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सीओ जियाउल हक हत्याकांड: बार-बार कोर्ट में घसीट रही बहू, बेटे की शहादत के बाद ससुराल से टूट गया था उसका नाता

Mon, 21 Sep 2026 11:44 AM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, देवरिया
अमर उजाला नेटवर्क, देवरिया Published by: Sharukh Khan Updated Mon, 21 Sep 2026 11:44 AM IST
सार

सीओ जियाउल हक के माता-पिता का कहना है कि बुढ़ापे में सहारा बनने की जगह बहू परवीन बार-बार कोर्ट में घसीट रही है। जियाउल हक की शहादत के बाद उसने ससुराल से नाता तोड़ लिया था। बहू परवीन ने चल-अचल संपत्ति में हिस्सा के लिए केस कर दिया था।

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CO Zia-ul-Haq murder case Instead of being support in their old age Parveen is her in-laws to court
Zia-ul-Haq murder case - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में साल 2013 में मारे गए सीओ जियाउल हक के माता-पिता का दर्द छलका है। उनका कहना है कि बुढ़ापे में लाठी का सहारा बनने के जगह बहू डॉ. परवीन आजाद ने बेटे की शहादत के बाद से ही ससुराल से नाता तोड़ते हुए चल-अचल संपत्ति में हिस्सा के लिए केस कर दिया था। 
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2019 में सिविल कोर्ट से केस खारिज होने के बाद उसने तत्काल जिला जज के यहां केस दाखिल कर दिया। जब लखनऊ पहुंच बहू से ऐसा करने से मना किया गया तो बोली तैयार रहिए सुप्रीम कोर्ट तक घसीटूंगी।
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जियाउल हक के पिता शमशुल हक और माता हाजरा खातून वृद्ध होने के साथ-साथ पैर में दिक्कत होने से चलने-फिरने में समर्थ है। दोनों बीमार भी चल रहे है। दोनों की दवा देवरिया से चलती है। माता-पिता की देखभाल दूसरे नंबर के बेटे शोहराब और उसकी बीबी जैनब खातून उर्फ चांदनी करती है। 

 
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शोहराब की तैनाती इन दिनों गोरखपुर एडीजी ऑफिस में है। वह बीच-बीच में एकाध सप्ताह में घर आता रहता है। पिता शमशुल हक का कहना कि बहू परवीन आजाद बेटे की शहादत के बाद चालीसा में आई और बोलेरो गाड़ी को लेकर चली गई। तबसे वह जुआफर गांव में नहीं आई है। 

 
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इतना जरूर है कि वह बार-बार तारीख पर कोर्ट में बुलाती रहती है। केवल सितंबर में ही 3, 8, 15 को तारीख थी। फिर से अगली तारीख 28 सितंबर को पड़ी है।

जबकि बेटे के शहादत के 16वें दिन ही 18 मार्च 2013 को उसकी लखनऊ में ओएसडी के पद पर तैनाती कर दी गई थी। उससे बार-बार आग्रह करने के बाद भी वह रहम नहीं करती है। दूसरे नंबर का बेटा और बहू सहारा नहीं होते तो हम लोग कबके मर गए होते।

राजा भैया को सीबीआई कोर्ट से राहत
सीओ जियाउल हक हत्याकांड में सीबीआई के विशेष कोर्ट लखनऊ ने शनिवार को जनसत्ता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष व कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया समेत पांच लोगों को बड़ी राहत दी। कोर्ट ने इनके खिलाफ चल रही कार्यवाही रद्द कर दी है। दिवंगत सीओ की पत्नी ने इस प्रकरण में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट का विरोध किया था। साथ ही इस मामले में सभी आरोपियों की भूमिका की दोबारा जांच की मांग की थी।

 

विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतिभा सिंह के कोर्ट ने पर्याप्त कारण न होने का हवाला देते हुए राजा भैया, उनके मीडिया प्रभारी हरिओम श्रीवास्तव, सपा नेता गुलशन यादव, गुड्डू सिंह व रोहित सिंह पर आगे की कार्यवाही समाप्त कर दी। दिवंगत सीओ की पत्नी परवीन आजाद कोर्ट में काेई लिखित और मौखिक साक्ष्य नहीं दे सकीं जिससे आरोपियों पर दोष सिद्ध हो सके।

 

प्रतापगढ़ के हथिगवां थाना क्षेत्र के बलीपुर में दो मार्च 2013 को ग्राम प्रधान नन्हे यादव की हत्या के बाद तत्कालीन सीओ जियाउल हक मौके पर पहुंचे थे। यहां सीओ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में लखनऊ के विशेष सीबीआई कोर्ट ने नौ अक्तूबर 2024 को दस आरोपियों फूलचंद यादव, पवन यादव, मंजीत यादव, घनश्याम सरोज, रामलखन गौतम, छोटेलाल यादव, राम आसरे, पन्नालाल पटेल, शिवराम पासी व जगत बहादुर पटेल को दोषी करार देते हुए उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई थी।

 

उधर, जियाउल हक की पत्नी ने इस प्रकरण में पहले दाखिल सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट का विरोध किया था। उन्होंने राजा भैया समेत अन्य नामजद लोगों की भूमिका की फिर से जांच की मांग रखी थी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। सुप्रीम आदेश के बाद सीबीआई ने अक्तूबर 2023 में मामले की दोबारा जांच शुरू की थी। हत्याकांड में राजा भैया की भूमिका को दोबारा खंगाला गया। इसके बाद सीबीआई ने दिसंबर 2023 में दोबारा क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी थी।
 
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