Karan Veer Mehra: पहलगाम हमले पर कविता सुनाकर ट्रोल हुए करण वीर मेहरा, ट्रोलर्स बोले- ऑडिशन दे रहे हो क्या?
कई फिल्म, टीवी सेलिब्रिटीज ने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले पर दुख जताया है। टीवी एक्टर करण वीर मेहरा ने भी पहलगाम हमले को लेकर अपना एक सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया है। इस वीडियो में वह एक कविता बोल रहे हैं। इस बात को लेकर ही सोशल मीडिया यूजर करण को ट्रोल कर रहे हैं।
विस्तार
टीवी एक्टर करण वीर मेहरा को सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल किया जा रहा है। एक्टर ने पहलगाम हमले को लेकर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें एक कविता बोलते नजर आए। जिसे देखकर, सुनकर फैंस तक नाराज हुए। जानिए, ऐसा क्या कह दिया है करण वीर मेहरा ने? और यूजर ने क्या खरी-खोटी एक्टर को सुनाई?
करण वीर मेहरा ने कही ये कविता
‘बिग बॉस 18’ के विनर और टीवी एक्टर करण वीर मेहरा ने जो वीडियो पोस्ट किया, उसमें वह एक कविता कहते हैं। कविता की पक्तियां कुछ यूं हैं, ‘बांट दिया इस धरती को, क्या चांद सितारों का होगा? शिव की गंगा भी पानी है, आबे जमजम भी पानी है। पंडित भी पिए मौला भी पिए, तो पानी का मजहब क्या होगा? एक है सूरज, चांद है एक, एक हवा में सांस है सबकी। नस्लों का करें जो बंटवारा, रहभर वो कौन का ढोंगी है। सवाल तो बस एक ही है, क्या अल्लाह ने मंदिर तोड़ा था या राम ने मस्जिद तोड़ी है? बांट दिया इस धरती को, कोई हिंदू है, कोई मुसलमान, कोई सिख तो कोई ईसाई। बस सबने इंसान ना होने की है कसम खाई।’ करण तो पहलगाम हमले को लेकर अपनी भावना जता रहे थे लेकिन कुछ यूजर को कविता कहने का उनका अंदाज पसंद नहीं आया। कुछ यूजर को लगा कि वो एक्टिंग कर रहे हैं? ऑडिशन जैसा दे रहे हैं?
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यूजर ने खरी-खोटी सुनाई
करण वीर मेहरा का यह वीडियो इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट किया गया है। इस वीडियो के कमेंट सेक्शन में लोगों ने करण को खूब खरी-खोटी सुनाई है। एक यूजर लिखता है, ‘भाई वो सैड म्यूजिक सर्च करके लगाओ। इससे ज्यादा इमोशन आते हैं। रिंग लाइट की जगह सॉफ्टबॉक्स ले लो। हमें पता नहीं चलेगा कि रिंग लाइट लगाई है। वहीं एक दूसरा यूजर लिखता है, ‘मैंने आपकी जर्नी को देखा है, आपको पसंद भी करता हूं लेकिन ये पोस्ट क्यों की? मैं आपसे बहुत निराश हूं।’
फैंस ने बचाव भी किया
एक तरफ जहां करण वीर मेहरा ट्रोल हुए, वहीं कुछ फैंस उनका बचाव करते दिखे। फैंस का कहना है कि करण वीर मेहरा सही बात कर रहे हैं। लोगों के बीच नफरत नहीं फैलनी चाहिए। वह करण को इस तरह की कविता करने के लिए सराह रहे हैं।