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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Faith surged in Gorakhnath temple on Budhwa Mangal, Khichdi was offered to Guru Gorakshanath.

Gorakhnath Mandir: बुढ़वा मंगल पर गोरखनाथ मंदिर में उमड़ी आस्था, श्रद्धालुओं ने चढ़ाई खिचड़ी

Wed, 24 Jan 2024 04:49 PM IST
रोहित शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: रोहित शर्मा Updated Wed, 24 Jan 2024 04:49 PM IST
सार

मंगलवार सुबह गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर का कपाट खुलने के साथ ही बाबा को आस्था की खिचड़ी चढ़ाने का सिलसिला शुरू हो गया। जैसे-जैसे दिन चढ़ा, श्रद्धालुओं की भीड़ भी बढ़ती गई। बाबा को खिचड़ी चढ़ाने का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। 

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Faith surged in Gorakhnath temple on Budhwa Mangal, Khichdi was offered to Guru Gorakshanath.
गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाते श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मकर संक्रांति के दूसरे मंगलवार बुढ़वा मंगल पर गोरखनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी पड़ी। श्रद्धालुओं ने दर्शन पूजन कर गुरु गोरक्षनाथ को आस्था की खिचड़ी निवेदित की। पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में लगे मेले का आनंद लिया।
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मंगलवार सुबह गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर का कपाट खुलने के साथ ही बाबा को आस्था की खिचड़ी चढ़ाने का सिलसिला शुरू हो गया। जैसे-जैसे दिन चढ़ा, श्रद्धालुओं की भीड़ भी बढ़ती गई। बाबा को खिचड़ी चढ़ाने का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। बुढ़वा मंगल पर खिचड़ी चलाने की भी मान्यता उतनी ही है, जितनी मकर संक्रांति की।
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ऐसे में जो श्रद्धालु मकर संक्रांति को खिचड़ी नहीं चढ़ा पाते, वह बुढ़वा मंगल के दिन अपना यह अनुष्ठान संपन्न करते हैं। इस अवसर पर होने वाली भीड़ को नियंत्रित करने और उनकी सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किया था। मंदिर के स्वयंसेवक में श्रद्धालुओं को मदद कर रहे थे।
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बुढ़वा मंगल की यह है मान्यता

बुढ़वा मंगल का पर्व पौष माह के अंतिम मंगलवार को मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव के अवतार माने जाने वाले हनुमानजी का दर्शन-पूजन करना शुभ माना जाता है। ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, मान्यता है कि इस दिन हनुमानजी की पूजा से सारे कष्ट समाप्त हो जाते हैं। बताया कि बुढ़वा मंगल की मान्यता रामायण काल से जुड़ी है।


मान्यता है कि इसी दिन रावण ने लंका स्थित अपने राजदरबार में हनुमान जी पूंछ में आग लगवाई थी, जिसके बाद उन्होंने रावण की लंका को जलाने के लिए अपनी पूंछ में बड़वानल यानी विशाल अग्नि पैदा कर दी थी।

 
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