Nushrratt Bharuccha: मंदिर जाने पर ट्रोल्स को नुसरत का जवाब; ‘मुझे फर्क नहीं पड़ता, मैं नमाज भी पढ़ती हूं’
Nushrratt Bharuccha On Trolling: नुसरत भरूचा अक्सर मंदिर जाती रहती हैं और उसकी तस्वीरें भी सामने आती रहती हैं। इसको लेकर उन्हें कई मौकों पर आलोचनाओं का भी शिकार होना पड़ता है। अब नुसरत ने इन आलोचनाओं का जवाब दिया है। जानिए एक्ट्रेस ने क्या कुछ कहा।
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अभिनेत्री नुसरत भरूचा इन दिनों अपनी हालिया रिलीज फिल्म ‘छोरी 2’ को लेकर सुर्खियों में बनी हुई हैं। फिल्म को लोगों की और क्रिटिक्स की मिली-जुली प्रतिक्रिया मिल रही है। हाल ही में नुसरत ने अपने कपड़ों के चुनाव और मंदिर जाने पर होने वाली आलोचनाओं और ट्रोलिंग पर बात की। उन्होंने बताया कि उनके लिए धर्म के मायने क्या हैं और वो क्यों मंदिर और पूजा स्थलों पर जाना पसंद करती हैं।
मेरी आस्था वास्तविक है
शुभांकर मिश्रा के साथ पॉडकास्ट में बात करते हुए अभिनेत्री नुसरत भरूचा ने कहा, “धर्म से मेरा जुड़ाव मेरे लिए बहुत ही व्यक्तिगत और सार्थक है। मेरे लिए, मेरी आस्था वास्तविक है। अवास्तविक चीजें होती हैं और यही मेरी आस्था को मजबूत करती हैं। इसलिए मैं अभी भी जुड़ी हुई हूं, अभी भी मजबूत हूं और मुझे पता है कि मुझे इसी रास्ते पर चलना है। मेरा परिवार दूसरों पर अपनी मान्यताओं को थोपे बिना, व्यक्तिगत रूप से आस्था का पालन करने की स्वतंत्रता का समर्थन करता है।”
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मैं नमाज पढ़ती हूं
अभिनेत्री ने आगे अपने मंदिर जाने पर बात करते हुए कहा, “मेरा मानना है कि जहां भी आपको शांति मिले, चाहे वह मंदिर हो, गुरुद्वारा हो या चर्च हो, आपको वहां जाना चाहिए। मैं यह भी खुले तौर पर कहती हूं कि मैं नमाज पढ़ती हूं। अगर मुझे समय मिलता है, तो मैं दिन में पांच बार प्रार्थना करती हूं। मैं यात्रा करते समय अपनी प्रार्थना की चटाई भी साथ ले जाती हूं।”
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कपड़ों और आस्था को लेकर हुई आलोचना
आस्था के प्रति अपने दृष्टिकोण के बावजूद नुसरत ने खुलासा किया कि उन्हें अक्सर कड़ी आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा है। खासकर जब बात उनके कपड़ों और उनके जाने के स्थान की आती है। उन्होंने कहा, “चाहे वह मेरे कपड़ों के बारे में हो या मैं कहां जाती हूं, मुझे टिप्पणियों का सामना करना पड़ा है। जब मैं अपनी फोटो पोस्ट करती हूं, तो लोग पूछते हैं कि वह किस तरह की मुस्लिम है? उसके कपड़े देखो। हालांकि, मुझे इन आलोचनाओं से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है। यह मुझे नहीं बदलता। यह मुझे मंदिर जाने या नमाज पढ़ने से नहीं रोकेगा। मैं दोनों काम करती रहूंगी। क्योंकि यही मेरा विश्वास है मैं इनका मजबूती से जवाब देती हूं। क्योंकि मेरी पसंद और मेरी शैली मेरी व्यक्तिगत चीज है।”