बदल रहा है गोरखपुर: वाराणसी रूट पर चलेगी वंदेभारत, अगले साल तक पूरी हो जाएगी लाइन
पूर्वोत्तर रेलवे सीपीआरओ पंकज कुमार सिंह ने कहा कि अंतरिम बजट में भटनी-औंड़िहार के लिए भी बजट आवंटित हुआ है। इस रूट के दोहरीकरण से वाराणसी और प्रयागराज की तरफ आने-जाने वाली ट्रेनों के संचालन में सुविधा होगी।
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अगले साल से ट्रेन से बनारस जाना और भी आसान हो जाएगा। इस रूट पर भटनी से औंड़िहार के बीच 125 किमी ट्रैक का दोहरीकरण कार्य चल रहा है। कार्य को समय से पूरा कराने के लिए अंतरिम बजट में 150 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। नया ट्रैक बनने के साथ ही इस रूट पर वंदेभारत एक्सप्रेस के चलने का रास्ता भी साफ हो जाएगा।
गोरखपुर से वाराणसी रूट बहुत व्यस्त है। इस रूट से प्रयागराज के रास्ते मुंबई व अन्य बड़े शहरों के लिए कई प्रमुख ट्रेनों का संचालन होता है। इसके अलावा यह रूट पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण भारत को भी गोरखपुर से जोड़ता है। इस रूट पर गोरखपुर से भटनी होते हुए छपरा तक दोहरीकरण का कार्य हो चुका है, लेकिन भटनी से औंड़िहार के बीच 125 किलोमीटर लंबी लाइन अभी सिंगल ही है।
हालांकि, इस पर भी टुकड़े-टुकड़े में दोहरीकरण का कार्य हो रहा है। इस बार के अंतरिम रेल बजट में भटनी-औंड़िहार रूट पर दोहरीकरण के लिए 150 करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं। इससे इस ट्रैक पर अवशेष पड़े कार्यों को तेजी से पूरा कराने में मदद मिलेगी।
नए ट्रैक पर 130 किमी की अधिकतम रफ्तार से ट्रेनें चल सकेंगी। नए ट्रैक के बन जाने पर गोरखपुर से वाराणसी के बीच वंदेभारत के चलने की संभावना भी बढ़ जाएगी। अभी ट्रैक की वजह से इस ट्रेन के संचालन का मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इसके अलावा अन्य ट्रेनों के संचालन समय में सुधार आएगा।
सहजनवां-दोहरीघाट का जल्द शुरू होगा कार्य
गोरखपुर को वाराणसी से जोड़ने के लिए बन रहे दूसरे प्रमुख रूट सहजनवां-दोहरीघाट के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी आई है। यह रूट जिले के दक्षिणी हिस्से को मऊ जनपद के रास्ते भटनी-औंड़िहार मुख्य मार्ग से जोड़ेगी। इस नए रेल मार्ग के किनारे ही धुरियापार में औद्योगिक क्षेत्र विकसित होना है, जहां अदाणी समेत कई बड़ी कंपनियां निवेश की तैयारी में हैं।
इस रूट पर प्रथम चरण में सहजनवां की तरफ से काम शुरू होना है। इसके लिए कार्यदायी एजेंसी नामित करने के साथ ही जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। जिन किसानों की जमीनें अधिग्रहित की जानी है, उन्हें नोटिस भेजकर आपत्ति मांगी गई है। आपत्तियों के निस्तारण के बाद मुआवजा वितरण व जमीन अधिग्रहण का कार्य एक साथ शुरू हो जाएगा। संभावना है कि मार्च के अंत में कार्य आरंभ करा दिया जाएगा।
कैंट-वाल्मीकिनगर के लिए एजेंसी तय नहीं
करीब 95 किलोमीटर लंबे कैंट-वाल्मीकिनगर खंड के दोहरीकरण का कार्य शुरू होने में अभी कुछ वक्त लगेगा। क्योंकि अभी इस रूट के लिए कार्यदायी एजेंसी नामित नहीं हो पाई है। हालांकि रेलवे के अफसरों का दावा है कि इसी महीने एजेंसी तय कर कार्य आरंभ कराया जाएगा। गोरखपुर-नरकटियागंज रूट के इस हिस्से का दोहरीकरण पूरा होने से बिहार की तरफ से आने-जाने वाली ट्रेनों का संचालन आसान होगा। इस रूट पर सप्तक्रांति, सत्याग्रह और बापूधाम समेत 35 ट्रेनों का संचालन होता है।
पूर्वोत्तर रेलवे सीपीआरओ पंकज कुमार सिंह ने कहा कि अंतरिम बजट में भटनी-औंड़िहार के लिए भी बजट आवंटित हुआ है। इस रूट के दोहरीकरण से वाराणसी और प्रयागराज की तरफ आने-जाने वाली ट्रेनों के संचालन में सुविधा होगी। एनईआर के सभी प्रमुख रूटों पर सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं।