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तस्वीरें: पूर्वांचल के 'जुहू चौपाटी' की खूबसूरती पर लगा दाग, रोजाना सफाई के लिए 12 श्रमिक तैनात

Fri, 12 Nov 2021 11:12 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 12 Nov 2021 11:12 AM IST
सार

दो महीने पहले 1.25 करोड़ रुपये खर्च कर जीडीए ने रामगढ़ताल की सफाई कराई थी। ताल में फिर जलकुंभी न फैले इसलिए जीडीए ने रोजाना सफाई कराने का निर्णय किया।

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GDA decided to get it cleaned daily for get rid of water hyacinth growing in Ramgarhtal
रामगढ़ताल में जलकुंभी। - फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर शहर की शान रामगढ़ताल में बार-बार सफाई के बाद भी पनप रही जलकुंभी से निजात के लिए जीडीए ने हर रोज ताल की सफाई कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए 12 श्रमिकों की टीम तैनात की गई है। जीडीए सचिव ने टीम को नाव से रोजाना ताल का भ्रमण कर जलकुंभी हटाने के निर्देश दिया है।


गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के लिए जलकुंभी सिरदर्द बन गई है। दो महीने पहले ही प्राधिकरण ने ताल को पूरी तरह से जलकुंभी रहित बनाया था। इस सफाई कार्य में 1.25 करोड़ रुपये भी खर्च करने पड़े थे। बाकायदा प्राधिकरण ने ताल से जलकुंभी की सफाई के लिए टेंडर निकाला था।
GDA decided to get it cleaned daily for get rid of water hyacinth growing in Ramgarhtal
रामगढ़ताल। - फोटो : अमर उजाला।
ताल की खूबसूरती पर लगा दाग जल्द साफ कराने के लिए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह खुद सफाई कार्य की निगरानी कर रह थे। दो महीने बाद अब फिर ताल के कुछ हिस्सों में जलकुंभी दिखाई पड़ने लगी है।
 
GDA decided to get it cleaned daily for get rid of water hyacinth growing in Ramgarhtal
रामगढ़ताल। - फोटो : अमर उजाला।
यह जलकुंभी फिर पूरे ताल में न फैल जाए इसलिए उपाध्यक्ष ने तत्काल जलकुंभी हटवाई थी। दो-तीन दिन बाद फिर जलकुंभी दिखी तो सफाई कराई गई। मगर बार-बार जलकुंभी पनप जाने से तंग आकर जीडीए उपाध्यक्ष ने करीब 12 श्रमिकों की टीम को तैनात किया है।
 
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जीडीए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह। - फोटो : अमर उजाला।
जीडीए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह ने बताया कि पर्यटन का बड़ा केंद्र होने की वजह से रामगढ़ताल की रोजाना निगरानी की जाती है। ताल के आस-पास ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
 
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रामगढ़ताल। - फोटो : अमर उजाला।
उपाध्यक्ष ने कहा कि ताल में हर दो-चार दिन पर जलकुंभी पनप जाने से अब इसकी रोजाना सफाई कराने का निर्णय किया गया है। ताल की खूबसूरती बरकरार रहे इसलिए अब जलकुंभी नहीं फैलने दी जाएगी।
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