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Gorakhpur News: आक्रामक कुत्तों की पहचान अब माइक्रोचिप से, नगर निगम ने चौथी बार निकाला टेंडर
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गोरखपुर। महानगर में बढ़ती आवारा कुत्तों की संख्या और उनके आक्रामक व्यवहार से लोगों की बढ़ती परेशानी के बीच नगर निगम अब कुत्तों के प्रबंधन में तकनीक का इस्तेमाल करेगा। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में आक्रामक निराश्रित कुत्तों में माइक्रोचिप लगाने के लिए नगर निगम ने चौथी बार निविदा जारी की है। आगामी 14 अगस्त तक फर्म को जिम्मेदारी मिल जाएगी।
माइक्रोचिप लगने के बाद प्रत्येक कुत्ते की विशिष्ट पहचान तैयार होगी। उसका पूरा डिजिटल ब्योरा नगर निगम के पास उपलब्ध रहेगा। इसमें कुत्ते की नसबंदी, रेबीज टीकाकरण, स्वास्थ्य और व्यवहार से जुड़ी जानकारी दर्ज की जाएगी। इससे आवारा कुत्तों की पहचान और प्रबंधन के साथ ही पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम को भी बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी। इसके लिए निविदा निकाली गई है। इससे पहले तीन बार निविदा जारी होने के बावजूद किसी फर्म ने आवेदन नहीं किया।
दोबारा नसबंदी से भी मिलेगी निजात
माइक्रोचिप के माध्यम से यह आसानी से पता लगाया जा सकेगा कि किसी कुत्ते की नसबंदी और टीकाकरण पहले हो चुका है या नहीं। इससे बिना नसबंदी वाले कुत्तों की पहचान भी आसानी से हो सकेगी। आक्रामक कुत्तों के व्यवहार का रिकॉर्ड तैयार होने से उन इलाकों को चिह्नित करने में भी मदद मिलेगी, जहां कुत्तों के काटने की घटनाएं अधिक होती हैं।
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पालतू कुत्ते सड़क पर छोड़े तो होगी मालिक की पहचान
महानगर के कई मोहल्लों में कुत्तों के झुंड से लोगों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। सुबह और रात के समय कई इलाकों में सड़क पर निकलना जोखिम भरा हो गया है। पशु कल्याण अधिकारी डॉ. रोबिन चंद्रा ने बताया कि डिजिटल ब्योरा तैयार होने से आवारा कुत्तों की संख्या, स्वास्थ्य और व्यवहार की जानकारी व्यवस्थित रूप से उपलब्ध होगी। इससे भोजन, दवा और आश्रय जैसी सुविधाओं की बेहतर योजना बनाने में भी मदद मिलेगी। कई बार लोग पालतू कुत्तों को भी सड़क पर छोड़ देते हैं। माइक्रोचिप आधारित पहचान व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे कुत्तों के मालिक की पहचान कर उन्हें जवाबदेह बनाने में मदद मिलेगी।
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माइक्रोचिप लगने के बाद प्रत्येक कुत्ते की विशिष्ट पहचान तैयार होगी। उसका पूरा डिजिटल ब्योरा नगर निगम के पास उपलब्ध रहेगा। इसमें कुत्ते की नसबंदी, रेबीज टीकाकरण, स्वास्थ्य और व्यवहार से जुड़ी जानकारी दर्ज की जाएगी। इससे आवारा कुत्तों की पहचान और प्रबंधन के साथ ही पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम को भी बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी। इसके लिए निविदा निकाली गई है। इससे पहले तीन बार निविदा जारी होने के बावजूद किसी फर्म ने आवेदन नहीं किया।
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दोबारा नसबंदी से भी मिलेगी निजात
माइक्रोचिप के माध्यम से यह आसानी से पता लगाया जा सकेगा कि किसी कुत्ते की नसबंदी और टीकाकरण पहले हो चुका है या नहीं। इससे बिना नसबंदी वाले कुत्तों की पहचान भी आसानी से हो सकेगी। आक्रामक कुत्तों के व्यवहार का रिकॉर्ड तैयार होने से उन इलाकों को चिह्नित करने में भी मदद मिलेगी, जहां कुत्तों के काटने की घटनाएं अधिक होती हैं।
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पालतू कुत्ते सड़क पर छोड़े तो होगी मालिक की पहचान
महानगर के कई मोहल्लों में कुत्तों के झुंड से लोगों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। सुबह और रात के समय कई इलाकों में सड़क पर निकलना जोखिम भरा हो गया है। पशु कल्याण अधिकारी डॉ. रोबिन चंद्रा ने बताया कि डिजिटल ब्योरा तैयार होने से आवारा कुत्तों की संख्या, स्वास्थ्य और व्यवहार की जानकारी व्यवस्थित रूप से उपलब्ध होगी। इससे भोजन, दवा और आश्रय जैसी सुविधाओं की बेहतर योजना बनाने में भी मदद मिलेगी। कई बार लोग पालतू कुत्तों को भी सड़क पर छोड़ देते हैं। माइक्रोचिप आधारित पहचान व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे कुत्तों के मालिक की पहचान कर उन्हें जवाबदेह बनाने में मदद मिलेगी।