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ABVP हंगामा: बिना पहचान पत्र गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर-छात्रावास में नहीं मिलेगा प्रवेश

Fri, 14 Jul 2023 02:15 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 14 Jul 2023 02:15 PM IST
सार

विश्वविद्यालय परिसर व छात्रावास में बिना पहचान पत्र के विद्यार्थी, शिक्षक तथा कर्मचारी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। जिनके पास पहचान पत्र नहीं है वो नियंता कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं।

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ABVP ruckus Without identity card entry will not be available in Gorakhpur University campus hostel
DDU Gorakhpur - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोरखपुर विश्वविद्यालय के मुख्य नियंता डॉ. सत्यपाल सिंह ने कहा कि मुख्य द्वार पर हंगामा करने वाले अन्य छात्रों को चिह्नित किया जा रहा है। कुछ बाहरी लोग विवि के शैक्षणिक वातावरण को खराब करना चाहते हैं। उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। विश्वविद्यालय परिसर व छात्रावास में बिना पहचान पत्र के विद्यार्थी, शिक्षक तथा कर्मचारी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। जिनके पास पहचान पत्र नहीं है वो नियंता कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं।

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कुलपति के अहंकार पर फूटा है छात्रों का गुस्सा
गुआक्टा गुआक्टा के अध्यक्ष प्रो. केडी तिवारी एवं महामंत्री प्रो. धीरेंद्र सिंह ने कहा कि गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश सिंह के अहंकार के विरोध में छात्रों का गुस्सा नियंता मंडल पर फूटा है। कुलपति के व्यवहार से छात्र, अभिभावक, विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के शिक्षक व कर्मचारी, संविदा कर्मचारी सब दुखी हैं। उन्होंने एबीवीपी कार्यकर्ताओं के आंदोलन का समर्थन करते हुए भविष्य में उनके साथ सहभागिता का भी करेगा।
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मुख्य नियंता से मारपीट निंदनीय- शिवशंकर गोंड

समाजवादी छात्रसभा के नेता शिवशंकर गोंड ने एबीवीपी के कार्यकर्ताओं के द्वारा मुख्य नियंता से मारपीट की घटना की निंदा की है। उन्होंने कहा कि ज्ञान, शील, एकता की बात करने वाली विद्यार्थी परिषद ने गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षक व चीफ प्रॉक्टर से मारपीट कर के अपनी गुंडई चेहरा दिखाया है, यह अमर्यादित है।

विवि के तानाशाही रवैये के खिलाफ जारी रहेगा आंदोलन- अनुराग मिश्रा

एबीवीपी के प्रांत मीडिया संयोजक अनुराग मिश्रा ने संगठन का मत रखते हुए कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन के तानाशाही रवैये के खिलाफ चलाया जा रहा आंदोलन समस्याओं के समाधान तक जारी रहेगा। विवि प्रशासन के तानाशाही रवैये की चपेट में छात्र, शिक्षक और कर्मचारी सब हैं। एबीवीपी शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहे सभी वर्गो के अधिकारों की लड़ाई लड़ती रहेगी।

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एबीवीपी ने विश्वविद्यालय से मांगा है इन सवालों का जवाब
-छह माह में करा ली जाने वाली प्री पीएचडी परीक्षा दो साल बाद क्यों हुई?
- सत्र 2018- 19 के छात्रों का लगभग 4 वर्ष पूरा होने जा रहा है अभी तक एक भी छात्र का शोध प्रबंध जमा क्यों नहीं हुआ?
-शोध जमा करने का शुल्क साढ़े तीन हजार से बढ़ाकर दस हजार रुपया करना क्या आपके छात्र विरोधी मानसिकता को नहीं दर्शाता है?
-35500 रूपया प्रति सेमेस्टर पार्ट टाइम पीएचडी का शुल्क रखना क्या शोध का व्यापार नहीं है? इतने भारी शुल्क निर्धारण के पीछे का आधार क्या है?
-विश्वविद्यालय को शिक्षा का केंद्र बनाने के बजाय धनादोहन का केंद्र बनाना क्या दीनदयाल जी के विचारों की हत्या नहीं है?

पूरे मामले में बैकफुुट पर दिखी पुलिस
एबीवीपी के कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन की सूचना पर विवि चौकी इंचार्ज अमित चौधरी पुलिस बल के साथ मुख्य द्वार पर मौजूद थे। नियंता मंडल के सदस्य पर छात्र हमलावर हुए तो पुलिस आगे बढ़ी लेकिन उग्र रूप देख पीछे हो गई। पुलिस को बैकफुट पर देख नियंता मंडल के सदस्यों ने भी पीछे हो लिए। हाथापाई की सूचना पर कैंट इंस्पेक्टर भी पहुंच गए लेकिन वह भी छात्रों के पास तक नहीं गए।

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