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UP News: बिना पंजीयन भूगर्भ जल दोहन पर पांच लाख रुपये तक जुर्माना, एक साल की कैद
Wed, 21 Sep 2022 03:08 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 21 Sep 2022 03:08 PM IST
सार
मुख्य विकास अधिकारी संजय कुमार मीणा ने मंगलवार को भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद की बैठक में भूगर्भ जल के प्रबंधन के संबंध में जिले के अधिकारियों के साथ चर्चा की। उन्होंने ग्रामीण तथा नगरीय क्षेत्रों में भूगर्भ जल अविरत प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए भूगर्भ जल की सुरक्षा, संरक्षा, नियंत्रण तथा विनियमन पर जोर दिया।
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भूगर्भ जल दोहन।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भूगर्भ जल के अधिशासी अभियंता विश्वजीत सिंह ने बताया कि बिना पंजीयन भूगर्भ जल दूषित करने अथवा भूगर्भ जल का व्यवसाय के लिए दोहन करने वाले पर दो से पांच लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। उत्तरप्रदेश भूगर्भ जल (प्रबंधन और विनियमन) अधिनियम 2019 के अनुसार जुर्माना या छह महीने से एक साल की कैद या दोनों दंड का प्रावधान है।
मुख्य विकास अधिकारी संजय कुमार मीणा ने मंगलवार को भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद की बैठक में भूगर्भ जल के प्रबंधन के संबंध में जिले के अधिकारियों के साथ चर्चा की। उन्होंने ग्रामीण तथा नगरीय क्षेत्रों में भूगर्भ जल अविरत प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए भूगर्भ जल की सुरक्षा, संरक्षा, नियंत्रण तथा विनियमन पर जोर दिया।
इसी क्रम में भूगर्भ जल विभाग के अधिशासी अभियंता विश्वजीत सिंह ने बताया कि उत्तरप्रदेश भूगर्भ जल (प्रबंधन और विनियमन) अधिनियम 2019 के तहत वेब पोर्टल को भी यूपीडेस्को के माध्यम से विकसित किया गया है। अधिनियम में किये गये प्रावधानों के अंतर्गत घरेलू, कृषक भूजल उपभोक्ताओं का पंजीकरण, व्यावसायिक, औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर एवं बल्क भूजल उपभोक्ताओ का पंजीकरण कराना बाध्यकारी है।
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अधिनियम के अंतर्गत उपभोक्ताओं के पंजीकरण करने एवं भूजल निकास के लिए अनापत्ति निर्गत करने की पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए आनलाइन वेब पोर्टल विकसित किया गया है। अधिनियम की धारा 39 के अंतर्गत भूगर्भ जल दूषित करने तथा भूगर्भ जल का व्यवसाय के लिए अनाधिकृत रूप से दोहन करने का दोषी पाए गए व्यक्ति या समूह संस्था को 2 से 5 लाख का जुर्माना अथवा 6 माह से 1 वर्ष का कारावास अथवा दोनो दंड निर्धारित किए गए हैं।
हाइड्रोलाजिस्ट रागिनी सरस्वती ने बताया कि जिले के सभी ब्लॉक सेफ जोन में हैं। परंतु, इस स्थिति को बनाए रखना तथा सुधारने के लिए भूगर्भ जल संसाधनों के संरक्षण, नियंत्रण तथा विनियमन करने की अत्यधिक आवश्यकता है। सभी जन सामान्य को यह समझाने की आवश्यकता है कि भूगर्भ जल घरेलू, कृषि और औद्योगिक उपयोगों के लिए एकल सर्वाधिक महत्वपूर्ण जल स्रोत है।
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मुख्य विकास अधिकारी संजय कुमार मीणा ने मंगलवार को भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद की बैठक में भूगर्भ जल के प्रबंधन के संबंध में जिले के अधिकारियों के साथ चर्चा की। उन्होंने ग्रामीण तथा नगरीय क्षेत्रों में भूगर्भ जल अविरत प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए भूगर्भ जल की सुरक्षा, संरक्षा, नियंत्रण तथा विनियमन पर जोर दिया।
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इसी क्रम में भूगर्भ जल विभाग के अधिशासी अभियंता विश्वजीत सिंह ने बताया कि उत्तरप्रदेश भूगर्भ जल (प्रबंधन और विनियमन) अधिनियम 2019 के तहत वेब पोर्टल को भी यूपीडेस्को के माध्यम से विकसित किया गया है। अधिनियम में किये गये प्रावधानों के अंतर्गत घरेलू, कृषक भूजल उपभोक्ताओं का पंजीकरण, व्यावसायिक, औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर एवं बल्क भूजल उपभोक्ताओ का पंजीकरण कराना बाध्यकारी है।
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अधिनियम के अंतर्गत उपभोक्ताओं के पंजीकरण करने एवं भूजल निकास के लिए अनापत्ति निर्गत करने की पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए आनलाइन वेब पोर्टल विकसित किया गया है। अधिनियम की धारा 39 के अंतर्गत भूगर्भ जल दूषित करने तथा भूगर्भ जल का व्यवसाय के लिए अनाधिकृत रूप से दोहन करने का दोषी पाए गए व्यक्ति या समूह संस्था को 2 से 5 लाख का जुर्माना अथवा 6 माह से 1 वर्ष का कारावास अथवा दोनो दंड निर्धारित किए गए हैं।
हाइड्रोलाजिस्ट रागिनी सरस्वती ने बताया कि जिले के सभी ब्लॉक सेफ जोन में हैं। परंतु, इस स्थिति को बनाए रखना तथा सुधारने के लिए भूगर्भ जल संसाधनों के संरक्षण, नियंत्रण तथा विनियमन करने की अत्यधिक आवश्यकता है। सभी जन सामान्य को यह समझाने की आवश्यकता है कि भूगर्भ जल घरेलू, कृषि और औद्योगिक उपयोगों के लिए एकल सर्वाधिक महत्वपूर्ण जल स्रोत है।