Nora Fatehi: जब यशराज फिल्म्स ने नोरा को फिल्म के लिए किया रिजेक्ट, अभिनेत्री ने गुस्से में तोड़ दिया था फोन
निराशा का वह पल नोरा के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। नोरा ने आगे कहा, “हर किसी का अपना समय होता है, और जब वह समय आता है, तो सभी दरवाजे खुल जाते हैं। लेकिन अगर मैं उन दरवाजों को जबर्दस्ती खोलती रहूं, जो मेरे लिए खुलने के लिए नहीं हैं, तो इससे मुझे कोई मदद नहीं मिलने वाली है।”
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नोरा फतेही आज बॉलीवुड में किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। बतौर डांसर फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना चुकीं नोरा आज सबकी पसंदीदा अभिनेत्रियों में से एक हैं। नोरा पिछली बार फिल्म 'मडगांव एक्सप्रेस' में नजर आईं। यह फिल्म दर्शकों के बीच अच्छी प्रतिक्रिया बटोरने में असफल साबित हुई। अब हाल ही में, नोरा फतेही ने बताया कि यशराज फिल्म्स से रिजेक्शन फेस करने के बाद उन्होंने अपना फोन तोड़ दिया था, उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिए थे। आइए जानते हैं कि नोरा ने और क्या बताया है।
इस रिजेक्शन को नहीं झेल पाईं नोरा
नोरा ने मेलबर्न के इंडियन फेस्टिवल में पूर्व फिल्म समीक्षक राजीव मसंद के साथ एक साक्षात्कार में कहा, "मुझे याद है कि एक बार मैं ऑडिशन के लिए गई थी। यह यशराज फिल्म्स के लिए था। मैंने वाकई कई सप्ताह लाइन्स को रटने में बिताए... मैं सोच रही थी, 'मैंने इसे क्रेक कर दिया'। उन्होंने मुझे वापस नहीं बुलाया, फीडबैक था, 'वह इतनी अच्छी नहीं है'। मुझे याद है कि यह सुनकर... मैंने गुस्से में अपना सेल फोन तोड़ दिया, उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिए।"
निराशा का वह पल नोरा के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। नोरा ने आगे कहा, “हर किसी का अपना समय होता है, और जब वह समय आता है, तो सभी दरवाजे खुल जाते हैं। लेकिन अगर मैं उन दरवाजों को जबर्दस्ती खोलती रहूं, जो मेरे लिए खुलने के लिए नहीं हैं, तो इससे मुझे कोई मदद नहीं मिलने वाली है।”
रिजेक्शन फेस करने में नहीं कतरातीं अभिनेत्री
नोरा ने कहा कि पीछे मुड़कर देखने पर, उन्हें समझ में आया कि वह रिजेक्शन पर ज्यादा रिएक्ट कर रही थीं। क्योंकि जिन प्रोजेक्ट्स के लिए उसे मना किया गया था, वे उतने अच्छे नहीं रहे। अभिनेत्री ने कहा, “जब वे फिल्में रिलीज हुईं, तो वे फ्लॉप हो गईं, या वे बहुत खराब प्रोजेक्ट थे, और मैं सोचती थी, 'हे भगवान, क्या मैं उस प्रोजेक्ट के लिए रोई थी? मैंने उस फिल्म के लिए अपना फोन तोड़ा था?' वह मेरे करियर को खराब कर सकती थी। इसलिए मैंने जाने देना सीख लिया।”