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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Edible cups come to prevent environmental damage from paper cups and kulhads

Exclusive: चाय की चुस्कियां लीजिए, गपशप कीजिए और कप को गप कर जाइए

Thu, 22 Sep 2022 05:18 PM IST
vivek shukla मान्यता कुशवाहा, गोरखपुर।
मान्यता कुशवाहा, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 22 Sep 2022 05:18 PM IST
सार

 गोरखपुर में आजकल लोग गेहूं, मैदा और मक्के के आटे से विशेष रूप से तैयार इस एडबिल प्याले को चाव से खा रहे हैं। चाय की दुकान पर इस विशेष प्याले में ही चाय की मांग कर रहे हैं। इनकी खासियत है कि इनके इस्तेमाल के बाद फेंकने की झंझट नहीं रहती है।

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Edible cups come to prevent environmental damage from paper cups and kulhads
गोरखपुर समाचार। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

चल यार, कहीं चाय-वाय पीते हैं। अगली बार जब दोस्तों के साथ चाय पर गपशप करने का मूड बने तो ऐसी दुकान पर जाइएगा जहां चाय के साथ ‘वाय’ यानी स्नैक्स भी मुफ्त मिले। अब आप सोचेंगे कि ऐसी दुकान कहां है। तो आपको बता दें कि शहर में चाय की ऐसी तमाम दुकानें हैं जहां चाय ऐसे प्यालों में परोसी जा रही है जिसे आप चुस्कियां लगाने के साथ ही खा भी सकते हैं।

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 सुनने में थोड़ा अटपटा जरूर है मगर, है 100 फीसदी सही। गोरखपुर में आजकल लोग गेहूं, मैदा और मक्के के आटे से विशेष रूप से तैयार इस एडबिल प्याले को चाव से खा रहे हैं। चाय की दुकान पर इस विशेष प्याले में ही चाय की मांग कर रहे हैं। खाने योग्य होने से जहां इस प्याले से कागज और मिट्टी के प्याले की तरह गंदगी और प्रदूषण नहीं फैल रहा। वहीं, लोगों को इसका स्वाद भी खूब भा रहा है।
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इसे ध्यान में रखकर ही प्याले वनीला, इलायची और चॉकलेट समेत कई अन्य फ्लेवर में बनाए जा रहे हैं। इनकी आपूर्ति फिलहाल पुणे से हो रही है। इस प्याले की खासियत यह है कि ये आईसक्रीम कोन से थोड़ा मोटा है। गर्म चाय डालने के बाद भी ये 20-25 मिनट तक गलता नहीं हैं। आमतौर पर जहां, आप चाय के लिए 10 रुपये खर्च करते हैं, इस विशेष कप में चाय पीने के लिए आपको अधिकतम 20 रुपये खर्च करने होंगे।
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Edible cups come to prevent environmental damage from paper cups and kulhads
एडिबल कप। - फोटो : अमर उजाला।

खासकर युवाओं, नौकरीशुदा लोगों की ये धीरे-धीरे पहली पंसद बन रही है। पंत पार्क के बाहर स्थित टीवर्स के नाम से स्टार्ट अप चलाने वाले अवनी त्रिपाठी ने बताया कि उनके स्टाल पर रोजाना 250-300 कप चाय की ब्रिकी होती है। इनमें रोजाना 50 से अधिक कप की डिमांड एडिबल गिलास में की जाती है। इनकी खासियत है कि इनके इस्तेमाल के बाद फेंकने की झंझट नहीं रहती है। जबकि, कुल्हड़ के इस्तेमाल की वजह से गंदगी फैलती है।   संवाद

एक महीना पहले से शुरू हुआ एडबिल कप का चयन
चाय का स्टार्टअप चलाने की वजह से रोजाना 250-300 गिलास फेंकने के लिए के लिए जगह की तलाश करनी पड़ती है। फेंकने के बाद भी गंदगी रह जाती है। वहीं इनके निर्माण में मिट्टी का प्रयोग होता है जो मिट्टी की उर्वरा शक्ति को प्रभावित करता है। जिसके बाद सिद्धार्थनगर विश्वविद्यालय के बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा अवनी ने इंटरनेट पर विकल्प को तलाशा तो उन्हें एडिबल कप नजर आए। इसके बाद उन्होंने इसका इस्तेमाल शुरू किया जो काफी पसंद किया जा रहा है।

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