Pahalgam Terror Attack: 'आखिर कब तक कश्मीर को सहना होगा'?, आतंकी हमले पर सोनाली बेंद्रे का दिल छूने वाला पोस्ट
Sonali Bendre Condemn Pahalgam Terror Attack: पहलगाम आतंकी हमले के दो दिन बाद आज गुरुवार को अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे ने दिल छू लेने वाला पोस्ट शेयर किया है। उन्होंने सवाल किया है कि आखिर कब तक घाटी को यह सहना होगा?
विस्तार
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले की घटना से पूरे देश में उबाल है। आतंकियों के इस कायराना हमले में 26 पर्यटकों की जान चली गई। हर कोई साजिशकर्ताओं को सख्त सजा देने की मांग कर रहा है। फिल्मी हस्तियां भी इस घटना पर प्रतिक्रिया दे रही हैं। सोनाली बेंद्रे ने सोशल मीडिया पर एक नोट शेयर किया है, जो काफी मार्मिक है।
'वे तो सुकून तलाशने घाटी आए थे'
सोनाली बेंद्रे ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट से एक पोस्ट शेयर किया है। इसमें आतंकी हमले में मारे गए पर्यटकों के नाम हैं। इसके साथ उन्होंने लिखा है, 'वे देवदार के पेड़ों में सुकून तलाशने आए थे। बर्फीली वादियों का रुख किया था उन्होंने कुछ खूबसूरत लम्हे बिताने के लिए। वर्षों तक सांस रोके रखने के बाद आखिरकार वे घाटी की सैर पर आए थे कुछ शांति के लिए'।
लोग खुले आसमान के नीचे कहानी रच रहे थे कि...
आगे लिखा है, 'परिवार। दोस्त। हनीमून पर आए जोड़े। अपनी मुलायम ऊनी आस्तीन को खींचते हुए नन्हे मासूम बच्चे। वे एक और सवारी की ख्वाहिश करते लोग, एक और खूबसूरत तस्वीर उतारने वाले सैलानी, खुले आसमान के नीचे जो एक कहानी रच रहे थे कि अचानक वह आवाज आई, जिसके लिए कोई सैलानी घाटी नहीं गया था। वह आवाज जो कभी किसी को पसंद नहीं होती, किसी से ताल्लुक नहीं रखती'।
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'खाली कैफे में चाय उबलती ही रह गई'
सोनाली बेंद्रे ने लिखा है, 'जो दिन उनके लिए यादगार होना चाहिए था, वह सुर्खियों और शवों की गिनती में बदल गया। वे सैनिक नहीं थे। वे लड़ाके भी नहीं। वे तो महज सामान्य लोग थे, जो छुट्टियां मनाने आए थे। वे एक ऐसी जद्दोजहद में फंसे जो कभी उनकी थी ही नहीं। एक बार फिर, कश्मीर, जिसने उम्मीदें देखी थीं, जिसने स्वागत करने की हिम्मत की, वह खुद को समेट लेता है। शटर बंद। घोड़े बे-रास्ते हो गए। खाली कैफे में चाय उबलती ही रह गईं और छूट गईं। इस जगह को कितनी बार खोना होगा, इससे पहले कि इसे बस यूं ही रहने दिया जाए, जैसी ये है'?