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अभ्युदय कोचिंग में पढ़ाएंगे गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षक, कमिश्नर की पहल तैयार की जा रही सूची

Sat, 27 Feb 2021 04:24 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Sat, 27 Feb 2021 04:24 PM IST
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abhudya coaching and university teacher
फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला।
मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग में अब दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षक भी पढ़ाएंगे। ये शिक्षक ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही तरीकों से विद्यार्थियों से रूबरू होंगे। इसकी रूपरेखा बनने लगी है। कमिश्नर की पहल पर कोचिंग देने वाले शिक्षकों की सूची तैयार की जा रही है।
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जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री ने अभ्युदय कोचिंग में उच्च गुणवत्ता की तैयारी कराने के लिए सभी कमिश्नरी में क्वालिटी टीचर का डेटा बेस तैयार करने का निर्देश दिया है। इसी क्रम में यह तैयारी शुरू की गई है। अभ्यर्थियों को अभी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी ही पढ़ा रहे रहे हैं। कामकाज की व्यस्तता के चलते प्रशासनिक अधिकारियों के लिए कोचिंग को लंबे समय तक, नियमित समय देना क्या संभव हो पाएगा ? प्रशासनिक महकमे में इन दिनों, यह लाख टके का सवाल है ऐसे में कमिश्नर जयंत नार्लिकर ने कुलपति प्रो. राजेश सिंह से वार्ता कर कोचिंग से शिक्षकों को जोड़ने की पहल की है। जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कवायद शुरू की है।
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अभ्युदय कोचिंग को विश्वविद्यालय के शिक्षक सपोर्ट करेंगे। कोचिंग देने वाले शिक्षकों की सूची तैयार की जा रही है। हमें हर विषय को ध्यान में रखकर शिक्षकों का चयन करना है। इसे बाकायदा विश्वविद्यालय के विद्या परिषद में प्रस्ताव रखकर पास कराया जाएगा। कोचिंग देने वाले शिक्षकों के लिए बजट भी होगा। - प्रो. राजेश सिंह, कुलपति, गोरखपुर विश्वविद्यालय
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विश्वविद्यालय के जिम्मे होगी अभ्युदय कोचिंग
अभ्युदय कोचिंग चलाने की जिम्मेदारी फिलहाल प्रशासनिक अधिकारियों के जिम्मे है। मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट है, लिहाजा सभी प्रशासनिक अधिकारी कोचिंग के संचालन में जुटे हैं। जानकारों को कहना है कि भले ही अधिकारी कितनी गंभीरता बरतें, मगर यह सब लंबे समय तक संभव नहीं है।


यह बात शासन और प्रशासन से जुड़े अधिकारी भली प्रकार समझ रहे हैं। अंदरखाने इसके विकल्प तलाशने की कोशिशें भी शुरू हो चुकी हैं। जिस तरह से विश्वविद्यालय को योग्य टीचरों को मुहैया कराने की जिम्मेदारी दी गई है, उसी तरह देर-सबेर कोचिंग के संचालन की जिम्मेदारी भी विश्वविद्यालय के जिम्मे आ सकती है।
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