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पूर्व सैनिकों का दर्द: देश के दुश्मनों को इंच भर जमीन नहीं लेने दी, अब अपनों से कब्जे की जंग हार रहे
Fri, 24 Dec 2021 12:56 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 24 Dec 2021 12:56 PM IST
सार
जमीन पर कब्जे के लिए कई माह से पूर्व सैनिक चक्कर लगा रहे हैं। शाहपुर थाना क्षेत्र के महादेव झारखंडी में इन लोगों प्लॉट ने लिया था। इनमें से कई लंबे समय बाद अपने नाम पंजीकृत भूमि पर कब्जा पाने के लिए संबंधित कार्यालयों के चक्कर काटकर थक चुके हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : iStock
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विस्तार
देश की सुरक्षा में जवानी खपा देने वाले पूर्व सैनिकों को रिटायरमेंट के बाद अपनी जमीन पर कब्जे के लिए जूझना पड़ रहा है। गोरखपुर शहर के महादेव झारखंडी इलाके में प्लॉट खरीदने वाले चार पूर्व सैनिक कई माह से इस तकलीफ से गुजर रहे हैं। वहीं, शहर से सटे बाघागाड़ा के एक पूर्व सैनिक भी पड़ोसी से विवाद के चलते जमीन पर कब्जा नहीं कर पा रहे हैं।
गोरखपुर-बस्ती मंडल के कई पूर्व सैनिकों ने गोरखपुर शहर में घर बनाने के लिए जमीन खरीदी है। इनमें से कई लंबे समय बाद अपने नाम पंजीकृत भूमि पर कब्जा पाने के लिए संबंधित कार्यालयों के चक्कर काटकर थक चुके हैं। बुधवार को ऐसे कई मामले डीएम के साथ हुई, सैनिक बंधु की बैठक में उठे। वीर सेनानी कल्याण संस्था के अध्यक्ष अनिरुद्ध शाही बताते हैं कि कूड़ाघाट में पूर्व सैनिक रामप्रवेश सिंह ने दुकान खोली थी। पुलिस वालों ने दुकान को अवैध बताते हुए बंद करा दिया। तब से वे दुकान खुलवाने के लिए दौड़ रहे हैं। बाघागाड़ा निवासी संजय यादव ने घर बनवाने के लिए जमीन खरीदी थी, पड़ोसी न्यायालय का विवाद बताकर वहां निर्माण नहीं होने दे रहा है।
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डीएम विजय किरन आनंद ने बताया कि सैनिक बंधु की बैठक में जो भी मामले आए थे, उनके निस्तारण के लिए एडीएम सिटी को नोडल अफसर नामित किया गया है। शिकायती पत्रों की जांच कराई जा रही है। जमीन से संबंधित विवादों का निस्तारण अतिशीघ्र कराया जाएगा।
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गोरखपुर-बस्ती मंडल के कई पूर्व सैनिकों ने गोरखपुर शहर में घर बनाने के लिए जमीन खरीदी है। इनमें से कई लंबे समय बाद अपने नाम पंजीकृत भूमि पर कब्जा पाने के लिए संबंधित कार्यालयों के चक्कर काटकर थक चुके हैं। बुधवार को ऐसे कई मामले डीएम के साथ हुई, सैनिक बंधु की बैठक में उठे। वीर सेनानी कल्याण संस्था के अध्यक्ष अनिरुद्ध शाही बताते हैं कि कूड़ाघाट में पूर्व सैनिक रामप्रवेश सिंह ने दुकान खोली थी। पुलिस वालों ने दुकान को अवैध बताते हुए बंद करा दिया। तब से वे दुकान खुलवाने के लिए दौड़ रहे हैं। बाघागाड़ा निवासी संजय यादव ने घर बनवाने के लिए जमीन खरीदी थी, पड़ोसी न्यायालय का विवाद बताकर वहां निर्माण नहीं होने दे रहा है।
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पड़ोसी जमीन को बता रहा अपनी
देवरिया जिले के छठियांव गांव निवासी उमेश यादव ने पत्नी विशाखा देवी के नाम से महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर एक में जमीन खरीदी। रजिस्ट्री व दाखिल खारिज के बाद, जब वे निर्माण कराने पहुंचे तो पड़ोसी ने जमीन को अपना बताते हुए, काम करने से रोक दिया। इसी प्लॉट के बगल में इस्लामपुर निवासी हरिश्चंद्र सिंह ने पत्नी कुसमावती देवी के नाम से और देवरिया जिले के बरहज तहसील के खोरी गांव निवासी हरिशंकर सिंह ने पत्नी आशा सिंह के नाम से जमीन खरीदी थी। परंतु ये लोग भी अभी जमीन पर काबिज नहीं हो पाए हैं। तीनों प्लॉट पर कब्जे को एक ही व्यक्ति ने रोक रखा है। ये सभी पूर्व सैनिक, डेढ़ साल से जमीन पर कब्जे के लिए परेशान हैं।
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निर्माण कार्य रोक दिया
देवरिया जिले के ही कुंवर बखरा गांव निवासी पूर्व सैनिक दिवाकर उपाध्याय ने भी महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर तीन में सात साल पहले एक प्लॉट खरीदा था। जमीन की बाउंड्री भी हो चुकी है। इस साल जब निर्माण कार्य शुरू कराने पहुंचे, तब एक व्यक्ति ने जमीन को अपना बताते हुए इस पर निर्माण कार्य करने से रोक दिया। दिवाकर उपाध्याय तभी से अफसरों के पास चक्कर लगा रहे हैं।डीएम विजय किरन आनंद ने बताया कि सैनिक बंधु की बैठक में जो भी मामले आए थे, उनके निस्तारण के लिए एडीएम सिटी को नोडल अफसर नामित किया गया है। शिकायती पत्रों की जांच कराई जा रही है। जमीन से संबंधित विवादों का निस्तारण अतिशीघ्र कराया जाएगा।