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ऐतिहासिक शो में ड्रेस और ज्वेलरी भी है जरूरी: नीरुशा

Sun, 02 Jun 2013 02:08 PM IST
संजना शर्मा
संजना शर्मा Updated Sun, 02 Jun 2013 02:08 PM IST
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exclusive interview of jewellery and dress designer nirusha

किसी भी कहानी में सच्चाई होना बहुत जरूरी है। तभी वह लोगों को जंचती है। यह सच्चाई केवल भावनाओं, किरदारों या तारीखों की ही नहीं, पोशाकों और माहौल की भी होती है।

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तभी तो चाहे फिक्शन शो 'बालवीर' हो या कि सोनी एंटरटेनमेंट चैनल पर आ रहा 'भारत का वीर पुत्र महाराणा प्रताप', ज्वेलरी और कॉस्ट्यूम्स शो का एक महत्वपूर्ण अंग बन जाते हैं।
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किसी भी शो को खास बनाने में ड्रेस और ज्वेलरी डिजाइनर की बड़ी भूमिका होती है। कहानी और किरदार के हिसाब से उस वक्त के रहन-सहन का शोध करना।

वैसी ही कारीगरी ढूंढ़ निकालना और चित्रों में झलकते इतिहास को सेट पर साकार करना या फिर कल्पना और क्रिएटिविटी को मिक्स कर एक काल्पनिक किरदार को परदे पर साकार करना। यह काम हर शो के लिए जरूरी होता है।
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तभी तो नीरुशा बारह सालों से इस प्रोफेशन में हैं। 'भारत का वीर पुत्र महाराणा प्रताप' शो के लिए ड्रेस और सेट डिजाइनिंग का काम कर रही नीरुशा ने अब तक लगभग 28 ऐतिहासिक शो डिजाइन किए हैं।

ऐतिहासिक शो की बात इसलिए क्योंकि यह एक स्पेशलिस्ट का ही काम होता है और नीरुशा की तो पीएचडी ही इतिहास में है। अब तक उन्हें उनके काम के लिए 28 अवॉर्ड्स भी मिले हैं।

नीरुशा की डिजाइनिंग सब टीवी के 'बालवीर', लाइफ ओके पर 'देवों के देव महादेव' और फिलहाल सोनी एंटरटेनमेंट चैनल के 'भारत का वीर पुत्र महाराणा प्रताप' में देख सकते हैं।

महाराणा प्रताप शो के लिए की गई अपनी मेहनत का ब्योरा देते हुए नीरुशा बताती हैं, 'शो की डिजाइनिंग करते वक्त हमें यह भी देखना था कि महाराणा का किरदार केवल एक आइकन ही नहीं, बच्चों में सुपरहीरो जैसा माना जाता है। इसलिए उनका गेटअप टिपिकल राजकुमारों वाला ही नहीं हो सकता, उसमें हमें कुछ और जोड़ना था।'

वे आगे कहती हैं, 'हमारा दूसरा चैलेंज यह था कि हमें एक ओर राजपूताना डिजाइन्स पर ध्यान देना था, तो दूसरी ओर मुगल स्टाइलिंग भी देखनी थी। कुछेक क्रिएशंस में हमने राजस्थानी लोकल डिजाइनर्स की मदद ली।'

निरूशा बताती हैं कि, 'शो में महाराणा प्रताप के पिता का एक हार हमने वैसा ही हूबहू बनवा लिया, जैसा कि तस्वीरों में दिखाया गया है। असली हार में दस हजार छोटे हीरे जड़े हैं। इतने छोटे कि आप उन्हें मैग्नीफाइंग ग्लास से देख सकते हैं। हमने भी लगभग उतने ही लगवाए और मैग्नीफाइंग ग्लास से ही देखने पर पता चलता है कि वे असली हीरे नहीं हैं।'

निरूशा के मुताबिक, 'एक-एक गेटअप पर खर्च भी खूब आया है। एक-डेढ़ लाख तक कॉस्ट पहुंच गई।'

नीरुशा थियेटर, एआईआर और एनएसडी से जुड़ी रहीं, वहां शौकिया डिजाइनर के तौर पर जिम्मेदारी निभाती थीं। फिर एक्टर बनने मुंबई आईं, लेकिन यहां भी बतौर डिजाइनर उनकी ख्याति पहुंच गई और उनका पहला असाइनमेंट हुआ सीरियल 'हातिम'।


डिजाइंस के नाते वह सीरियल नीरुशा के दिल के बेहद करीब है। नीरुशा की डिजाइन का करिश्मा आप जल्द ही स्टार प्लस पर आने वाले धारावाहिक 'महाभारत' में भी देखेंगे।

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