यूपी चुनाव 2022: सीएम योगी को मैदान में उतारकर भाजपा ने खेला बड़ा दांव, इनका मजबूत किला है गोरखपुर
गोरखपुर विधानसभा शहर क्षेत्र की सीट 1989 से भाजपा के पास है। रणनीतिक रूप से योगी के लिए यह आसान सीट है। यहां पार्टी को हर बूथ और कार्यकर्ता की जानकारी है।
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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गोरखपुर शहर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनाव मैदान में उतारा है। यह सीट भाजपा का मजबूत किला मानी जाती है। पिछले 32 वर्षों से अधिक समय से इस सीट पर भाजपा का कब्जा रहा है। यही नहीं हर चुनाव में जीत का अंतर भी बढ़ता चला गया है।
दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर शहर लोकसभा क्षेत्र से पांच बार सांसद रह चुके हैं। शहर विधानसभा क्षेत्र इसी संसदीय सीट का हिस्सा है। लिहाजा, एक-एक कार्यकर्ता और बूथ की संरचना की जानकारी उन्हें है।
शहर विधानसभा क्षेत्र 1989 से भाजपा के पास है। 1989 से 2002 तक पूर्व केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री शिव प्रताप शुक्ला विधायक रहे। इसके बाद डॉ आरएमडी अग्रवाल विधायक बन गए। इस बार भाजपा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उम्मीदवार बनाया है। योगी को चुनाव मैदान में उतारकर भाजपा ने बड़ा दांव खेला है। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस के बीच समझौता था।
दोनों पार्टियों के संयुक्त प्रत्याशी के रूप में राणा राहुल सिंह ने चुनाव लड़ा था, लेकिन करारी हार का सामना करना पड़ा था। भाजपा को 60,730 वोटों के अंतर से जीत मिली थी। भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष डॉ धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि गोरखपुर की जनता चाहती थी कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शहर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ें।
इस सीट पर योगी का भी गहरा प्रभाव
शहर विधानसभा सीट पर योगी आदित्यनाथ के प्रभाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2002 के चुनाव में हिंदू महासभा से डॉ आरएमडी अग्रवाल को अपना प्रत्याशी बनाया और जीत हासिल कर ली। दरअसल, यह कदम उन्होंने भाजपा से नाराजगी के बाद उठाया था। डॉ आरएमडी का मुकाबला भाजपा के तत्कालीन कद्दावर नेता व कैबिनेट मंत्री शिव प्रताप शुक्ला से था।
चुनाव के नतीजे आए तो भाजपा प्रत्याशी को करारी हार का सामना करना पड़ा था। हिंदू महासभा के डॉ आरएमडी को जीत मिली थी। हालांकि, कुछ समय बाद डॉ आरएमडी भाजपा में शामिल हो गए। इसके बाद से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर जीतते रहे हैं। वह शहर विधानसभा से लगातार चार बार चुनाव जीते और 20 वर्षों से विधायक हैं।
इसी विधानसभा क्षेत्र के मतदाता, अपने बूथ के पन्ना प्रमुख
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शहर विधानसभा क्षेत्र से ही मतदाता हैं। वह गोरखनाथ स्थित प्राथमिक पाठशाला में वोट डालते हैं। अपने बूथ के पन्ना प्रमुख भी हैं। मंडल अध्यक्ष, शक्ति केंद्र प्रमुख व बूथ स्तरीय कमेटी के संपर्क में रहते हैं।
गोरक्षपीठ का है गहरा प्रभाव
गोरखनाथ मंदिर शहर विधानसभा क्षेत्र में है। इस पर गोरक्षपीठ का गहरा प्रभाव है। महंत योगी आदित्यनाथ गोरक्षपीठाधीश्वर हैं। लिहाजा, समाज का अलग-अलग तबका श्रद्धाभाव से नाम लेता है। पूजनीय मानकर समर्थन देता है। गोरक्षपीठाधीश्वर को राजनीति भी विरासत में मिली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पहले उनके गुरु महंत अवेद्यनाथ चुनाव लड़ते थे। महंत अवेद्यनाथ मानीराम से विधायक चुने गए थे। तब गोरखनाथ मंदिर मानीराम का हिस्सा था। परिसीमन के बाद समीकरण बदल गया। अब ज्यादातर हिस्सा गोरखपुर शहर विधानसभा क्षेत्र में आ गया है। महंत अवेद्यनाथ कई बार सांसद भी रहे थे।
विकास कार्यों का फायदा मिलेगा
विकास के लिहाज से गोरखपुर शहर विधानसभा क्षेत्र में खूब काम हुआ है। एम्स, खाद कारखाना व आरएमआरसी की लैबों का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। शहर की ज्यादातर सड़कें चौड़ी हो गई हैं। फसाड लाइटें शहर की खूबसूरती बढ़ा रही हैं। नौकायन केंद्र का कायाकल्प हो चुका है। वाटर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स का भी लोकार्पण हो गया है। शहर की पहली सिक्स लेन सड़क बन रही है। दूसरी तरफ चिड़ियाघर की सौगात मिल चुकी है। आयुष विश्वविद्यालय का शिलान्यास राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कर चुके हैं।