Udaipur Files Row: सुप्रीम कोर्ट से 'उदयपुर फाइल्स' की रिलीज पर रोक नहीं, वापस दिल्ली हाईकोर्ट जाने को कहा
Supreme Court On Udaipur Files: विजय राज की फिल्म उदयपुर फाइल्स का विवाद अभी भी जारी। अब सुप्रीम कोर्ट ने अपनी ओर से फिल्म की रिलीज पर रोक से इंकार कर दिया है। जानिए अब मामले में आगे क्या होगा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अपनी रिलीज से पहले ही विवादों में फंसी फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ अभी भी कोर्ट के चक्कर ही लगा रही है। हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट की ओर से फिल्म की रिलीज पर रोक नहीं रह गई है। आज सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म से जुड़े मामले पर सुनवाई करते हुए अपनी ओर से फिल्म की रिलीज पर से रोक नहीं हटाने की बात कही है। हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने मेकर्स को फिर से दिल्ली हाईकोर्ट जाने को कहा है। साथ ही दिल्ली हाईकोर्ट से 'उदयपुर फाइल्स' की रिलीज को मंजूरी देने के केंद्र के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करने को कहा है। सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली सोमवार 28 जुलाई को दिल्ली उच्च न्यायालय से इस मामले में सुनवाई करने को कहा है।
मेकर्स ने जारी की ‘उदयपुर फाइल्स’ की नई रिलीज डेट
सुप्रीम कोर्ट की ओर से 'उदयपुर फाइल्स' की रिलीज पर रोक हटाने की बात कहने के बाद ही फिल्म के निर्देशक भरत श्रीनेत ने 'उदयपुर फाइल्स' की नई रिलीज डेट की घोषणा कर दी है। फिल्म के निर्देशक भरत श्रीनेत ने कहा कि फिल्म 8 अगस्त, 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। हालांकि, इससे पहले 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट से इस मामले में सुनवाई करने को कहा है।
एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने जताई थी संभावना
एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने ये संभावना जताई थी कि वो मामले को दिल्ली हाईकोर्ट के पास वापस भेज सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि कन्हैया लाल हत्याकांड के आरोपी मोहम्मद जावेद की याचिका भी हाईकोर्ट भेज सकते हैं। याचिकाकर्ता जावेद ने अपने मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की थी।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने का लगाया आरोप
बता दें कि याचिकाकर्ता जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने आरोप लगाया है कि फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ मुस्लिम समुदाय को बदनाम करती है। मौलाना अरशद मदनी की तरफ से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने दलील दी कि सीबीएफसी (CBFC) पैनल के कई सदस्य एक ही मौजूदा सत्तारूढ़ राजनीतिक दल के सदस्य थे और उन्होंने ही फिल्म को मंजूरी दे दी।