सुविधा: एक क्लिक पर ऑनलाइन मिलेंगी 24 हजार पुस्तकें, किताबों को पूरा ब्योरा सामने होगा
- राजकीय जुबिली पुस्तकालय में किताबों के डिजिटलीकरण का काम अंतिम दौर में
- लॉकडाउन खुलने के बाद विद्यार्थियों को मिलने लगेगी सुविधा
- ई-मेल से जाएगा लिंक, किताबों को पूरा ब्योरा सामने होगा
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विस्तार
राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज में शीघ्र ही पुस्तकें ऑनलाइन उपलब्ध हो जाएंगी। पंजीकृत लोगों को ई-मेल से लिंक दिया जाएगा, जिसे क्लिक करने पर 24 हजार पुस्तकों का ब्योरा उनके मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन पर होगा। इसका सबसे ज्यादा फायदा मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत पंजीकृत विद्यार्थियों को होगा। उनके लिए भी पुस्तकें खरीदी गईं हैं जिसका ब्योरा वे घर बैठे मोबाइल पर देख सकेंगे।
लॉकडाउन के चलते अभी पुस्तकों के आवंटन की प्रक्रिया बंद है। वाचनालय में भी ताला लगा हुआ है। लेकिन पुस्तकालय प्रशासन अपनी तैयारी में जुटा हुआ है कि जब भी पुस्तकों का रजिस्ट्रेशन हो और उन्हें पुस्तकें आवंटित की जाए तो ब्योरा ऑनलाइन मिले। पुस्तकों के डिजिटलीकरण का काम करीब 90 फीसदी पूरा हो गया है। इसके लिए चार कर्मचारी लगाए गए हैं, जो वर्क फ्रॉम होम के तहत काम कर रहे हैं।
350 विद्यार्थी पंजीकृत हैं अभ्युदय योजना में
मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले 350 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इन विद्यार्थियों के लिए पुस्तकों की व्यवस्था तो की ही गई है इनके पढ़ने के लिए वातानुकूलित दो हाल में व्यवस्था की गई है। एक बार में 100 विद्यार्थी बैठकर पढ़ाई कर सकते हैं।
हर तरह की हैं पुस्तकें
यह भी जानें
- कोई भी व्यक्ति पुस्तकालय का सदस्य बन सकता है
- 15 दिन के लिए मिलती हैं अधिकतम दो पुस्तकें
- जमा न करने पर रोजाना दो रुपये विलंब शुल्क देना होगा
- वाचनालय में पढ़ने के लिए दो घंटे का समय मिलेगा
कार्ड बनवाने के लिए जरूरी
- पासपोर्ट साइज की एक फोटो
- टिकट साइज की दो फोटो
- आधार कार्ड की छायाप्रति
- पांच सौ रुपये धरोहर राशि।
कोरोना काल में तैयारी हुई है प्रभावित
मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत पंजीकृत विद्यार्थियों के लिए निशुल्क कोचिंग की व्यवस्था है। लेकिन लॉकडाउन में पढ़ाई ऑनलाइन हो रही है। विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई में दिक्कतों को सामना करना पड़ रहा है। योजना के तहत पंजीकृत छात्रा साक्षी पांडेय ने बताया कि उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप पर स्टडी मैटेरियल दिया जा रहा है लेकिन बहुत सारे ऐसे बिंदु हैं जिनका समाधान संवाद से ही संभव है। आमने-सामने पढ़ाई में ज्यादा सहूलियत थी। वहीं रवि राव कहते हैं ऑनलाइन पढ़ाई से तैयारी बेहतर ढंग से नहीं हो पा रही है। जो मैैटेरियल हैं वह काफी नहीं है।
राजकीय जुबिली पुस्तकालय के प्रभारी गौरव जायसवाल ने कहा कि पुस्तकों का ब्योरा ऑनलाइन उपलब्ध कराने के लिए तेजी से काम चल रहा है। करीब 90 फीसदी काम पूरा हो गया है। बाहर गैलरी में एक कंप्यूटर भी लगाया जाएगा ताकि विद्यार्थी खुद अपनी पसंद की पुस्तकों को सर्च कर लें और उन्हें खोजने में आसानी हो।