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Gorakhpur News: सीसीटीवी से लेकर जल पुलिस तक के प्रस्ताव लंबित, पर्यटन थाना खोलने की तैयारी भी अटकी

Tue, 28 Jul 2026 02:47 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jul 2026 02:47 AM IST
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Authorities remain unmoved even after the Ramgarh Tal accident; safety plan incomplete for three years.
- रामगढ़ताल हादसे के बाद भी नहीं जागे जिम्मेदार, तीन साल से अधूरी सुरक्षा योजना
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- हादसे ने खोली सुरक्षा इंतजामों की पोल, अब लाइसेंस प्रक्रिया और विभागीय तालमेल की होगी जांच

गोरखपुर। रामगढ़ताल में हादसे के बाद व्यवस्था की परतें खुलने लगी हैं। यह बात सामने आया है कि ताल क्षेत्र में सुरक्षा मजबूत करने की योजनाएं लंबे समय से प्रस्तावों और पत्राचार तक सीमित हैं। सीसीटीवी कैमरे, जल पुलिस की तैनाती और पर्यटन थाना शुरू करने जैसे अहम कदम अब तक धरातल पर नहीं उतर सके हैं।
पुलिस प्रशासन और गोरखपुर विकास प्राधिकरण की ओर से हादसे के बाद सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा शुरू कर दी गई है। यह भी जांच की जा रही है कि नौका संचालन के लिए लाइसेंस जारी करते समय सुरक्षा मानकों की कितनी जांच की गई थी। लाइसेंस देने की प्रक्रिया भी जांच के घेरे में है।
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रामगढ़ताल में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर 17 जून को अधिकारियों की बैठक में कई सुझाव सामने आए थे। इसमें ताल क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगाने, पुलिस और जल पुलिस की स्थायी तैनाती व निगरानी व्यवस्था मजबूत करने पर चर्चा हुई थी। इसके बाद सुरक्षा इंतजामों को लेकर संबंधित विभाग की ओर से जीडीए को पत्र भेजकर जरूरी व्यवस्थाएं कराने की मांग की गई लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।
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हादसे के बाद अब वही लंबित प्रस्ताव फिर चर्चा में हैं। इधर, नौका हादसे के बाद अब बोट संचालन की अनुमति और लाइसेंस प्रक्रिया की भी समीक्षा की जा रही है। जांच में यह देखा जाएगा कि संचालकों को लाइसेंस देने से पहले सुरक्षा मानकों, उपकरणों और संचालन संबंधी नियमों का पालन कराया गया था या नहीं। इसके अलावा पुलिस दोनों नौकाओं के चालकों के नशे में होने की भी जांच करेगी।
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जीडीए और पुलिस के बीच तालमेल की परीक्षा
रामगढ़ताल में पर्यटन गतिविधियों की जिम्मेदारी जीडीए के पास है, जबकि सुरक्षा व्यवस्था पुलिस विभाग के जिम्मे है। दोनों विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण कई योजनाएं समय पर लागू नहीं हो सकीं। अब हादसे के बाद यह सवाल अहम हो गया है कि सुरक्षा योजना को लागू करने में देरी के लिए जिम्मेदारी किसकी है। जीडीए उपाध्यक्ष से भी इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने के लिए बातचीत की जाएगी कि लंबित योजनाओं पर अब तक क्या कार्रवाई हुई और आगे की रणनीति क्या होगी। रामगढ़ताल शहर का प्रमुख पर्यटन केंद्र है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को जमीन पर लागू करना सबसे बड़ी चुनौती है। रामगढ़ताल में किशोरी के कूदकर जान देने की घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विस्तृत योजना तैयार की गई थी।

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तीन साल बाद भी नहीं शुरू हुआ पर्यटन थाना
रामगढ़ताल की सुरक्षा को लेकर पर्यटन थाना खोलने की तैयारी भी लंबे समय से चल रही है। व्यवस्था और स्थान को लेकर कवायद होने के बावजूद विभागीय स्तर पर निर्णय नहीं हो सका। इसके चलते पर्यटकों की बढ़ती संख्या के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था पुराने तरीके से ही संचालित हो रही है। वर्तमान व्यवस्था में किसी बड़ी दुर्घटना या आपात स्थिति से निपटने के लिए संसाधनों की कमी महसूस की जा रही है।
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ये इंतजाम होने थे लेकिन अभी अधूरे
- रामगढ़ताल के चारों ओर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने थे।
- पैडलेगंज और नौकायन चौकी से कैमरों की निगरानी की योजना थी।
- पीआरवी वाहनों की संख्या दो से बढ़ाकर चार करने का प्रस्ताव था।
- जल पुलिस चौकी स्थापित कर कर्मचारियों की तैनाती की जानी थी।
- डूबने की घटनाओं से बचाव के लिए पर्याप्त उपकरण उपलब्ध कराने थे।
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