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Gorakhpur News: चुनाव ड्यूटी बनी चुनौती, देनी पड़ रही अग्नि परीक्षा
Wed, 22 May 2024 06:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Wed, 22 May 2024 06:16 AM IST
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विश्वविद्यालय और विकास भवन में चुनाव ड्यूटी कटवाने पहुंचे बीमार लोग
विकास भवन के रैंप के पास थे सरकारी वाहन, दिव्यांगों को चढ़नी पड़ीं सीढि़यां
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। पांच साल में एक बार आने वाले लोकतंत्र के इस महापर्व में हर कोई प्रतिभाग करना चाहता है, लेकिन कुछ मजबूरियां ऐसी होती हैं, जिनमें विवशता के अलावा कुछ हाथ नहीं लगता। जिन कर्मचारियों की चुनाव ड्यूटी लगी है, उनमें कुछ गंभीर रूप से बीमार हैं, तो कुछ दुर्घटना के शिकार हो गए हैं।
ऐसे लोग मंगलवार को विकास भवन के प्रथम तल स्थित मीटिंग हाल में व्यथा बताने और स्थिति दिखाने पहुंचे थे, ताकि प्रशासन को यह विश्वास हो जाए कि उन्होंने जो आवेदन में लिखा है, वह हकीकत है। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कला संकाय में आयोजित मतदान प्रशिक्षण से लेकर मतदान कर्मियों के मेडिकल सर्टिफिकेट के जांच स्थल विकास भवन तक चलने में अक्षम लोगों को जाना पड़ा। पहले तो विभागों की ओर से प्रशासन को भेजी गई सूची में शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के नाम को शामिल गया, जबकि मेडिकल सर्टिफिकेट की जांच के लिए प्रथम तल का चयन किया गया। इस कारण लोगाें की परेशानियां और बढ़ गईं।
विकास भवन में मंगलवार को 200 से अधिक लोग चुनाव ड्यूटी कटवाने के लिए अपनी मजबूरियां बताने पहुंचे थे, जिनमें दुर्घटना के शिकार लोगों को चलने में कठिनाई थी। विकास भवन में दिव्यांगों के लिए रैंप बनाए गए हैं, लेकिन लापरवाही के कारण वहां दो सरकारी वाहन खड़े थे। इस कारण शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को सीढि़यां चढ़नी पड़ीं। हालांकि, अंदर पहुंचने पर लिफ्ट से मदद मिली। लोग मीटिंग हाल में बैठे थे, लेकिन दोपहर 1:20 बजे निर्णय हुआ कि डॉक्टर सीडीओ ऑफिस के एक केबिन में जांच करेंगे। उसके बाद लोगों को लाइन में लगना पड़ा।
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इसी लाइन में वॉकर के सहारे खड़े नगर निगम कर्मचारी उमाशंकर ने बताया कि उनकी दुर्घटना हो गई है। उनके पैर में प्लेट पड़ी है, चलने में दिक्कत हो रही है।
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गर्मी और उमस से परेशान रहे लोग
चुनाव ड्यूटी के आवेदनों को अग्रसारित करने के लिए कर्मचारियों को सुबह 10 बजे विकास भवन में बुलाया गया, लेकिन डॉक्टर दोपहर 2:00 बजे आए। सुबह से ही लोग एसी मीटिंग हाल में बैठे थे, लेकिन दोपहर 1:20 बजे सभी को यह कहकर बाहर कर दिया गया कि डॉक्टर केबिन में बैठेंगे। इस दौरान लोग गर्मी और उमस से परेशान हो रहे थे। फिर दोपहर 3:00 बजे सभी को एसी हाल में बैठाया गया और वहीं पर सर्टिफिकेट की जांच हुई। यहां मौजूद रिटायर्ड रेलकर्मी ए रमन ने कहा कि यदि वरीयता सूची के आधार पर जांच होती हो गर्मी में बीमार कर्मचारियों की दुर्दशा नहीं होती।
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साहब! महसूस करो हमारा दर्द
- विश्वविद्यालय परिसर के कला संकाय भवन परिसर से वॉकर के सहारे बाहर निकल रहीं व्यायाम शिक्षिका सुमन ने बताया कि बच्चों को पीटी कराते हुए वह गिर गईं थीं। उनके घुटने में चोट लगने के कारण ऑपरेशन कराना पड़ा। 18 मई को उनका डेढ़ माह का अवकाश पूरा हुआ है, उसके बाद ग्रीष्म कालीन अवकाश शुरू हो गया है। चुनाव ड्यूटी से बचने के लिए अवकाश नहीं लिया है। इसलिए दिक्कत हो रही है।
