दरिंदा चितई बर्दाश्त नहीं: बुजुर्ग की हैवानियत से ग्रामीणों में आक्रोश, कहा- सजा ऐसी मिले जो बने नजीर
गणेश मद्धेशिया ने कहा कि आरोपी को कानून से सजा मिले, इसके लिए पुलिस को साक्ष्य के साथ चार्जशीट देना चाहिए। दूसरे, आरोपी के परिवार वालों को पैरवी ही नहीं करना चाहिए। उन्हें पीड़ित बच्ची के परिवार वालों का साथ देना चाहिए।
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साहब! हर घर में बहन-बेटियां हैं। उन्हें एक उम्र के लोगों से तो दूरी बनाने की शिक्षा दी जाती है, लेकिन अब ढलती उम्र में कोई दरिंदगी करेगा, यह सोचकर भी हैरानी होती है। अब दरिंदा चितई तो गांव वालों को एकदम बर्दाश्त नहीं है। ऐसे लोगों को फांसी की सजा देनी चाहिए, ताकि नजीर बने सके।
यह कहना है कि पीपीगंज इलाके के उस गांव के लोगों का, जहां एक किशोरी को बंधक बनाकर 66 साल के चितई निषाद ने न केवल दरिंदगी की, बल्कि सामाजिक रिश्तों का भी कत्ल किया है। गांव के लोगों में गुस्सा है। चितई की नापाक हरकतों ने लोगों को डरा भी दिया है। उनका कहना है कि आरोपी की हरकत क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी है। कई लोगों ने पुलिस से संपर्क कर आरोपी को सख्त सजा दिलाने की भी मांग की है।
आराेपी को कड़ी सजा मिले
कुलदीप सिंह ने कहा कि बुजुर्ग की हरकत से गुस्सा तो आ रहा है, लेकिन सही मानिए तो इस घटना ने डरा भी दिया है। हर घर में बहन-बेटी होती है। अब किस-किस उम्र के लोगों से बच्चों को बचाया जाए। यह घटना सोचने पर मजबूर कर रही है। अब तो बुजुर्ग आदमी को भी देखकर डर लगने लगा है। आरोपी को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
भरोसे का कत्ल किया
संदीप अग्रहरी ने कहा कि यह घटना पूरी तरह से भरोसे का कत्ल है। बच्ची को यह विश्वास ही नहीं होगा कि एक बुजुर्ग ऐसी दरिंदगी कर देगा। उसकी मानसिक कमजोरी का फायदा बुजुर्ग ने उठा लिया। पहली बार तो सुनकर हैरानी हुई, लेकिन बाद में बच्ची के मुंह से उसकी हरकत सुनकर बहुत गुस्सा आ रहा है।
आरोपी को कड़ी सजा मिले
शुभम मिश्रा ने कहा कि ऐसी घटनाएं समाज के लिए ठीक नहीं हैं। बच्ची के साथ हैवानियत कर उसकी जिंदगी तो तबाह कर ही दिया, समाज को भी डराने का काम किया है। ऐसे लोगों से उनके घरवाले भी सुरक्षित नहीं है। आरोपी को कड़ी सजा मिले।
परिवार वालों को देना चाहिए बच्ची का साथ
गणेश मद्धेशिया ने कहा कि आरोपी को कानून से सजा मिले, इसके लिए पुलिस को साक्ष्य के साथ चार्जशीट देना चाहिए। दूसरे, आरोपी के परिवार वालों को पैरवी ही नहीं करना चाहिए। उन्हें पीड़ित बच्ची के परिवार वालों का साथ देना चाहिए। हम लोग भी बच्ची के परिवार की कानूनी मदद में सहयोग करेंगे।