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Gorakhpur News: बाल संरक्षण योजनाओं की डीएम ने की समीक्षा
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निराश्रित बच्चों के पुनर्वास पर जोर
गोरखपुर। जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति और किशोर न्याय समिति की समीक्षा बैठक शनिवार को विकास भवन सभागार में डीएम दीपक मीणा की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में बाल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं, संस्थाओं की कार्यप्रणाली और बच्चों के हित में किए जा रहे कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई।
बैठक की शुरुआत जिला प्रोबेशन अधिकारी ने की। उन्होंने बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, बाल एवं बालिका गृह तथा सुधार गृह की प्रगति रिपोर्ट, कार्यप्रणाली और सामने आ रही चुनौतियों की जानकारी दी। अधिकारियों ने निराश्रित बच्चों के चिन्हांकन, उन्हें सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने और पुनर्वास की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने पर चर्चा की। बैठक में निराश्रित बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। साथ ही निर्देश दिए गए कि बाल संरक्षण से जुड़े कार्यों की समीक्षा ब्लॉक और ग्राम स्तर पर नियमित रूप से निर्धारित समय सीमा के भीतर की जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि बाल संरक्षण अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय है। इसके लिए सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को बेहतर प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है ताकि बच्चों को समय पर सहायता और संरक्षण मिल सके। बैठक में पुलिस, शिक्षा, चिकित्सा, कौशल विकास, खेल, महिला कल्याण विभाग के अधिकारियों के अलावा जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड हेल्पलाइन, वन स्टॉप सेंटर, डिस्ट्रिक्ट हब फॉर एंपावरमेंट ऑफ वीमेन, बाल संरक्षण गृह और अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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गोरखपुर। जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति और किशोर न्याय समिति की समीक्षा बैठक शनिवार को विकास भवन सभागार में डीएम दीपक मीणा की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में बाल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं, संस्थाओं की कार्यप्रणाली और बच्चों के हित में किए जा रहे कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई।
बैठक की शुरुआत जिला प्रोबेशन अधिकारी ने की। उन्होंने बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, बाल एवं बालिका गृह तथा सुधार गृह की प्रगति रिपोर्ट, कार्यप्रणाली और सामने आ रही चुनौतियों की जानकारी दी। अधिकारियों ने निराश्रित बच्चों के चिन्हांकन, उन्हें सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने और पुनर्वास की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने पर चर्चा की। बैठक में निराश्रित बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। साथ ही निर्देश दिए गए कि बाल संरक्षण से जुड़े कार्यों की समीक्षा ब्लॉक और ग्राम स्तर पर नियमित रूप से निर्धारित समय सीमा के भीतर की जाए।
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जिलाधिकारी ने कहा कि बाल संरक्षण अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय है। इसके लिए सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को बेहतर प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है ताकि बच्चों को समय पर सहायता और संरक्षण मिल सके। बैठक में पुलिस, शिक्षा, चिकित्सा, कौशल विकास, खेल, महिला कल्याण विभाग के अधिकारियों के अलावा जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड हेल्पलाइन, वन स्टॉप सेंटर, डिस्ट्रिक्ट हब फॉर एंपावरमेंट ऑफ वीमेन, बाल संरक्षण गृह और अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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