- विकास भवन के मीटिंग हाल के बाहर खड़ी बांसगांव की शिक्षिका नीतू शुक्ला ने बताया कि उनका पैर पोलियोग्रस्त है, जिससे ऊंची कुर्सी पर ही बैठ सकती हैं। इस कारण डेढ़ घंटे से खड़ी थीं। यदि मेडिकल सर्टिफिकेट की जांच नीचे होती तो परेशानी कुछ कम होती।
- बाल विकास परियोजना विभाग में कार्यरत मंजू श्रीवास्तव भी व्हील चेयर पर बाहर बैठी थीं। वह ठीक से बोल नहीं पा रही थीं। उनके परिजन ने बताया कि कोई गंभीर बीमार है, जिसमें उनका हाथ-पैर काम नहीं कर रहा है।
- मुर्तुजा हुसैन हायर सेकेंडरी स्कूल घासीकटरा के आलमगीर मीटिंग हाल में बैठने वाली सीट पर लेटे हुए थे। साथ मौजूद एक किशोर के हाथ में उनके मेडिकल सर्टिफिकेट थे। किशोर ने बताया कि उन्हें पैरालाइसिस अटैक हुआ है और 3-4 दिन से तबीयत और बिगड़ गई है।
- गोरखपुर विश्वविद्यालय में कार्यरत विश्व दीपक श्रीवास्तव ने बताया कि शनिवार को उनकी दुर्घटना हो गई थी, प्रशिक्षण ले चुके हैं, लेकिन ऐसी अवस्था में चलने में कठिनाई हो रही है।
- गोरखपुर विश्वविद्यालय में पहुंचे शिक्षा कर्मी एहसान अंसारी ने बताया कि दुर्घटना में उनके हाथ की हड्डी टूट गई है, इसलिए ड्यूटी से नाम कटवाना चाहते हैं।
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बच्चों को लेकर पहुंचीं महिला कर्मी
विश्वविद्यालय से विकास भवन तक बच्चों को लेकर महिला कर्मी पहुंचीं। इनमें कुछ महिलाएं बच्चों के साथ प्रशिक्षण कर रहीं थीं, तो कुछ ने चुनाव ड्यूटी सूची से नाम कटवाने के लिए गुहार लगाई थी। इनमें कई ऐसी महिला कर्मी थीं, जो तर्क दे रही थीं कि उनके पति भी कर्मचारी हैं और उनकी ड्यूटी लग चुकी है।
कोट
चुनाव ड्यूटी की सूची से नाम कटवाने के लिए आवेदन लेकर पहुंचे कर्मचारियों की सुविधा का ध्यान दिया जा रहा है। महिला कर्मचारियों के मेडिकल सर्टिफिकेट की जांच के लिए चेंबर की आवश्यकता थी, इसलिए उनकी जांच चेंबर में की गई। उसके बाद अन्य लोगों की जांच मीटिंग हाल में की गई। अच्छी व्यवस्था बनाई गई है।
राजमणि वर्मा, डीडीओ, सहायक प्रभारी अधिकारी, कार्मिक
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विकास भवन के रैंप के पास थे सरकारी वाहन, दिव्यांगों को चढ़नी पड़ीं सीढि़यां
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। पांच साल में एक बार आने वाले लोकतंत्र के इस महापर्व में हर कोई प्रतिभाग करना चाहता है, लेकिन कुछ मजबूरियां ऐसी होती हैं, जिनमें विवशता के अलावा कुछ हाथ नहीं लगता। जिन कर्मचारियों की चुनाव ड्यूटी लगी है, उनमें कुछ गंभीर रूप से बीमार हैं, तो कुछ दुर्घटना के शिकार हो गए हैं।
ऐसे लोग मंगलवार को विकास भवन के प्रथम तल स्थित मीटिंग हाल में व्यथा बताने और स्थिति दिखाने पहुंचे थे, ताकि प्रशासन को यह विश्वास हो जाए कि उन्होंने जो आवेदन में लिखा है, वह हकीकत है। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कला संकाय में आयोजित मतदान प्रशिक्षण से लेकर मतदान कर्मियों के मेडिकल सर्टिफिकेट के जांच स्थल विकास भवन तक चलने में अक्षम लोगों को जाना पड़ा। पहले तो विभागों की ओर से प्रशासन को भेजी गई सूची में शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के नाम को शामिल गया, जबकि मेडिकल सर्टिफिकेट की जांच के लिए प्रथम तल का चयन किया गया। इस कारण लोगाें की परेशानियां और बढ़ गईं।
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विकास भवन में मंगलवार को 200 से अधिक लोग चुनाव ड्यूटी कटवाने के लिए अपनी मजबूरियां बताने पहुंचे थे, जिनमें दुर्घटना के शिकार लोगों को चलने में कठिनाई थी। विकास भवन में दिव्यांगों के लिए रैंप बनाए गए हैं, लेकिन लापरवाही के कारण वहां दो सरकारी वाहन खड़े थे। इस कारण शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को सीढि़यां चढ़नी पड़ीं। हालांकि, अंदर पहुंचने पर लिफ्ट से मदद मिली। लोग मीटिंग हाल में बैठे थे, लेकिन दोपहर 1:20 बजे निर्णय हुआ कि डॉक्टर सीडीओ ऑफिस के एक केबिन में जांच करेंगे। उसके बाद लोगों को लाइन में लगना पड़ा।
