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नियम ताक पर, टेंडर जेब में!: एम्स अफसर पर PMO में शिकायत, जेम पोर्टल को किया बायपास, जांच टीम गठित

Sun, 24 May 2026 10:42 AM IST
Rohit Singh संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Published by: Rohit Singh Updated Sun, 24 May 2026 10:42 AM IST
सार

सूत्रों के अनुसार, एक फर्म का लाइसेंस 19 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रहा था। आईटी प्रभारी ने 19 नवंबर को आधिकारिक नोटशीट के जरिये संबंधित अधिकारी को साइबर खतरों और सेवाओं में संभावित व्यवधान से बचाव के लिए लाइसेंस नवीनीकरण की जानकारी दी थी। 

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AIIMS Gorakhpur Tender Scam: PMO Complaint Filed Against Admin Officer For Favoring Firm, Probe Ordered
गोरखपुर एम्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के प्रशासनिक अधिकारी पर वित्तीय अनियमितता और एम्स के टेंडर में मनमाने तरीके से पक्षपात का आरोप लगा है। इसकी शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय से की गई है। वहां से मामला रेफर किए जाने के बाद एम्स प्रशासन ने टीम गठित कर जांच शुरू करा दी है। प्रशासनिक अधिकारी पर पहले भी कई आरोप लगे हैं।

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शिकायतकर्ता ने आरोप में कहा है कि बिना जेम पोर्टल पर टेंडर अपलोड किए अंतिम तिथि के एक दिन पहले ही अपने चहेती फर्म को आवंटित कर दी गई। यह टेंडर ओपीडी और डेटा सेंटर में लगे फोर्टिगेट फायरवॉल लाइसेंस के नवीनीकरण से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। यह प्रणाली साइबर खतरों से आईटी अवसंरचना की सुरक्षा और अखंडता बनाए रखने में सहायक है।

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आरोप है कि एक प्रशासनिक अधिकारी ने सीवीसी दिशा-निर्देशों, वित्तीय नियमों और खरीद मानदंडों की अनदेखी कर एक विशेष विक्रेता को अनुचित लाभ पहुंचाया। सूत्रों के अनुसार, एक फर्म का लाइसेंस 19 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रहा था। आईटी प्रभारी ने 19 नवंबर को आधिकारिक नोटशीट के जरिये संबंधित अधिकारी को साइबर खतरों और सेवाओं में संभावित व्यवधान से बचाव के लिए लाइसेंस नवीनीकरण की जानकारी दी थी।

आईटी सेल ने जेम पोर्टल पर बिड के माध्यम से दो साल के लिए लाइसेंस खरीदने का स्पष्ट प्रस्ताव दिया था। आरोप है कि जानबूझकर जेम बिड प्रक्रिया को लगभग 30 दिनों तक विलंबित किया गया। निविदा की समाप्ति तिथि पहले से ज्ञात थी, फिर भी नई निविदा समय पर शुरू नहीं की गई और इसके बजाय अंतिम समय में तात्कालिकता का हवाला देते हुए समय सीमा में विस्तार दिया गया, जिससे प्रतिस्पर्धा प्रक्रिया प्रभावित हुई।

आईटी और टेंडर की जांच करेंगी डॉक्टर
शिकायकर्ता ने आरोप लगाया कि यह वित्तीय और तकनीकी लापरवाही का मामला है। इसमें किसी आईटी विशेषज्ञ से जांच करवाने की जगह असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आरानी दास को जांच सौंपी गई है। 15 मई को जांच का आदेश जारी हुआ लेकिन अभी तक शुरू नहीं हो सकी है।

शिकायतों के आधार पर टीमें गठित करके जांच करवाई जाती हैं। जो तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी: डॉ विभा दत्ता, कार्यकारी निदेशक, एम्स
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