पनेशिया हॉस्पिटल विवाद: 'मैं सांसद हूं, मुख्यमंत्री के शहर में मेरा मुकदमा क्यों नहीं लिखा जा रहा'
- जातिसूचक गालियां दी गईं, वीडियो में साक्ष्य भी मौजूद फिर भी पुलिस नहीं कर रही कार्रवाई
- पनेशिया हॉस्पिटल का विवाद कोर्ट में सुलझ सकता है पर कानूनी कार्रवाई ना होना बड़ा सवाल
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गोरखपुर छात्रसंघ चौराहे पर स्थित पनेशिया हॉस्पिटल विवाद मामले में भाजपा सांसद कमलेश पासवान ने बुधवार को कहा कि मैं एक सांसद हूं, विधायक रह चुका हूं और मुझे जातिसूचक गालियां देने का वीडियो भी मौजूद है। बावजूद इसके मुझे न्याय नहीं मिल रहा है। मुख्यमंत्री के शहर में तहरीर देने के दो दिन बाद भी मेरा मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। यह कहां तक सही है?
पनेशिया अस्पताल मालिकाना हक को लेकर हुए हंगामे के बाद पत्रकारों से मुखातिब बांसगांव से भाजपा सांसद ने कहा कि सांसद के तौर पर मेरे ऊपर कोई भी व्यक्ति यह आरोप नहीं लगा सकता है कि मैंने किसी का व्यक्तिगत नुकसान किया है। 24 वर्षों के राजनीतिक जीवन में किसी को व्यक्तिगत ठेस तक नहीं पहुंचाई है। जहां तक व्यापार का सवाल है तो पूरी ईमानदारी से करते हैं।
इसके बावजूद हमेशा किसी ना किसी रूप में मेरी राजनीतिक छवि खराब करने की कोशिश की गई। गलत तरीके से बदनाम भी किया गया। पनेशिया में डॉ. प्रमोद सिंह और शेयर होल्डर अनिल सिंह के 65 प्रतिशत शेयर हैं।
पंद्रह साल से डॉ. प्रमोद को जानता हूं।
इस वजह से हॉस्पिटल को सुचारु रूप से चलाने के लिए मदद की। सुनियोजित तरीके से उस दिन विजय पांडेय 40 से 50 लोगों के साथ आए और मुझे जातिसूचक गालियां दी। इसका वीडियो मौजूद है। उन्हें बैठकर बात करने को कहा, मगर वह गालियां देते रहे। वह विवाद करने ही वहां पर आए थे।
सांसद मुकदमे में फंसाने का कर रहे प्रयास: विजय पांडेय
पनेशिया हॉस्पिटल के डायरेक्टर विजय पांडेय ने भी बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस की और कहा कि सांसद कमलेश पासवान गलत तरीके से मुझे मुकदमे में फंसाना चाहते हैं। हम लोग हॉस्पिटल पर मालिकाना हक होने पर गए थे। सांसद के कुछ लोग बीच में आ गए और फिर जाति सूचक गलियां देते हुए वीडियो भी बना लिया। अब तहरीर देकर सांसद फंसाने की कोशिश कर रहे हैं।
साथियों के साथ आए विजय ने कहा कि डॉ. प्रमोद व अन्य ने 65 प्रतिशत शेयर खरीद लिया है। सांसद यह भी मान रहे हैं कि इन दोनों लोगों का केस कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में सांसद को यह पता होना चाहिए कि प्राइवेट कंपनी में डायरेक्टर बनने और शेयर की खरीद बिक्री के लिए कंपनी एक्ट 2013 व कंपनी के बाइलाज में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया होती है।
हॉस्पिटल हड़पने की हड़बड़ी में ना तो न्यायालय का सम्मान किया गया और ना ही कंपनी एक्ट का पालन हुआ। जिला प्रशासन ने सांसद के दबाव में ही कंपनी के संचालन के विवाद को फौजदारी बना दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से न्याय का पूरा भरोसा है। मुख्यमंत्री को दोबारा पूरे मामले से अवगत कराएंगे।
दो मरीज और हुए डिस्चार्ज, छह मरीज अभी भी भर्ती
दो पक्षों में विवाद के कारण सील हुए होप पनेशिया अस्पताल से बुधवार को दो और मरीज डिस्चार्ज कर दिए गए। मौजूदा समय में छह मरीज और अस्पताल में भर्ती है। इनमें पांच आईसीयू वार्ड में भर्ती है। जबकि एक का इमरजेंसी में इलाज चल रहा है। अस्पताल का ओपीडी व अकाउंट कार्यालय को पूरी तरह से सील कर दिया गया है।
सोमवार की रात 12 बजे सील हुआ था पनेशिया अस्पताल
आईसीएयू में भर्ती होने के कारण पांच मरीजों को कहीं और भर्ती नहीं किया गया। परिजन भी इन मरीजों को कहीं और ले जाने के मूड में नहीं हैं। परिजनों का कहना है कोरोना महामारी के बीच मरीजों को कहीं और ले जाना खतरे से खाली नहीं है। इसकी वजह से अस्पताल प्रशासन उनके इलाज की पूरी व्यवस्था कर रहा है।
मरीजों की पूरी देखभाल की जा रही है। डॉक्टर व स्टॉफ उनकी देखरेख व इलाज कर रहे हैं। उनसे कहीं और जाने के लिए कहा गया, लेकिन वे जाने को तैयार नहीं है। जैसे ही वे ठीक होंगे, उन्हें डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।-डॉ. विजय पांडेय, आइसीयू इंचार्ज
मरीजों को कोई दिक्कत न हो, इसलिए अस्पताल को यह सुविधा दी गई है कि उनकी ठीक से देखभाल की जाए। वे ठीक हो जाएं तो उन्हें डिस्चार्ज कर दिया जाए। नई भर्ती पर रोक है।-डॉ. श्रीकांत तिवारी, सीएमओ