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Vijay Raaz: यौन उत्पीड़न मामले में विजय राज को बड़ी राहत, सबूतों के अभाव में कोर्ट ने किया बरी

Thu, 15 May 2025 10:27 PM IST
सुवेश शुक्ला एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: सुवेश शुक्ला Updated Thu, 15 May 2025 10:27 PM IST
सार

Vijay Raaz: अभिनेता विजय राज को महाराष्ट्र की एक अदालत ने गुरुवार को 2020 में एक सहकर्मी द्वारा दायर यौन उत्पीड़न मामले में बरी कर दिया।

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Vijay Raaz acquitted in 2020 harassment case due to lack of evidence
विजय राज - फोटो : इंस्टाग्राम

विस्तार

अभिनेता विजय राज को महाराष्ट्र की एक अदालत ने गुरुवार को 2020 में एक सहकर्मी द्वारा दायर यौन उत्पीड़न मामले में बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश करने में विफल रहा। क्रू मेंबर ने आरोप लगाया था कि अभिनेता ने करीब पांच साल पहले फिल्म 'शेरनी' की शूटिंग के दौरान उसका यौन उत्पीड़न किया था।

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अभिनेता पर लगे थे ये आरोप
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (गोंदिया) महेंद्र सोरटे ने अभिनेता के खिलाफ यौन उत्पीड़न और पीछा करने के तहत लगाए गए आरोपों को हटा दिया। क्रू मेंबर ने आरोप लगाया था कि अभिनेता ने करीब पांच साल पहले फिल्म 'शेरनी' की शूटिंग के दौरान उसका यौन उत्पीड़न किया था। गोंदिया के रामनगर पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत के अनुसार, कथित अपराध 25 अक्टूबर, 2020 की रात और 29 अक्टूबर, 2020 की सुबह के बीच किया गया था।
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2020 में हुए थे गिरफ्तार
अभिनेता विजय राज को 4 नवंबर, 2020 को मध्य प्रदेश के बालाघाट में गिरफ्तार किया गया था। यहीं पर फिल्म क्रू रह रहा था। हालांकि, उन्हें उसी दिन जमानत पर रिहा कर दिया गया था। तब से कोर्ट में यह केस चल रहा था।
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नहीं मिले पर्याप्त सबूत
कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि शिकायतकर्ता ने कहा कि घटना एक होटल में हुई, लेकिन जांच अधिकारी मौके पर नहीं गए। न्यायाधीश ने कहा कि शिकायतकर्ता ने होटल में काम करने वाले दो-तीन लोगों के नाम बताए, लेकिन उनके बयान भी दर्ज नहीं किए गए। अदालत ने कहा, ‘जांच अधिकारी ने आगे कोई जांच नहीं की। इसलिए अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूत कमजोर और अपर्याप्त मालूम होते हैं। यहां तक कि सीसीटीवी फुटेज में भी आरोपी द्वारा कथित कृत्य करते हुए स्पष्ट रूप से नहीं दिखाया गया है।’

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के अपराध को निर्णायक रूप से साबित करने में विफल रहा, इसलिए संदेह का लाभ आरोपी को जाता है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए मौखिक साक्ष्य आरोपी को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं थे। इसलिए, उसे बरी किया जाता है। 

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