्री के लिए 17 बार नीलामी प्रक्रिया अपनाई गई। पंजीकरण शुरू हुआ। हर बार महीने भर का समय भी दिया गया, मगर इन दुकानों के लिए भी कोई खरीदार नहीं मिला।
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