साउथ एक्टर मोहनलाल को बड़ा झटका, केरल हाईकोर्ट ने रद्द किए हाथीदांत रखने के प्रमाण पत्र
Actor Mohanlal Ivories ownership Certificates Case: केरल हाईकोर्ट ने साउथ सिनेमा के पॉपुलर एक्टर मोहनलाल को बड़ा झटका दिया है। उन्होंने हाथीदांत को लेकर जो स्वामित्व प्रमाणपत्र दिखाए थे, उन्हें अमान्य घोषित कर दिया गया है।
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केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मोहनलाल के पास मौजूद हाथीदांत की वस्तुओं के लिए वन विभाग द्वारा जारी किए गए स्वामित्व प्रमाणपत्र अमान्य घोषित कर दिए। कोर्ट का कहना है कि यह कानूनी रूप से लागू नहीं किए जा सकते हैं।
कोच्चि निवासी ने दायर की याचिका
पीटीआई की खबर के अनुसार न्यायमूर्ति ए.के जयशंकरन नांबियार और न्यायमूर्ति जोबिन सेबेस्टियन की कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर राज्य सरकार मोहनलाल को हाथीदांत की वस्तुएं रखने की अनुमति देना चाहती है, तो वह वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 40(4) के तहत एक नई अधिसूचना जारी कर सकती है।
यह फैसला एलूर, कोच्चि निवासी पॉलोज के ए द्वारा दायर एक याचिका पर आया। इस याचिका में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 40(4) के तहत जारी राज्य सरकार की अधिसूचनाओं को चुनौती दी गई थी। दरअसल, मोहनलाल को मुख्य वन्यजीव वार्डन के सामने दो जोड़ी हाथीदांत और 13 हाथीदांत की कलाकृतियां घोषित करने और बाद में अधिनियम की धारा 42 के तहत स्वामित्व प्रमाणपत्र की अनुमति दी गई थी।
कोर्ट ने नहीं माना राज्य सरकार का तर्क
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि वन विभाग ने प्रमाण पत्र जारी कर दिए थे। जबकि हाथीदांत से संबंधित आपराधिक कार्यवाही पेरुंबवूर स्थित न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट न्यायालय में पहले से ही लंबित थी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि सरकार ने मोहनलाल को हाथीदांत से संबंधित वस्तुओं की घोषणा करने के लिए अधिसूचनाएं जारी की थीं। अभिनेता ने उनका पालन भी किया था। लेकिन अहम सवाल यह था कि क्या वे अधिसूचनाएं वैधानिक आवश्यकताओं को पूरा करती थीं। कोर्ट ने बताया कि राज्य ने स्वीकार किया है कि अधिसूचनाएं आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित नहीं की गई थीं, जो अधिनियम के तहत एक अनिवार्य कदम है। सरकार ने तर्क दिया कि अन्य माध्यमों से प्रचार पर्याप्त है। लेकिन कोर्ट ने इस बात को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा, ‘हम राज्य सरकार के उक्त तर्क को स्वीकार नहीं कर सकते।’
कोर्ट ने माना कि अधिसूचना को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित न करने से आदेश अमान्य हो गए। कोर्ट ने कहा, ‘जब किसी वैधानिक शक्ति का इस्तेमाल अधिनियम के तहत निर्धारित तरीके से नहीं किया जाता है, तो उस शक्ति का इस्तेमाल हुआ है, ऐसा नहीं माना जा सकता।’ ये खबर भी पढ़ें: मोहनलाल की 'वृषभा' के लिए दर्शकों को करना होगा इंतजार, आगे खिसकी रिलीज डेट, जानिए अब कब दस्तक देगी फिल्म?
आखिर में प्रमाण पत्र रद्द कर दिए
आगे कोर्ट ने कहा, ‘हम यह निष्कर्ष निकालते हैं कि 16 दिसंबर, 2015 और 17 फरवरी, 2016 के सरकारी आदेश शुरू से ही अमान्य और कानूनी रूप से अप्रवर्तनीय हैं। सरकारी आदेशों को रद्द करते हुए अदालत ने इस बात पर टिप्पणी करने से परहेज किया कि स्वामित्व प्रमाण पत्र कैसे जारी किए गए।