Yamini Krishnamurthy: 'आपने हमारी विरासत को समृद्ध किया' यामिनी कृष्णमूर्ति के निधन पर पीएम मोदी ने जताया शोक
भरतनाट्यम डांसर यामिनी कृष्णमूर्ति अब हमारे बीच नहीं रहीं। शनिवार 3 अगस्त को उन्होंने अपोलो अस्पताल में अंतिम सांस ली। पीएम नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की है।
विस्तार
लोकप्रिय भरतनाट्यम नृत्यांगना यामिनी कृष्णमूर्ति ने कल शनिवार 3 अगस्त को दुनिया को अलविदा कह दिया। 84 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। नृत्यांगना के मैनेजर और सचिव गणेश ने इस दुखद खबर पुष्टी की। नृत्यांगना के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त किया है। आज रविवार को उन्होंने एक्स पर पोस्ट साझा किया है।
सोशल मीडिया पर साझा किया पोस्ट
पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट साझा कर लिखा है, 'डॉ. यामिनी कृष्णमूर्ति के निधन की खबर से बेहद दुःख हुआ। भारतीय शास्त्रीय नृत्य के प्रति उनकी उत्कृष्टता और समर्पण ने कई पीढ़ियों को प्रेरित किया है और हमारे सांस्कृतिक परिदृश्य पर एक अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने हमारी विरासत को समृद्ध करने के लिए बहुत काम किया। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदना। ओम शांति'।
Pained by the passing away of Dr. Yamini Krishnamurthy. Her excellence and dedication to Indian classical dance have inspired generations and left an indelible mark on our cultural landscape. She has worked greatly to enrich our heritage. Condolences to her family and admirers.…
— Narendra Modi (@narendramodi) August 4, 2024
सात माह से आईसीयू में थीं नृत्यांगना
यामिनी कृष्णमूर्ति उम्र संबंधी समस्याओं से पीड़ित थीं और पिछले सात महीने से आईसीयू में थीं। कृष्णमूर्ति के परिवार में दो बहनें हैं। यामिनी कृष्णमूर्ति का जन्म आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के मदनपल्ली में हुआ था। उनका पालन-पोषण तमिलनाडु के चिदम्बरम में हुआ था। यामिनी कृष्णमूर्ति ने 1957 में मद्रास में डेब्यू किया था। उन्हें तिरुमाला तिरूपति देवस्थानम की अस्थाना नर्तकी (निवासी नर्तकी) होने का सम्मान प्राप्त था। उन्हें कुचिपुड़ी नृत्य शैली की 'मशाल वाहक' के रूप में भी जाना जाता था।
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कई सम्मानों से नवाजा गया
नृत्यांगना अपने संस्थान, यामिनी स्कूल ऑफ डांस, हौज खास, नई दिल्ली में युवा नर्तकियों को नृत्य की शिक्षा देती थीं। यामिनी कृष्णमूर्ति के नृत्य करियर ने उन्हें कई पुरस्कार दिलाए, जिनमें पद्म श्री (1968), पद्म भूषण (2001), और पद्म विभूषण (2016) शामिल हैं, जो भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से हैं।
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