गोरखपुर: सीएचसी बनेगा मॉडल रूरल हेल्थ रिसर्च यूनिट, हर मरीज का रखा जाएगा ब्योरा
डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि यह प्रदेश की पहली ऐसी सीएचसी होगी, जहां पर वैक्सीन का ट्रॉयल किया जाएगा। इसकी मंजूरी भारत सरकार के औषधि महानियंत्रक (डीजीसीआई) ने दी है।
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गोरखपुर जिले के सहजनवां के ठर्रापार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) को मॉडल रूरल हेल्थ रिसर्च यूनिट (एमआरएचआरयू) बनाया जाएगा। प्रदेश का पहला ऐसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होगा, जिसे एमआरएचआरयू की तर्ज पर विकसित किया जाएगा।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने इसके लिए रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (आरएमआरसी) को नोडल बनाया है। इसके तहत सीएचसी पर स्वास्थ्य सुविधाएं तो बढ़ाई ही जाएंगी साथ ही इलाज के लिए आने वालों की बीमारी का पूरा ब्योरा रखा जाएगा। आरएमआरसी के मीडिया प्रभारी व सीनियर वैज्ञानिक डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि एमआरएचआरयू के तहत सीएचसी में तीन मंजिला भवन बनाए जाएंगे। इसमें ऑपरेशन थियेटर, लेबर रूम, ओपीडी, 50 बेड का वार्ड, पैथालॉजी जांच, रेडियालॉजी जांच (एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड) की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
बताया कि प्रदेश का यह पहला ऐसा सीएचसी होगा, जहां पर इलाज के लिए आने वाले हर मरीज और उसके परिवार में होने वाली बीमारियों का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा। इस काम के लिए सीएचसी पर आरएमआरसी के 15 से 16 स्वास्थ्य कर्मी लगाए जाएंगे। मई माह के दूसरे सप्ताह में इस काम की शुरुआत भी हो जाएगी। आरएमआरसी और स्वास्थ्य विभाग के बीच इसका अनुबंध हो चुका है।
एम्स और बीआरडी के डॉक्टर करेंगे दौरा
डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि सीएचसी पर इलाज के लिए सप्ताह में एक दिन एम्स और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर जाएंगे। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग की टीम भी मरीजों का इलाज करेगी। डॉक्टर मरीजों की जानकारी देंगे, जिसे आरएमआरसी की टीम इकट्ठा करेगी।
सीएचसी पर होगा वैक्सीन का ट्रॉयल
डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि यह प्रदेश की पहली ऐसी सीएचसी होगी, जहां पर वैक्सीन का ट्रॉयल किया जाएगा। इसकी मंजूरी भारत सरकार के औषधि महानियंत्रक (डीजीसीआई) ने दी है। बताया कि आईसीएमआर ने इसके अलावा देश भर के 28 ऐसे अस्पताल संचालित कर रहा है, जिसे एमआरएचआरयू की तर्ज पर विकसित किया गया है।
पांच तरह के होंगे शोध
डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि सीएचसी पर पांच तरह के शोध होंगे। इसमें निमोनिया, इंसेफेलाइटिस, पोषण, टीबी और रिस्पेटरी वायरल संक्रमण शामिल हैं। पूर्वांचल में इन बीमारियों के मरीज भी लगातार मिलते हैं। बताया कि केंद्र को विकसित करने के लिए पांच करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया है। इसमें डेढ़ करोड़ रुपये मिल भी चुके हैं।