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Gorakhpur News: गर्भावस्था के दौरान पांच फीसदी महिलाओं की बच्चेदानी में मिलती है गांठ

Sun, 26 Nov 2023 12:31 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 26 Nov 2023 12:31 AM IST
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Five percent of women find a lump in their uterus during pregnancy.
आइसोपार्ब ने पहली बार युवा चिकित्सकों के लिए आयोजित की कांफ्रेंस
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अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। करीब पांच फीसदी गर्भवतियों की बच्चेदानी में गांठ मिलती है। यह गांठ जच्चा-बच्चा के लिए जानलेवा हो सकती है। प्रसव के ऑपरेशन के दौरान अगर गांठ कट जाए तो रक्त स्राव को रोक पाना कठिन होता है।
यह बातें बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के गायनी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. उमा पांडेय ने शनिवार को आइसोपार्ब की तरफ से आयोजित राष्ट्रीय युवा कांफ्रेंस में कहीं। उन्होंने बताया कि बच्चेदानी में गांठ होने पर गर्भवती को बेतहाशा दर्द होता है। यह गांठ प्रसव के बाद बच्चेदानी को पूरी तरह सिकुड़ने नहीं देती। ऑपरेशन के दौरान गांठ कट जाए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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डॉ. मंदाकिनी प्रधान ने बताया कि गर्भावस्था में कंजनाइटल इंफेक्शन मां के साथ गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत पर भी असर डालता है। इसमें सबसे खतरनाक है रुबेला वायरस का संक्रमण। अगर गर्भावस्था के पहले तिमाही में इसका इंफेक्शन हो गया तो शिशु दिव्यांग पैदा होगा। चिकन- पॉक्स और हेपेटाइटिस-बी का संक्रमण भी जच्चा-बच्चा को प्रभावित करता है।
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आयोजन समिति की अध्यक्ष डॉ साधना गुप्ता ने बताया कि गर्भावस्था में प्लेटलेट्स गिरने लगता है। करीब सात फीसदी गर्भवतियों में गर्भावस्था के दौरान प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं। कई बार प्लेटलेट्स काफी नीचे पहुंच जाता हैं। ऐसे में इलाज कर रहे चिकित्सक को अलर्ट हो जाना चाहिए। गर्भवती में 40 हजार से कम प्लेटलेट्स होने पर सिजेरियन करने से परहेज करना चाहिए। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ 80 हजार से कम प्लेटलेट्स पर बेहोशी की दवा नहीं देते।
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प्रति 100 मरीज पर केवल एक डॉक्टर
प्रो गंगाधर साहू ने कहा कि देश में डॉक्टरों की संख्या मानक से 10 गुना कम है। सरकारी व निजी अस्पतालों की ओपीडी में पहुंचे 100 मरीजों पर एक डॉक्टर उपलब्ध है। जबकि आदर्श स्थिति में यह आंकड़ा 10 मरीजों पर एक चिकित्सक का होना चाहिए था। चिकित्सा-शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों की संख्या सीमित है। ऐसे में नए मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेने वाले छात्रों को बेहतर शिक्षा नहीं मिल रही। उन्होंने चिकित्सकों को बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा दी।

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मेयर ने किया उद्घाटन
इंडियन सोसाइटी ऑफ रिप्रोडक्टिव एंड चाइल्ड हेल्थ केयर (आइसोपार्ब) द्वारा आयोजित इस कांफ्रेंस का उद्घाटन शनिवार को मेयर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने किया। इस दौरान आइसोपार्ब के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अरुप कुमार मांझी, अध्यक्ष डॉ प्रज्ञा मिश्रा मौजूद रहीं। इसके अलावा डॉ. राधा जीना, डॉ. रीना श्रीवास्तव, डॉ. सविता अग्रवाल, डॉ. अल्पना अग्रवाल, डॉ. रीता सिंह, डॉ. बबीता शुक्ला, डॉ सीमा शाही समेत कई डॉक्टर मौजूद रहीं।
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