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बुढ़वा मंगल 28 को, गोरखनाथ मंदिर में उमड़ेंगे श्रद्धालु, मेले का भी उठाएंगे आनंद
Wed, 22 Jan 2020 10:10 PM IST
विजय जैन
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: विजय जैन
Updated Wed, 22 Jan 2020 10:10 PM IST
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फाइल फोटो।
- फोटो : राजेश कुमार
बुढ़वा मंगल का पर्व परंपरागत रूप से 28 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन महायोगी बाबा गोरखनाथ को ब्रह्म मुहूर्त से खिचड़ी चढ़ाई जाएगी। सुबह 4 बजे से बाबा को खिचड़ी चढ़ाए जाने का क्रम शुरू होगा जो पूरे दिन चलेगा।
गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ ने बताया कि मान्यता है कि बुढ़वा मंगल के दिन श्रद्धालुओं द्वारा खिचड़ी चढ़ाना उतना ही पुण्यकारी होता है जितना मकर संक्रांति के दिन। कालांतर से बुढ़वा मंगल की परंपरा चली आ रही है। इस दिन दूर दराज से श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। गोरखनाथ बाबा को खिचड़ी चढ़ाते हैं। ऐसे श्रद्धालु जो मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी नहीं चढ़ा पाते वह बुढ़वा मंगल के दिन का खिचड़ी चढ़ाने के लिए इंतजार करते हैं। देश के विभिन्न राज्यों के अलावा नेपाल से आए श्रद्धालु भी इस दिन बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ा दर्शन एवं पूजन कर पुण्य कमाते हैं।
शहरी लोगों की होती है अधिक भीड़
मकर संक्रांति के दिन से शुरू होने वाला खिचड़ी मेला लगभग एक महीने तक रहता है। मकर संक्रांति के दिन बाबा को खिचड़ी चढ़ाने वालों में ग्रामीण सहित अन्य जिलों के लोगों की अधिक भीड़ होती है लेकिन बुढ़वा मंगल के दिन बाबा को खिचड़ी चढ़ाने वालों में शहरी क्षेत्र के लोगों की संख्या अधिक होती है।
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मेले का उठाएंगे आनंद
मंदिर में आने वाले श्रद्धालु बाबा को खिचड़ी चढ़ाने एवं दर्शन-पूजन के बाद मंदिर परिसर में लगे मेले का भी आनंद उठाएंगे। मेला परिसर में मनोरंजन के साथ श्रद्धालु जरूरत सामानों की दुकानों से खरीदारी भी कर सकेंगे।
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गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ ने बताया कि मान्यता है कि बुढ़वा मंगल के दिन श्रद्धालुओं द्वारा खिचड़ी चढ़ाना उतना ही पुण्यकारी होता है जितना मकर संक्रांति के दिन। कालांतर से बुढ़वा मंगल की परंपरा चली आ रही है। इस दिन दूर दराज से श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। गोरखनाथ बाबा को खिचड़ी चढ़ाते हैं। ऐसे श्रद्धालु जो मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी नहीं चढ़ा पाते वह बुढ़वा मंगल के दिन का खिचड़ी चढ़ाने के लिए इंतजार करते हैं। देश के विभिन्न राज्यों के अलावा नेपाल से आए श्रद्धालु भी इस दिन बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ा दर्शन एवं पूजन कर पुण्य कमाते हैं।
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शहरी लोगों की होती है अधिक भीड़
मकर संक्रांति के दिन से शुरू होने वाला खिचड़ी मेला लगभग एक महीने तक रहता है। मकर संक्रांति के दिन बाबा को खिचड़ी चढ़ाने वालों में ग्रामीण सहित अन्य जिलों के लोगों की अधिक भीड़ होती है लेकिन बुढ़वा मंगल के दिन बाबा को खिचड़ी चढ़ाने वालों में शहरी क्षेत्र के लोगों की संख्या अधिक होती है।
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मेले का उठाएंगे आनंद
मंदिर में आने वाले श्रद्धालु बाबा को खिचड़ी चढ़ाने एवं दर्शन-पूजन के बाद मंदिर परिसर में लगे मेले का भी आनंद उठाएंगे। मेला परिसर में मनोरंजन के साथ श्रद्धालु जरूरत सामानों की दुकानों से खरीदारी भी कर सकेंगे।