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इसी लाइन में वॉकर के सहारे खड़े नगर निगम कर्मचारी उमाशंकर ने बताया कि उनकी दुर्घटना हो गई है। उनके पैर में प्लेट पड़ी है, चलने में दिक्कत हो रही है।
गर्मी और उमस से परेशान रहे लोग
चुनाव ड्यूटी के आवेदनों को अग्रसारित करने के लिए कर्मचारियों को सुबह 10 बजे विकास भवन में बुलाया गया, लेकिन डॉक्टर दोपहर 2:00 बजे आए। सुबह से ही लोग एसी मीटिंग हाल में बैठे थे, लेकिन दोपहर 1:20 बजे सभी को यह कहकर बाहर कर दिया गया कि डॉक्टर केबिन में बैठेंगे। इस दौरान लोग गर्मी और उमस से परेशान हो रहे थे। फिर दोपहर 3:00 बजे सभी को एसी हाल में बैठाया गया और वहीं पर सर्टिफिकेट की जांच हुई। यहां मौजूद रिटायर्ड रेलकर्मी ए रमन ने कहा कि यदि वरीयता सूची के आधार पर जांच होती हो गर्मी में बीमार कर्मचारियों की दुर्दशा नहीं होती।
साहब! महसूस करो हमारा दर्द
- विश्वविद्यालय परिसर के कला संकाय भवन परिसर से वॉकर के सहारे बाहर निकल रहीं व्यायाम शिक्षिका सुमन ने बताया कि बच्चों को पीटी कराते हुए वह गिर गईं थीं। उनके घुटने में चोट लगने के कारण ऑपरेशन कराना पड़ा। 18 मई को उनका डेढ़ माह का अवकाश पूरा हुआ है, उसके बाद ग्रीष्म कालीन अवकाश शुरू हो गया है। चुनाव ड्यूटी से बचने के लिए अवकाश नहीं लिया है। इसलिए दिक्कत हो रही है।
- विकास भवन के मीटिंग हाल के बाहर खड़ी बांसगांव की शिक्षिका नीतू शुक्ला ने बताया कि उनका पैर पोलियोग्रस्त है, जिससे ऊंची कुर्सी पर ही बैठ सकती हैं। इस कारण डेढ़ घंटे से खड़ी थीं। यदि मेडिकल सर्टिफिकेट की जांच नीचे होती तो परेशानी कुछ कम होती।
- बाल विकास परियोजना विभाग में कार्यरत मंजू श्रीवास्तव भी व्हील चेयर पर बाहर बैठी थीं। वह ठीक से बोल नहीं पा रही थीं। उनके परिजन ने बताया कि कोई गंभीर बीमार है, जिसमें उनका हाथ-पैर काम नहीं कर रहा है।
- मुर्तुजा हुसैन हायर सेकेंडरी स्कूल घासीकटरा के आलमगीर मीटिंग हाल में बैठने वाली सीट पर लेटे हुए थे। साथ मौजूद एक किशोर के हाथ में उनके मेडिकल सर्टिफिकेट थे। किशोर ने बताया कि उन्हें पैरालाइसिस अटैक हुआ है और 3-4 दिन से तबीयत और बिगड़ गई है।
- गोरखपुर विश्वविद्यालय में कार्यरत विश्व दीपक श्रीवास्तव ने बताया कि शनिवार को उनकी दुर्घटना हो गई थी, प्रशिक्षण ले चुके हैं, लेकिन ऐसी अवस्था में चलने में कठिनाई हो रही है।
- गोरखपुर विश्वविद्यालय में पहुंचे शिक्षा कर्मी एहसान अंसारी ने बताया कि दुर्घटना में उनके हाथ की हड्डी टूट गई है, इसलिए ड्यूटी से नाम कटवाना चाहते हैं।
बच्चों को लेकर पहुंचीं महिला कर्मी
विश्वविद्यालय से विकास भवन तक बच्चों को लेकर महिला कर्मी पहुंचीं। इनमें कुछ महिलाएं बच्चों के साथ प्रशिक्षण कर रहीं थीं, तो कुछ ने चुनाव ड्यूटी सूची से नाम कटवाने के लिए गुहार लगाई थी। इनमें कई ऐसी महिला कर्मी थीं, जो तर्क दे रही थीं कि उनके पति भी कर्मचारी हैं और उनकी ड्यूटी लग चुकी है।
कोट
चुनाव ड्यूटी की सूची से नाम कटवाने के लिए आवेदन लेकर पहुंचे कर्मचारियों की सुविधा का ध्यान दिया जा रहा है। महिला कर्मचारियों के मेडिकल सर्टिफिकेट की जांच के लिए चेंबर की आवश्यकता थी, इसलिए उनकी जांच चेंबर में की गई। उसके बाद अन्य लोगों की जांच मीटिंग हाल में की गई। अच्छी व्यवस्था बनाई गई है।
राजमणि वर्मा, डीडीओ, सहायक प्रभारी अधिकारी, कार्मिक