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सीपीआर: सावित्री ने बार-बार सीने पर सिर पटका..जिंदा हो गए सत्यवान

Tue, 26 Dec 2023 02:18 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 26 Dec 2023 02:18 PM IST
सार

सडेन कार्डियक अरेस्ट के मामले आजकल हर दिन कहीं न कहीं सुनने को मिल जाते हैं। इस बीमारी के बारे में अभी किसी भी जांच से अनुमान लगाना संभव नहीं है। यह बीमारी वैसे तो लंबे समय से है, लेकिन इधर कुछ वर्षों में ऐसे मामले तेजी से बढ़े हैं।

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Dr RP Tripathi explained process of CPR by linking it to story of Savitri Satyavan
सीपीआर की जानकारी देते विशेषज्ञ - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

सावित्री-सत्यवान की कथा तो सबने सुनी है। सावित्री वह महिला थीं, जिन्होंने यमराज से भी अपने पति के प्राणों की रक्षा कर ली थी। यह तो धार्मिक पक्ष है, लेकिन अब इसे चिकित्सकीय पहलू से समझिए। सत्यवान की मौत जंगल से लकड़ी काटकर लौटते वक्त अचानक हो गई थी। मतलब उन्हें सडेन कार्डियक अरेस्ट आया होगा।

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पत्नी सावित्री भी उस वक्त साथ थीं। वह जमीन पर पड़े पति के सीने पर सिर पटककर रोने लगीं। जोर-जोर से सिर पटकने के चलते हृदय पर दबाव पड़ा और धड़कन दोबारा शुरू हो गई। यही सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) है।
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सडेन कार्डियक अरेस्ट के मामले आजकल हर दिन कहीं न कहीं सुनने को मिल जाते हैं। इस बीमारी के बारे में अभी किसी भी जांच से अनुमान लगाना संभव नहीं है। यह बीमारी वैसे तो लंबे समय से है, लेकिन इधर कुछ वर्षों में ऐसे मामले तेजी से बढ़े हैं। यूपी डायबिटीज एसोसिएशन के सेमिनार में फिजिशियन डॉ. आरपी त्रिपाठी ने सीपीआर की प्रक्रिया को सावित्री-सत्यवान की कथा से जोड़ते हुए समझाया।
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उन्होंने बताया कि कोई स्वस्थ दिखने वाला आदमी भी इस बीमारी की चपेट में आ सकता है।सीपीआर देते वक्त हथेली को इतनी जोर से दबाव दिया जाता है कि पसलियों के नीचे छिपे हृदय पर दबाव बने।

 

दरअसल, सडेन कार्डियक अरेस्ट हृदय में तंत्रिका तंत्र की बीमारी है। अक्सर सुनने में आता है कि फलां व्यक्ति पूरी तरह से स्वस्थ थे, अचानक गिरे और मौत हो गई। यह सडेन कार्डियक अरेस्ट है। इस मामले में अचानक हृदय में प्रवाहित होने वाली उर्जा बंद हो जाती है, जिससे हृदय की धड़कन रुक जाती है।

जैसे घर में बिजली का तार टूट जाए और सप्लाई बंद हो जाए तो बल्ब बुझ जाता है, उसी प्रकार सडेन कार्डियक अरेस्ट में हृदय काम करना बंद कर देता है। ऐसे मामलों में अगर अधिकतम 5 मिनट के अंदर प्रभावित व्यक्ति को सीपीआर मिल जाए तो संभव है कि उसके हृदय की धड़कन दोबारा चालू हो जाएगी।

सीपीआर भी एक तरह की प्राथमिक चिकित्सा है। इसके जरिये हृदय पर दबाव बनाया जाता है। जिस तरह एक झटके से हृदय की धड़कन बंद हुई है, उसी प्रकार झटके से ही धड़कन दोबारा शुरू भी हो जाती है।

 

हार्ट अटैक नहीं है सडेन कॉर्डियक अरेस्ट
हार्ट अटैक और सडेन कार्डियक अरेस्ट अलग-अलग मामले हैं। हार्ट अटैक में हृदय की मांसपेशियां पर्याप्त रक्त नहीं मिलने के चलते सूख जाती हैं। ऐसा इसलिए होता है कि हृदय की नलियों में 90-95 प्रतिशत तक वसा जम जाने की वजह से खून का प्रवाह बेहद कम हो जाता है। ऐसे मामलों में पहले स्टंट डालकर वसा वाले स्थान पर नली को चौड़ा किया जाता है, जिससे खून का प्रवाह बढ़ जाए। साथ ही मरीज को रक्त पतला करने वाली दवाएं दी जाती हैं। अगर स्टंट से काम नहीं चलता तो ओपन हार्ट सर्जरी के जरिए दूसरी नलियों से हृदय तक रक्त पहुंचाया जाता है।

इसके विपरीत सडेन कार्डियक अरेस्ट हृदय में होने वाली तंत्रिका तंत्र की बीमारी है। इस बीमारी में हृदय की ऊर्जा अचानक बंद हो जाती है। तीन से पांच मिनट के अंदर अगर हृदय ने दोबारा धड़कना शुरू नहीं किया तो दिमाग तक पहुंचने वाला खून बंद हो जाता है, जिसकी वजह से दिमाग काम करना बंद कर देता है, जिसे ब्रेन डेड कहा जाता है।

सीपीआर के जरिये हृदय की ऊर्जा लाइन को चालू कर दिया जाता है, जिससे रक्त का प्रवाह शुरू हो जाता है। इस प्रक्रिया में एक खास बात यह भी होती है कि हृदय की धड़कन के साथ-साथ सांस की प्रक्रिया को चालू करना होता है, लिहाजा दो बार सीपीआर के बाद एक बार मुंह से ऑक्सीजन भी भरा जाता है, ताकि फेफड़े की क्रियाशीलता भी बनी रहे।

 

कब दें सीपीआर
  • अगर बेहोश हुए व्यक्ति की धड़कन नहीं चल रही है तभी सीपीआर की जरूरत होगी
  • बेहोशी के पांच मिनट के भीतर ही सीपीआर दिया जाना फायदेमंद होता है।
  • सीपीआर देने के बीच-बीच में मुंह से या अंबु बैग से ऑक्सीजन भी दिया जाना जरूरी है।
  • चार से पांच बार सीपीआर के बाद अगर धड़कन वापस आ गई तो यथाशीघ्र मरीज को अस्पताल ले जाएं।

यह है सीपीआर का तरीका
इस प्रक्रिया में बेहोश व्यक्ति के सीने पर बाएं तरफ अपनी हथेली को एक के ऊपर एक रखें और कोहनी को सीधा रखते हुए पूरी ताकत से पंप करें। एक बार में 30 सेकेंड तक जल्दी-जल्दी सीने को दबाएं और छोड़ें। दो बार ऐसा करने के बाद एक बार मरीज के मुंह में मुंह से हवा भरें। फिर दो बार सीपीआर करें और हवा भरें। ऐसा करने पर संभव है कि उस व्यक्ति की धड़कन शुरू हो जाए।

 
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