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गोरखपुर: 40 हजार उपभोक्ता 176 करोड़ की बिजली इस्तेमाल कर लापता, जांच में जुटा विभाग
Tue, 27 Jul 2021 10:56 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 27 Jul 2021 10:56 AM IST
सार
चालीस हजार ऐसे कनेक्शन हैं, जिनपर पते में सिर्फ गोरखपुर लिखा है। कुछ ऐसे हैं जिनपर पता तो लिखा है, लेकिन कनेक्शन जिस नाम पर है उस नाम का कोई व्यक्ति नहीं है। ऐसे में बिल तो प्रत्येक महीने बनाया जा रहा है, लेकिन जमा नहीं कराया जा रहा है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
गोरखपुर जिले के शहरी क्षेत्र के 40 हजार उपभोक्ता 176 करोड़ रुपये की बिजली का इस्तेमाल करने के बाद लापता हो गए हैं। ऐसे उपभोक्ताओं को नान ट्रेसेबल कनेक्शन मानकर निगम उनकी तलाश करेगा। इसके लिए प्रत्येक महीने मीटर रीडरों को बीट का आवंटन किया जाएगा। रीडर एक बीट में लगे ट्रांसफार्मर से जुड़े प्रत्येक घर जाकर उनका बिजली बिल चेक करेगा। इसके बाद डाटा और भौतिक सर्वे का मिलान किया जाएगा।
अधीक्षण अभियंता शहरी यूसी वर्मा ने बताया कि चालीस हजार ऐसे कनेक्शन हैं, जिनपर पते में सिर्फ गोरखपुर लिखा है। कुछ ऐसे हैं जिनपर पता तो लिखा है, लेकिन कनेक्शन जिस नाम पर है उस नाम का कोई व्यक्ति नहीं है। ऐसे में बिल तो प्रत्येक महीने बनाया जा रहा है, लेकिन जमा नहीं कराया जा रहा है। अब नई व्यवस्था के तहत सर्वे करके इन उपभोक्ताओं का पता लगाया जाएगा।
बिजली घर व फीडर के एक ट्रांसफार्मर से निकलने वाली एलटी लाइन से जुड़े उपभोक्ताओं के मीटर से रीडिंग लेकर बिल बनाने के बाद से दूसरे ट्रांसफार्मर से जुड़े उपभोक्ताओं की रीडिंग लेंगे। नई व्यवस्था के लिए ट्रांसफार्मर वार डेटा तैयार किया गया है। पोर्टल पर ट्रांसफार्मरवार डेटा अपलोड करने को भेज दिया गया है। अगस्त में बिलिंग नई व्यवस्था से होगी। इससे होगा यह कि एक ट्रांसफार्मर से जुड़े सभी उपभोक्ताओं की बिलिंग के दौरान जिन उपभोक्ताओं का डेटा पोर्टल पर नहीं मिलेगा उसे नान ट्रेसेबल श्रेणी में माना जाएगा। उसकी सूचना मीटर रीडर क्षेत्र के अभियंताओं को देंगे। अभियंता उनकी रीडिंग लेकर बिल बनाकर पोर्टल पर फीड करेंगे।
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सूची तैयार होने के बाद अगर उपभोक्ता का पता लग गया तो उससे बकाएदारी वसूली जाएगी। इसके अलावा कनेक्शन जारी होने की तिथि देखी जाएगी। इस आधार पर रिपोर्ट बनाई जाएगी कि आखिर ऐसे पते पर जिस पर उपभोक्ता को खोजना मुश्किल था, बिना भौतिक परीक्षण किए कनेक्शन कैसे जारी किया गया। इस आधार पर रिपोर्ट तैयार करके आला अधिकारी को भेजी जाएगी।
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अधीक्षण अभियंता शहरी यूसी वर्मा ने बताया कि चालीस हजार ऐसे कनेक्शन हैं, जिनपर पते में सिर्फ गोरखपुर लिखा है। कुछ ऐसे हैं जिनपर पता तो लिखा है, लेकिन कनेक्शन जिस नाम पर है उस नाम का कोई व्यक्ति नहीं है। ऐसे में बिल तो प्रत्येक महीने बनाया जा रहा है, लेकिन जमा नहीं कराया जा रहा है। अब नई व्यवस्था के तहत सर्वे करके इन उपभोक्ताओं का पता लगाया जाएगा।
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बिजली घर व फीडर के एक ट्रांसफार्मर से निकलने वाली एलटी लाइन से जुड़े उपभोक्ताओं के मीटर से रीडिंग लेकर बिल बनाने के बाद से दूसरे ट्रांसफार्मर से जुड़े उपभोक्ताओं की रीडिंग लेंगे। नई व्यवस्था के लिए ट्रांसफार्मर वार डेटा तैयार किया गया है। पोर्टल पर ट्रांसफार्मरवार डेटा अपलोड करने को भेज दिया गया है। अगस्त में बिलिंग नई व्यवस्था से होगी। इससे होगा यह कि एक ट्रांसफार्मर से जुड़े सभी उपभोक्ताओं की बिलिंग के दौरान जिन उपभोक्ताओं का डेटा पोर्टल पर नहीं मिलेगा उसे नान ट्रेसेबल श्रेणी में माना जाएगा। उसकी सूचना मीटर रीडर क्षेत्र के अभियंताओं को देंगे। अभियंता उनकी रीडिंग लेकर बिल बनाकर पोर्टल पर फीड करेंगे।
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सूची तैयार होने के बाद अगर उपभोक्ता का पता लग गया तो उससे बकाएदारी वसूली जाएगी। इसके अलावा कनेक्शन जारी होने की तिथि देखी जाएगी। इस आधार पर रिपोर्ट बनाई जाएगी कि आखिर ऐसे पते पर जिस पर उपभोक्ता को खोजना मुश्किल था, बिना भौतिक परीक्षण किए कनेक्शन कैसे जारी किया गया। इस आधार पर रिपोर्ट तैयार करके आला अधिकारी को भेजी जाएगी।